Special Coverage
व्हाइट हाउस में तेल पर सीक्रेट मीटिंग: वेनेजुएला में बदलाव क्यों और किसके लिए, हुआ खुलासा
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, January 10, 2026
Last Updated On: Saturday, January 10, 2026
वेनेजुएला में बदलाव का असली उद्देश्य शासन सुधार नहीं, बल्कि ऊर्जा संसाधनों का पुनर्वितरण था, वह भी अमेरिकी शर्तों पर. आतंकवाद और नशीली दवाओं का नैरेटिव अब महज एक मुखौटा बनकर रह गया है. कुछ घंटे पहले व्हाइट हाउस में बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियों के साथ ट्रंप की बैठक ने इस बात को और मजबूत किया है.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, January 10, 2026
Secret Meeting at White House: नशीले पदार्थों और आतंकवाद के नाम पर वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को अब नए तथ्यों के साथ देखा जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया गतिविधियां साफ संकेत दे रही हैं कि यह हमला सुरक्षा या लोकतंत्र के लिए नहीं था. बल्कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार पर नियंत्रण की रणनीति का हिस्सा था. वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और उसके बाद व्हाइट हाउस में अमेरिका के बड़े तेल कंपनियों के साथ हुई बैठकों ने उनकी असली मंशा को सार्वजनिक कर दिया है. राष्ट्रपति ट्रंप भी इसे अब कई बार स्वीकार कर चुके हैं.
आतंकवाद नहीं, ऊर्जा प्राथमिकता
तीन जनवरी की रात अमेरिकी सेना ने कराकस में छापेमारी कर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में ले लिया था. आधिकारिक बयान में इसे नशीली दवाओं की तस्करी और आतंकवाद से जोड़कर पेश किया गया. इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आए, उन्होंने इस नैरेटिव को कमजोर कर दिया. मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के लिए अपनी नीति के केंद्र में तेल को रख दिया.
व्हाइट हाउस में सजी तेल की मेज
नौ दिसंबर को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने एक्सॉन मोबिल, शेवरॉन, कोनोको फिलिप्स जैसी दिग्गज अमेरिकी तेल कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ बंद कमरे में बैठक की. चर्चा का एजेंडा स्पष्ट था, वेनेजुएला. ट्रंप ने इन कंपनियों से देश में 100 अरब डॉलर तक के निवेश की अपेक्षा जताई. ताकि वहां के जर्जर ऊर्जा ढांचे को पुनर्जीवित किया जा सके. साथ ही तेल उत्पादन को अभूतपूर्व स्तर तक पहुंचाया जा सके.
बैठक में ट्रंप ने क्या कहा?
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा, ‘अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला के जर्जर ऊर्जा ढांचे के पुनर्निर्माण का अवसर मिलेगा. वहां कौन सी कंपनी जाएगी, यह हम तय करेंगे.’ बैठक में ट्रंप का यह बयान कि वेनेजुएला में कौन सी तेल कंपनी जाएगी, उसे हम तय करने जा रहे हैं, उनका यह कथन वेनेजुएला की संप्रभुता पर सीधे सवाल खड़े करता है. इससे यह संकेत मिलता है कि वहां भविष्य की सरकार, तेल नीतियां और संसाधनों का नियंत्रण वाशिंगटन की शर्तों पर तय होगा.
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आज अमेरिका बड़े तेल कंपनियों के साथ बैठक की.
- ट्रंप ने उनसे वेनेजुएला के कमजोर एनर्जी इंडस्ट्री को ठीक करने का आग्रह किया.
- अमेरिकी तेल दिग्गज वेनेजुएला की राजनीतिक स्थिरता और निवेश लागत को लेकर आशंकित हैं.
- सबसे बड़ी अमेरिकी तेल कंपनी एक्सॉन का कहना है कि वेनेजुएला में फिलहाल निवेश नहीं किया जा सकता.
- सूत्रों के अनुसार, शेवरॉन, कोनोको फिलिप्स भी वेनेजुएला में निवेश करने में जल्दबाजी को लेकर सतर्क हैं.
50 मिलियन बैरल का समझौता
ट्रंप ने वेनेजुएला के अंतरिम नेताओं के साथ हुए उस समझौते की भी प्रशंसा की, जिसके तहत अमेरिका को 50 मिलियन बैरल कच्चा तेल आपूर्ति किया जाएगा. ट्रंप द्वारा यह आपूर्ति अनिश्चित काल तक जारी रहने की उम्मीद जताई गई है. अमेरिका की कई रिफाइनरियां पहले से ही वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को रिफाइन करने के लिए विशेष रूप से तैयार हैं.
ट्रंप के मुताबिक, ‘इससे अमेरिका में ऊर्जा की कीमतें और कम होंगी.’
समुद्र में तेल टैंकरों की जब्ती
एक ओर निवेश की बातें हो रही हैं, दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना वेनेजुएला के तेल टैंकरों को समुद्र में जब्त कर रही है. ट्रंप प्रशासन की ओर से अब तक पांचवीं तेल टैंकरों की जब्ती की घोषणा हो चुकी है. ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि वेनेजुएला के तेल राजस्व को नियंत्रित करना जरूरी है ताकि वह ‘अमेरिकी हितों’ के अनुरूप काम करे.
हालांकि, ट्रंप के विपक्षी डेमोक्रेटिक सांसदों ने इसे खुली जबरन वसूली बताया है.
तेल कंपनियों की दुविधा
राष्ट्रपति ट्रंप वेनेजुएला को तेल कंपनियों के लिए सुनहरे अवसर की तरह पेश कर रहे हैं. लेकिन अधिकांश कंपनियां सतर्क हैं. एक्सॉन मोबिल के CEO डैरेन वुड्स ने साफ कहा कि फिलहाल वेनेजुएला निवेश के लायक नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि उनकी कंपनी की संपत्तियां वहां दो बार जब्त की जा चुकी हैं. तीसरी बार लौटने के लिए बहुत बड़े बदलाव चाहिए.
सुरक्षा की गारंटी या नियंत्रण की शर्त?
ट्रंप ने तेल कंपनियों को वेनेजुएला में ‘फिजिकल और फाइनेंशियल सुरक्षा’ देने की गारंटी दी है. लेकिन यह सुरक्षा किस तरह दी जाएगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं बताया गया है. अमेरिका के ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने संकेत दिया कि अमेरिकी एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट बैंक के जरिए बड़े तेल प्रोजेक्ट्स को फंड किया जा सकता है.
शेवरॉन की राह अलग
शेवरॉन फिलहाल वेनेजुएला में सक्रिय एकमात्र अमेरिकी तेल कंपनी है. कंपनी के वाइस चेयरमैन मार्क नेल्सन ने कहा कि शेवरॉन निवेश के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन जोखिम स्पष्ट हैं.
दूसरी ओर, कई छोटी और प्राइवेट इक्विटी समर्थित कंपनियां ट्रंप की नीतियों की खुलकर तारीफ कर रही हैं और वेनेजुएला में उतरने को तैयार दिख रही हैं.
तेल का साम्राज्य
वेनेजुएला OPEC का सदस्य है. उसके पास दुनिया का सबसे बड़ा सिद्ध तेल भंडार है. इसके बावजूद वैश्विक आपूर्ति में उसकी हिस्सेदारी महज 1 प्रतिशत ही है. 1970 के दशक में जहां वह प्रतिदिन 35 लाख बैरल तेल निकालता था, आज उत्पादन उसके एक-तिहाई से भी कम है. दशकों के कुप्रबंधन, प्रतिबंधों और निवेश की कमी ने देश की ऊर्जा रीढ़ तोड़ दी है.
यह भी पढ़ें :- ईरान में सड़कों पर उबलता असंतोष: जानें खामेनेई का शासन कैसे पहुंचा सबसे खतरनाक दौर में















