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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का करवाया एक और युद्धविराम टूटने के कगार पर
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, December 8, 2025
Last Updated On: Monday, December 8, 2025
दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा है. थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद 8 दिसंबर को उस समय और बढ़ गया, जब थाईलैंड ने कंबोडिया पर हवाई हमला किया.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, December 8, 2025
Trump Ceasefire Crisis 2025: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद को विश्व शांति का दूत मानते हैं. वह कई युद्ध रोकवाने का दावा भी करते हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर इजराइल-फिलिस्तीन में आज भी संघर्ष जारी है. वे दक्षिण-पूर्व एशिया में थाईलैंड और कंबोडिया के बीच जारी संघर्ष को रोकने में बेशक कामयाब हुए थे, लेकिन अन्य सभी जगह उन्हें मुंह की खानी पड़ी. थाईलैंड और कंबोडिया एक बार फिर से युद्ध के मुहाने पर खड़ा हो गया है.
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद ने 8 दिसंबर को फिर से गंभीर रूप ले लिया. एक रिपोर्ट के मुताबिक थाईलैंड सेना ने कंबोडिया की सैन्य ठिकानों पर कई हवाई हमले किए हैं. दोनों देशों ने एक-दूसरे पर संघर्ष विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है. दोनों देशों की सीमा पर हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं.
थाई सेना की ओर से जारी बयान
थाईलैंड सेना के अनुसार, सबसे ताजा झड़पें उबोन रत्चाथानी प्रांत के पूर्वी इलाकों में हुईं. इन इलाकों में कंबोडियाई सैनिकों की गोलीबारी में कम से कम एक थाई सैनिक की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए हैं. इसके बाद थाई वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कंबोडिया के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया.
थाईलैंड की सेना के मुताबिक ‘थाई पक्ष को अपने नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए मजबूरन हवाई हमले करने पड़े हैं. ये हमले पूरी तरह से सैन्य ठिकानों तक सीमित हैं.’
कंबोडिया का पलटवार
कंबोडिया के रक्षा मंत्रालय ने थाईलैंड सेना के दावों को खारिज किया है. मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि थाई सेना ने कई दिनों की उकसावे वाली कार्रवाइयों के बाद आज सुबह दो स्थानों पर अचानक हमले किए. मंत्रालय ने यह भी कहा कि कंबोडियाई सैनिकों ने अब तक किसी तरह की जवाबी गोलीबारी नहीं की है. थाई कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समझौतों और हाल ही में लागू संघर्ष विराम का सीधा उल्लंघन है.
थाईलैंड का आरोप
थाईलैंड की सेना, कंबोडिया पर आरोप लगा रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया है कि कंबोडियाई सेना ने थाईलैंड के नागरिक इलाकों की ओर BM-21 मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर से रॉकेट दागे. हालांकि इन हमलों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है.
लाखों नागरिकों का पलायन
सीमा पर बढ़ते तनाव के कारण थाईलैंड ने बड़े पैमाने पर नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. थाई अधिकारियों ने बताया, हमने चार सीमावर्ती जिलों से 3 लाख 85 हजार से अधिक नागरिकों को निकाला है. इनमें से करीब 35 हजार लोगों को अस्थायी राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है.
थाईलैंड के सीमावर्ती जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं. बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है. सीमाई गांव लगभग खाली होते जा रहे हैं. लोग अपने घर, पशुधन और आजीविका छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.
क्यों टूटा संघर्ष विराम
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच यह नया तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से हुए संघर्ष विराम के टूटने के बाद सामने आया है. इस साल जुलाई में दोनों देशों के बीच पांच दिनों तक भीषण संघर्ष हुआ था. उस संघर्ष में दोनों देशों ने रॉकेट और भारी तोपखाने का इस्तेमाल किया था.
तब कम से कम 48 लोगों की मौत हुई थी और करीब 3 लाख लोग विस्थापित हो गए थे. इसके बाद अक्टूबर में कुआलालंपुर में दोनों देशों ने एक विस्तारित शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.
पिछले महीने एक लैंडमाइन विस्फोट में थाई सैनिक के घायल होने के बाद थाईलैंड ने संघर्ष विराम के कार्यान्वयन को रोकने की घोषणा कर दी थी. इसके बाद से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं.
हुन सेन ने संयम बरतने को कहा
कंबोडिया के प्रभावशाली नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन (वर्तमान प्रधानमंत्री हुन मानेट के पिता) ने थाईलैंड की सेना को हमलावर बताया है. उन्होंने फेसबुक पर एक पोस्ट डालते हुए कंबोडियाई सेना से संयम बरतने की अपील की. फेसबुक पर हुन सेन ने लिखा, ‘जवाबी कार्रवाई की लाल रेखा तय कर दी गई है. मैं सभी स्तरों के कमांडरों से आग्रह करता हूं कि सैनिकों को उसी के अनुसार निर्देशित करें.
एक सदी पुराना विवाद
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवादित सीमा की लंबाई करीब 817 किलोमीटर है. इस विवाद की जड़ें औपनिवेशिक काल तक जाती हैं. 1907 में फ्रांस का कंबोडिया पर शासन था. उसने ही सीमा का नक्शा तैयार किया था. तभी से दोनों देशों के बीच कई हिस्सों को लेकर संप्रभुता का विवाद बना हुआ है.
अब तक शांति वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों से विवाद सुलझाने की कोशिशें होती रही हैं, लेकिन समय-समय पर यह तनाव हिंसक संघर्ष में बदल जाता है. इससे पहले 2011 में भी दोनों देशों के बीच एक सप्ताह तक युद्ध जैसी स्थिति बनी थी.
क्षेत्रीय सुरक्षा पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह टकराव पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है. आसियान (ASEAN) देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस नए संकट पर टिकी हुई हैं. फिलहाल सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण हैं.
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