Special Coverage
डूरंड लाइन पर फिर भड़की पाकिस्तान-अफगानिस्तान की जंग: एयर स्ट्राइक, कब्जे और बढ़ता अंतरराष्ट्रीय तनाव
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, February 27, 2026
Last Updated On: Friday, February 27, 2026
Pakistan-Afghanistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर संघर्ष ने भीषण रूप ले लिया है. एयर स्ट्राइक, सीमा चौकियों पर कब्जे और फाइटर जेट गिराने के दावों से हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं. दोनों देशों के नेता सख्त बयान दे रहे हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र और पड़ोसी देश शांति की अपील कर रहे हैं. युद्धविराम पर संकट गहराता जा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, February 27, 2026
Pakistan-Afghanistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव अब खुली लड़ाई में बदल चुका है. डूरंड लाइन पर लंबे समय से simmer कर रहा विवाद अचानक भड़क उठा और शुक्रवार की दरमियानी रात हालात विस्फोटक हो गए. पाकिस्तान की सेना ने काबुल, कंधार और पक्तिया में एयर स्ट्राइक की, जिसके बाद तालिबान ने “बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान” छेड़ दिया. दोनों ओर से गोलाबारी, रॉकेट और भारी हथियारों का इस्तेमाल हुआ. सीमा पर खूनखराबे की खबरों ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया है और हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं.
एयर स्ट्राइक से पलटवार तक: कैसे बढ़ी आग
अफगान रक्षा मंत्रालय के अनुसार 26 फरवरी की रात पाकिस्तानी हमलों में महिलाओं और बच्चों की भी जान गई. इसके जवाब में अफगान बलों ने पकतिका, पकतिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान में कार्रवाई करते हुए दो सैन्य अड्डों और 19 पोस्ट पर कब्जे का दावा किया. वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसने “ग़ज़ब-ए-हक़” नाम से जवाबी ऑपरेशन चलाया, जिसमें 130 से अधिक तालिबानी लड़ाके मारे गए. दूसरी तरफ तालिबान ने दावा किया कि 55 पाकिस्तानी सैनिक ढेर हुए. दोनों देशों के आंकड़े एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, जिससे सच्चाई धुंध में छिपी हुई है.
आसमान से वार: फाइटर जेट गिराने का दावा
तनाव तब और बढ़ गया जब अफगान पक्ष ने दावा किया कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे पाकिस्तान के एक फाइटर जेट को मार गिराया. सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई कि गिराया गया विमान कौन सा था. जेट विमानों की गड़गड़ाहट काबुल और कंधार तक सुनाई दी. धमाकों और गोलीबारी की आवाज़ों ने राजधानी में दहशत फैला दी. अगर यह दावा सही साबित होता है तो यह संघर्ष को और गहरा बना सकता है, क्योंकि हवाई ताकत किसी भी युद्ध का निर्णायक पहलू होती है.
नेताओं के सख्त तेवर: समझौते से इंकार
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने साफ कहा कि देश की संप्रभुता और एकता पर कोई समझौता नहीं होगा. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी सेना की क्षमता पर भरोसा जताते हुए आक्रामक ताकतों को कुचलने की चेतावनी दी. दूसरी ओर तालिबान के प्रवक्ता ने जोरदार पलटवार की बात कही. अफगान सेना प्रमुख कारी फसीहुद्दीन फितरत खुद मोर्चे की कमान संभाले हुए हैं. दोनों देशों की सियासी और सैन्य नेतृत्व की भाषा से साफ है कि फिलहाल पीछे हटने का मूड किसी का नहीं है.
डूरंड लाइन: 1893 से सुलगता विवाद
करीब 2,640 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच तय हुई थी. इस सीमा ने पश्तून आबादी को दो हिस्सों में बांट दिया. 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद यह विवाद और गहरा गया. अफगानिस्तान ने कभी इसे पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय सीमा के रूप में स्वीकार नहीं किया. तालिबान सरकार भी सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध करती रही है. यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि आज की हिंसक झड़पों की जड़ मानी जा रही है.
आतंकवाद का आरोप-प्रत्यारोप
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि तालिबान के सत्ता में आने के बाद उसके यहां आतंकी हमलों में वृद्धि हुई है, खासकर सीमा से सटे इलाकों में. इस्लामाबाद का आरोप है कि अफगान जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान विरोधी तत्व कर रहे हैं. वहीं अफगानिस्तान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता है और कहता है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक समस्याओं का ठीकरा उस पर फोड़ रहा है. यही आरोप-प्रत्यारोप रिश्तों को और जहरीला बना रहे हैं.
अंतरराष्ट्रीय चिंता और कूटनीति की कोशिश
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने बढ़ते संघर्ष पर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. कतर की मध्यस्थता में जो युद्धविराम बना था, वह अब खतरे में है. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पेशकश की है, खासकर रमज़ान के महीने में शांति की अपील की है. सऊदी अरब के साथ भी पाकिस्तान की कूटनीतिक बातचीत जारी है.
आगे क्या? क्षेत्रीय स्थिरता पर बड़ा सवाल
अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा. दक्षिण एशिया और मध्य एशिया की सुरक्षा, व्यापार मार्ग और शरणार्थी संकट पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है. दोनों देशों के पास मजबूत सैन्य ताकत है, लेकिन किसी भी युद्ध का अंत बातचीत से ही होता है. फिलहाल सीमा पर बारूद की गंध है, दावे-प्रतिदावे हैं और अनिश्चितता का साया गहरा है. दुनिया की नजरें डूरंड लाइन पर टिकी हैं, जहां हर घंटे हालात बदल रहे हैं.
यह भी पढ़ें :- इजरायली संसद में पीएम मोदी का भाषण, क्यों भड़की मुस्लिम देशों की मीडिया और क्या हैं इसके सियासी मायने















