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Modi-Putin Meet: भारत – रूस शिखर वार्ता संपन्न, जानें दोनों देशों के बीच किन-किन क्षेत्रों में हुए समझौते
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Friday, December 5, 2025
Last Updated On: Saturday, December 6, 2025
हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के बीच हुई ऐतिहासिक बैठक में कुल सात क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं. बैठक के बाद दोनों नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. बैठक में इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, December 6, 2025
Modi-Putin Meet: नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई. इस ऐतिहासिक बैठक के बाद दोनों देशों ने प्रवासन, स्वास्थ्य सेवा, मेडिकल शिक्षा, खाद्य सुरक्षा, शिपबिल्डिंग, केमिकल्स और उर्वरकों सहित सात अहम क्षेत्रों में समझौतों पर हस्ताक्षर किया. ये समझौते भारत – रूस रणनीतिक साझेदारी को और नई मजबूती देने वाले माने जा रहे हैं.
भारत पर ट्रंप टैरिफ, अमेरिका का यूक्रेन युद्ध को लेकर संशोधित शांति मसौदे पर रूस से चल रही बातचीत के बीच राष्ट्रपति पुतिन का यह भारत दौरा कई मायने में महत्वपूर्ण है. इस दौरे पर खासकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करीब से नजर रख रहे हैं.
बैठक के बाद दोनों नेता ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के नागरिकों के लिए 30 दिनों की वैधता वाला फ्री ई-टूरिस्ट वीज़ा शुरू करने की घोषणा की. इसे दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया गया.
सात क्षेत्रों में हुए प्रमुख समझौते
दोनों देशों के बीच इन सात क्षेत्रों में प्रमुख समझौतों हुए-
- सहयोग और प्रवासन पर समझौता
- अस्थायी श्रम गतिविधियों पर समझौता
- स्वास्थ्य सेवा और मेडिकल शिक्षा पर समझौता
- खाद्य सुरक्षा और मानकों पर समझौता
- ध्रुवीय जहाजों (Polar Ships) पर समझौता
- समुद्री सहयोग पर समझौता
- उर्वरकों पर सहयोग का समझौता
इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम पर सहमति
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना हमारी साझा प्राथमिकता है. इसके लिए हमने वर्ष 2030 तक के लिए एक व्यापक इकोनॉमिक कोऑपरेशन प्रोग्राम पर सहमति बनाई है, जिससे व्यापार और निवेश को संतुलित, विविध और टिकाऊ बनाया जा सकेगा.’
कनेक्टिविटी, शिपबिल्डिंग और न्यूक्लियर एनर्जी पर फोकस
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देश इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC), नॉर्दर्न सी रूट और चेन्नई–व्लादिवोस्तोक मैरीटाइम कॉरिडोर को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाएंगे. उन्होंने कहा कि पोलर वॉटर में भारतीय सीफेरर्स को ट्रेनिंग देने में रूस सहयोग करेगा,, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में भारत की भागीदारी बढ़ेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे.
शिपबिल्डिंग सेक्टर में सहयोग को ‘मेक इन इंडिया’ के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इससे रोजगार, कौशल विकास और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत आधार मिलेगा. सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में दशकों पुराने सहयोग को उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण बताया.
क्रिटिकल मिनरल्स, स्किलिंग और लोगों के बीच संपर्क
क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा, हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और नई पीढ़ी के उद्योगों को मजबूती मिलने की संभावना है. प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में रूस में भारत के दो नए कांसुलेट खोले गए हैं, जिससे नागरिक संपर्क और तेज होगा. उन्होंने स्किलिंग, वोकेशनल एजुकेशन, छात्रों, खिलाड़ियों और स्कोलर्स के आदान-प्रदान को बढ़ाने की भी बात कही.
आतंकवाद और यूक्रेन संकट पर भारत
पहलगाम आतंकी हमला और क्रॉकस सिटी हॉल पर हुए हमले का ज़िक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद मानवता के मूल्यों पर सीधा प्रहार है, इसके खिलाफ वैश्विक एकता जरूरी है. यूक्रेन संकट पर उन्होंने दोहराया कि भारत न्यूट्रल नहीं, बल्कि शांति के पक्ष में खड़ा देश है. भारत हर शांति प्रयास का समर्थन करता है.
मेक इन इंडिया में सहयोग
दोनों पक्ष मेक-इन-इंडिया प्रोग्राम के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और जॉइंट वेंचर स्थापित करने पर सहमत हुए हैं. इसके तहत भारतीय सेना की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ आपसी दोस्त, तीसरे देशों को एक्सपोर्ट करने के लिए रूसी मूल के हथियारों और रक्षा उपकरणों के रखरखाव के लिए स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स, एग्रीगेट्स और अन्य प्रोडक्ट्स की भारत में जॉइंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा.
क्या कहा पुतिन ने?
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि भारत – रूस संबंध अत्यंत मजबूत हंद और व्यापार रुपए-रूबल में बढ़ रहा है. उन्होंने भारत को बिना रुकावट ईंधन आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया और ‘मेक इन इंडिया’ को समर्थन देने की घोषणा की. उन्होंने भारत में रूस द्वारा बनाए जा रहे सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र को एक प्रमुख ‘फ्लैगशिप प्रोजेक्ट’ बताया.
उन्होंने ब्रिक्स के मंच पर भारत-रूस सहयोग को ‘न्यायपूर्ण और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था’ की दिशा में अहम बताया.
25 वर्षों की रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन की 2001 की पहली भारत यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि उसी यात्रा में भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव रखी गई थी. उस रणनीतिक साझेदारी का 25 वर्ष पूरा हुआ है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसे दूरदर्शी नेतृत्व का उदाहरण बताया.
इस बैठक के दौरान विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव और शक्तिकांत दास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. यह शिखर वार्ता भारत–रूस संबंधों को ऊर्जा, व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और जनसंपर्क के स्तर पर नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है.















