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पुतिन का भारत दौरा होने वाला है खास, जानें कौन-कौन से बड़े डील हो सकते हैं?
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Wednesday, December 3, 2025
Last Updated On: Wednesday, December 3, 2025
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को दो दिन की यात्रा पर भारत आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो कई बड़े रक्षा, ऊर्जा और व्यापारिक समझौतों का रास्ता खोल सकता है. S-400, SU-57, S-500 जैसे हाई-टेक हथियारों पर महत्वपूर्ण बातचीत होगी, जबकि कच्चे तेल, न्यूक्लियर प्रोजेक्ट और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर भी बड़ा कदम उठ सकता है. मोदी-पुतिन मुलाकात से 2030 तक के आर्थिक रोडमैप को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Wednesday, December 3, 2025
Putin Visit to India: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को भारत पहुंच रहे हैं और यह दौरा कई वजहों से ऐतिहासिक माना जा रहा है. 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला होने के बाद से दुनिया की राजनीति बदल गई है. ऐसे समय में पुतिन का भारत आना सिर्फ एक कूटनीतिक विजिट नहीं, बल्कि दो बड़े वैश्विक खिलाड़ियों भारत और रूस के बीच मजबूत होती साझेदारी का संकेत है. पुतिन 23वीं भारत-रूस वार्षिक समिट में हिस्सा लेंगे, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आमने-सामने मुलाकात होगी. यही मुलाकात आने वाले वर्षों की रणनीति तय कर सकती है.
इस विजिट में रक्षा क्षेत्र से जुड़े कई मेगा डील, ऊर्जा सहयोग, न्यूक्लियर प्रोजेक्ट की तेजी, आर्कटिक निवेश, उर्वरकों की सप्लाई और डिजिटल भुगतान प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण चर्चाएं शामिल रहेंगी. भारत पहले ही रूस से सस्ते कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है, ऐसे में इस यात्रा से व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया जा सकता है. साथ ही S-400 की अतिरिक्त खरीद, SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट का प्रस्ताव, और S-500 जैसे एडवांस सिस्टम पर संयुक्त उत्पादन जैसी हाई-इंपैक्ट डील्स की भी उम्मीद है.
आखिरी बार पुतिन 2021 में सिर्फ चार घंटे के लिए भारत आए थे, लेकिन उस छोटी यात्रा में भी 28 बड़े समझौते हुए थे. अब हालात बदल चुके हैं जिसमें वैश्विक तनाव बढ़ा है, ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव है और दोनों देशों के लिए सहयोग पहले से ज्यादा अहम हो गया है. यही वजह है कि इस दौरे को न सिर्फ सामरिक, बल्कि आर्थिक, तकनीकी और कूटनीतिक मोर्चे पर बेहद अहम माना जा रहा है. आने वाले दो दिनों में क्या-क्या बड़ा हो सकता है, यह पूरा लेख उसी पर आधारित है.
रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस के बीच हो सकती है डील
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम
S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का करीब पांच अरब डॉलर का सौदा भारत पहले ही कर चुका है. इसकी तीन रेजिमेंट भारत को मिल चुकी हैं. बाकी दो रेजिमेंट अगले साल तक मिलने की उम्मीद है. अब अतिरिक्त S-400 खरीदने पर भी चर्चा हो रही है. इस सिस्टम ने इसी साल पाकिस्तान से आए ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोककर अपनी क्षमता साबित की थी. इसकी वजह से यह डील लगातार चर्चा में है.
SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट
SU-57 स्टील्थ फाइटर जेट पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है. ये रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि कई मामलों में ये राफेल से भी आगे हैं. रूस भारत को इसकी लगभग 70% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने के लिए तैयार है. अगर समझौता हुआ, तो भविष्य में इनका उत्पादन भारत में भी किया जा सकता है. इससे वायुसेना की ताकत नई ऊंचाई पर पहुंचेगी.
S-500 एयर डिफेंस सिस्टम
दोनों देश S-500 एयर डिफेंस सिस्टम पर संयुक्त उत्पादन की संभावना पर भी बात कर रहे हैं. यह नए जमाने का सिस्टम है, जो हाइपरसोनिक मिसाइलों को भी इंटरसेप्ट कर सकता है. नौसेना के लिए मिसाइल सिस्टम और कई अन्य उपकरण भी लिस्ट में शामिल हैं. यह भी याद रहे कि भारत के करीब 70% रक्षा उपकरण अभी भी रूस से ही आते हैं. इसलिए इन नई परियोजनाओं को काफी अहम माना जा रहा है.
पैंटसीर एयर डिफेंस सिस्टम
भारत, रूस से शॉर्ट-रेंज पैंटसीर एयर डिफेंस सिस्टम लेने पर विचार कर रहा है. यह सिस्टम ड्रोन, हेलीकॉप्टर, क्रूज मिसाइल और छोटे हवाई खतरों को तुरंत मार गिराने में सक्षम है. इसे ट्रक पर लगाया जाता है, इसलिए यह बेहद मोबाइल है. इसकी मिसाइलें 1 से 12 किलोमीटर तक के लक्ष्य को भेद सकती हैं. वहीं इसकी तोप 0.2 से 4 किलोमीटर तक की दूरी पर सटीक हमला करती है. यह सिस्टम भारतीय सेना के लिए तेजी से प्रतिक्रिया देने वाला हथियार साबित हो सकता है.
वोरोनेज रडार सिस्टम
भारत और रूस के बीच वोरोनेज रडार सिस्टम पर भी डील हो सकती है. यह एक उन्नत प्रारंभिक चेतावनी रडार है, जो लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और विमानों की निगरानी करता है. इसकी रेंज करीब 8,000 किलोमीटर है. यह एक साथ 500 से ज्यादा उड़ने वाली वस्तुओं को ट्रैक कर सकता है. रूस के मिसाइल डिफेंस नेटवर्क का यह अहम हिस्सा है और अगर भारत इसे लेता है, तो हमारी निगरानी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.
ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर
अमेरिका की टैरिफ चेतावनियों के बावजूद रूस भारत को सबसे सस्ता कच्चा तेल दे रहा है. 2025 में भारत ने रिकॉर्ड मात्रा में रूसी तेल खरीदा. इस बार सम्मेलन में दोनों देश 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य तय करने वाले हैं. इसके साथ ही कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की गति बढ़ाने पर भी फोकस होगा. यह सौदा न सिर्फ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर भी असर डालेगा.
ट्रंप प्रशासन के दबाव के बीच यह भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. भारत रूस के आर्कटिक प्रोजेक्ट्स में निवेश बढ़ाने की तैयारी में है. इससे गैस और खनिज संसाधनों तक भारत की पहुंच और आसान होगी. यह साझेदारी दोनों देशों को वैश्विक सप्लाई चेन में भी मजबूत बनाएगी.
रूस से उन्नत उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने पर भी सहमति बन सकती है, जो किसानों के लिए राहत की खबर है. व्यापार में डिजिटल पेमेंट सिस्टम जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है, ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके. आर्कटिक क्षेत्र में गैस और खनिज परियोजनाओं पर आगे की बातचीत भी एजेंडे में है. अनुमान है कि इस दौरे में 10 से 15 नए समझौते हो सकते हैं.
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