US Delta Force क्यों है सबसे खतरनाक फोर्स? जानिए इससे जुड़ी A टू Z हर जानकारी

Authored By: Ranjan Gupta

Published On: Tuesday, January 6, 2026

Last Updated On: Wednesday, January 7, 2026

US Delta Force से जुड़ी पूरी जानकारी, क्यों मानी जाती है यह दुनिया की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स, जानें ट्रेनिंग और मिशन.
US Delta Force से जुड़ी पूरी जानकारी, क्यों मानी जाती है यह दुनिया की सबसे खतरनाक स्पेशल फोर्स, जानें ट्रेनिंग और मिशन.

US Delta Force दुनिया की सबसे खतरनाक और गोपनीय मिलिट्री यूनिट मानी जाती है. आतंकवाद विरोधी अभियानों से लेकर हाई-वैल्यू टारगेट को खत्म करने तक, इसके मिशन हमेशा रहस्य में रहते हैं. आखिर क्यों डेल्टा फोर्स को टियर-वन स्पेशल यूनिट कहा जाता है, कैसी होती है इसकी भर्ती, ट्रेनिंग और ऑपरेशन, इस रिपोर्ट में जानिए हर जरूरी जानकारी.

Authored By: Ranjan Gupta

Last Updated On: Wednesday, January 7, 2026

दुनिया में कई ताकतवर सेनाएं हैं लेकिन कुछ यूनिट्स ऐसी होती हैं जिनका नाम सुनते ही दुश्मन की रूह कांप जाती है. US Delta Force उन्हीं में से एक है. यह सिर्फ एक सैन्य टुकड़ी नहीं, बल्कि अमेरिका की सबसे गुप्त, सबसे सटीक और सबसे घातक स्पेशल फोर्स मानी जाती है. आधिकारिक तौर पर 1st Special Forces Operational Detachment–Delta (1st SFOD-D) कहलाने वाली यह यूनिट उन मिशनों को अंजाम देती है, जिनके बारे में सरकारें भी खुलकर बात नहीं करतीं. बंधक बचाव, आतंकियों के ठिकानों पर सर्जिकल रेड, हाई-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा और खुफिया ऑपरेशन डेल्टा फोर्स हमेशा सबसे आगे रहती है. इस लेख में हम जानेंगे कि आखिर US Delta Force क्यों है दुनिया की सबसे खतरनाक फोर्स, कैसे हुई इसकी स्थापना, कितनी कठोर होती है इसकी ट्रेनिंग और कौन-कौन से मिशन इसे बाकी सेनाओं से अलग बनाते हैं.

डेल्टा फोर्स क्या है?

डेल्टा फोर्स को आधिकारिक तौर पर 1st Special Forces Operational Detachment–Delta (1st SFOD-D) कहा जाता है. यह अमेरिकी सेना की सबसे गोपनीय और सबसे ताकतवर टियर-वन स्पेशल मिशन यूनिट मानी जाती है. इसका नाम शायद आम लोगों को कम सुनाई देता है, लेकिन जब दुनिया के सबसे खतरनाक मिशनों की बात आती है, तो डेल्टा फोर्स सबसे आगे रहती है.

इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के अनुसार, डेल्टा फोर्स का काम पारंपरिक युद्ध लड़ना नहीं होता. यह यूनिट उन हालात में काम करती है, जहां जोखिम बेहद ज्यादा होता है और मिशन पूरी तरह गोपनीय होता है. यहां रणनीति, धैर्य और सटीक कार्रवाई सबसे अहम होती है.
डेल्टा फोर्स आतंकवाद विरोधी अभियानों, हाई-वैल्यू टारगेट को पकड़ने या खत्म करने, बंधकों को सुरक्षित निकालने, डायरेक्ट एक्शन और विशेष निगरानी जैसे मिशनों में माहिर है. आसान शब्दों में कहें, तो जब हालात बेकाबू हो जाते हैं और सामान्य सेना के लिए काम मुश्किल हो जाता है, तब डेल्टा फोर्स को मैदान में उतारा जाता है.

डेल्टा फोर्स के गुप्त नाम

डेल्टा फोर्स की असली पहचान और इसके ऑपरेशन ज्यादातर समय छिपाकर रखे जाते हैं. इसी वजह से इस यूनिट को अलग-अलग कवर नामों से भी जाना जाता है, ताकि इसकी असल भूमिका सामने न आए.

डेल्टा फोर्स के प्रचलित कवर नाम:

  • Combat Applications Group (CAG)
  • Army Compartmented Elements (ACE)
  • Task Force Green

इन नामों का इस्तेमाल सरकारी दस्तावेजों और ऑपरेशनों में किया जाता है, ताकि यूनिट की पहचान पूरी तरह गोपनीय बनी रहे.

स्थापना और इतिहास

डेल्टा फोर्स की स्थापना 19 नवंबर 1977 को की गई थी. 1970 के दशक में अमेरिका को यह एहसास हुआ कि उसे एक ऐसी विशेष यूनिट की जरूरत है, जो आतंकवाद, हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग और अचानक पैदा होने वाले गंभीर संकटों से निपट सके.

इस यूनिट की प्रेरणा ब्रिटेन की मशहूर Special Air Service (SAS) से मिली. अमेरिकी सेना के कर्नल चार्ल्स बेकविथ ने SAS के साथ काम किया था. उन्होंने देखा था कि ब्रिटिश सेना किस तरह कम लोगों के साथ बेहद जटिल और खतरनाक मिशन को अंजाम देती है.

बेकविथ का मानना था कि अमेरिका के पास भी ऐसी ही एक यूनिट होनी चाहिए, जो चुपचाप काम करे, तेज़ी से निर्णय ले और दुश्मन को संभलने का मौका न दे. SAS के अनुभवों से सीख लेकर उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों के लिए एक आधुनिक और ज्यादा ताकतवर यूनिट की योजना बनाई. इसी सोच के तहत 1977 में डेल्टा फोर्स का गठन हुआ.

उस समय अमेरिका के पास कोई ऐसी यूनिट नहीं थी जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यंत जोखिम भरे आतंकवाद-रोधी मिशनों को पूरी कुशलता से अंजाम दे सके.

संरचना और संख्या

डेल्टा फोर्स का मुख्यालय फोर्ट ब्रैग, नॉर्थ कैरोलिना में स्थित है. यह यूनिट सीधे तौर पर Joint Special Operations Command (JSOC) के अधीन काम करती है, जबकि प्रशासनिक रूप से यह U.S. Army Special Operations Command (USASOC) से जुड़ी रहती है.

यह यूनिट संख्या में बहुत बड़ी नहीं है, क्योंकि यहां हर सदस्य को बेहद कड़ी चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.

डेल्टा फोर्स की अनुमानित संरचना

श्रेणी अनुमानित संख्या
कुल स्टाफ लगभग 2,000
फील्ड ऑपरेटर्स 300-400
सपोर्ट स्टाफ 1,600+

फील्ड ऑपरेटर्स सीधे मिशन में हिस्सा लेते हैं, जबकि बाकी लोग खुफिया, तकनीकी सहायता, एविएशन सपोर्ट, मेडिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं.

डेल्टा फोर्स का संगठन स्क्वाड्रन सिस्टम पर आधारित होता है. आम तौर पर इसमें A से G तक अलग-अलग स्क्वाड्रन होते हैं, जिनकी जिम्मेदारियां अलग-अलग होती हैं.

डेल्टा फोर्स में कैसे होती है भर्ती?

डेल्टा फोर्स में सीधी भर्ती नहीं होती. यहां वही सैनिक पहुंच पाते हैं, जो पहले ही अमेरिकी सेना की सबसे कठिन यूनिट्स में खुद को साबित कर चुके होते हैं.

भर्ती मुख्य रूप से 75वें रेंजर रेजिमेंट और आर्मी स्पेशल फोर्स (ग्रीन बेरेट्स) से होती है. हालांकि, अन्य सैन्य शाखाओं के अनुभवी जवानों को भी मौका मिलता है, बशर्ते उनके पास कम से कम 2.5 साल की सेवा अवधि हो.

चयन के बाद उम्मीदवारों को ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स (OTC) से गुजरना पड़ता है, जो करीब छह महीने तक चलता है. इस दौरान शारीरिक मजबूती के साथ-साथ मानसिक संतुलन की भी सख्त परीक्षा होती है.

आमतौर पर 120 उम्मीदवारों में से सिर्फ 12 से 14 ही इस कोर्स को पूरा कर पाते हैं. चयनित ऑपरेटर्स को “डी-बॉय” कहा जाता है, जो डेल्टा फोर्स के एलीट स्टेटस को दर्शाता है.

डेल्टा फोर्स का मुख्य काम

डेल्टा फोर्स का मुख्य काम उन मिशनों को अंजाम देना है, जिनमें जोखिम सबसे ज्यादा होता है. यह यूनिट सिर्फ लड़ाई नहीं लड़ती, बल्कि हालात को नियंत्रित करने और खतरे को जड़ से खत्म करने पर काम करती है.ॉ

मुख्य जिम्मेदारियां हैं:

  • आतंकवादी नेटवर्क को खत्म करना
  • बंधकों को सुरक्षित बचाना
  • बड़े खतरों को पहले ही रोकना
  • गुप्त निगरानी और जासूसी
  • हाई-प्रोफाइल लोगों की सुरक्षा

डेल्टा ऑपरेटर्स को हर माहौल में काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है. चाहे वह विमान हो, ट्रेन हो, जहाज हो या शहर की तंग गलियां.

ट्रेनिंग और चयन प्रक्रिया

डेल्टा फोर्स की ट्रेनिंग को दुनिया की सबसे कठिन ट्रेनिंग में गिना जाता है. यह आम सैनिकों के लिए नहीं होती.

चयन (Selection)

उम्मीदवारों को झेलनी पड़ती हैं:

  • शारीरिक और मानसिक परीक्षा
  • दिन-रात नेविगेशन टेस्ट
  • युद्ध कौशल की जांच

सबसे मुश्किल चुनौती होती है “The Long Walk”. इसमें करीब 20 किलो वजन के साथ 40 मील की दूरी तय करनी होती है. इस चरण में लगभग 90% उम्मीदवार बाहर हो जाते हैं.

ऑपरेटर ट्रेनिंग कोर्स (OTC)

जो चयन पास कर लेते हैं, उन्हें सिखाया जाता है:

  • एडवांस मार्क्समैनशिप
  • विस्फोटक और ब्रेचिंग
  • नजदीकी लड़ाई
  • खुफिया जानकारी जुटाना
  • VIP सुरक्षा
  • शहर, जंगल, रेगिस्तान और पानी में ऑपरेशन

यह ट्रेनिंग समय के साथ लगातार अपडेट होती रहती है.

डेल्टा फोर्स किस तरह के मिशन करती है?

डेल्टा फोर्स के मिशन किसी तय पैटर्न पर नहीं चलते. हर मिशन अलग होता है और हर बार खतरा बेहद ऊंचा होता है.

मुख्य मिशन प्रकार:

  • हाई-वैल्यू टारगेट ऑपरेशन
  • बंधक बचाव मिशन
  • डायरेक्ट एक्शन ऑपरेशन
  • विशेष निगरानी और खुफिया मिशन
  • क्लोज़ प्रोटेक्शन ऑपरेशन

प्रमुख मिशन और रिकॉर्ड

डेल्टा फोर्स के अधिकतर ऑपरेशन आज भी गोपनीय हैं, लेकिन कुछ मिशन इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं.

वर्ष ऑपरेशन स्थान
1980 ऑपरेशन ईगल क्लॉ ईरान
1989 ऑपरेशन एसिड गैम्बिट पनामा
1993 ब्लैक हॉक डाउन सोमालिया
2001 के बाद आतंकवाद विरोधी अभियान अफगानिस्तान, इराक
2019 अल-बगदादी रेड सीरिया
2026 ऑपरेशन एब्सॉलूट रिजॉल्ब वेनेजुएला

2026 का वेनेजुएला ऑपरेशन

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डेल्टा फोर्स को “ऑपरेशन Absolute Resolve” के तहत वेनेजुएला से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मिशन सौंपा गया. इस मिशन में महीनों की खुफिया तैयारी, CIA के साथ तालमेल और हवा, जमीन व समुद्र से संयुक्त कार्रवाई शामिल थी.
बताया जाता है कि इस ऑपरेशन का मकसद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को Caracas से बाहर निकालना था, जिसे अंततः एक युद्धपोत तक ले जाया गया.

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About the Author: Ranjan Gupta
रंजन कुमार गुप्ता डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें डिजिटल न्यूज चैनल में तीन वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है. वे कंटेंट राइटिंग, गहन रिसर्च और SEO ऑप्टिमाइजेशन में माहिर हैं. शब्दों से असर डालना उनकी कला है और कंटेंट को गूगल पर रैंक कराना उनका जुनून! वो न केवल पाठकों के लिए उपयोगी और रोचक लेख तैयार करते हैं, बल्कि गूगल के एल्गोरिदम को भी ध्यान में रखते हुए SEO-बेस्ड कंटेंट तैयार करते हैं. रंजन का मानना है कि "हर जानकारी अगर सही रूप में दी जाए, तो वह लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है." यही सोच उन्हें हर लेख में निखरने का अवसर देती है.
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