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RBI Currency Printing: वह कौन-सा भारतीय नोट है जो नहीं छापता आरबीआई? जानें इसके पीछे का कारण
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, December 12, 2025
Last Updated On: Friday, December 12, 2025
भारत के करेंसी सिस्टम में जहां लगभग सभी नोटों की छपाई RBI करता है, वहीं एक नोट ऐसा भी है जो इस व्यवस्था से बिल्कुल अलग है. बल्कि सीधे भारत सरकार जारी करती है. इस अनोखी संरचना के पीछे कानून, इतिहास और वित्तीय नियमों का दिलचस्प मेल है, जो इस छोटे-से नोट को सबसे खास बनाता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, December 12, 2025
RBI Currency Printing: भारत का करेंसी सिस्टम दुनिया में सबसे सुरक्षित, सशक्त और रेगुलेटेड सिस्टमों में से एक माना जाता है. रोजमर्रा की जिंदगी में हम कई तरह के नोटों का इस्तेमाल करते हैं, और हमें यह लगता है कि सभी नोटों की छपाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI करता है. लेकिन इस व्यवस्था के बीच एक बड़ा और दिलचस्प राज़ छिपा है. भारत में सिर्फ एक ऐसा नोट है जिसे आरबीआई नहीं छापता, जबकि वह पूरी तरह से भारतीय मुद्रा का हिस्सा है. यह बात जितनी अनोखी है, उतनी ही जानकारीपूर्ण भी है, और इसे समझना हमारे लिए जरूरी है कि आखिर यह नोट बाकी सभी नोटों से अलग क्यों है.
कौन-सा भारतीय नोट जारी नहीं करता RBI?
भारत में ₹2 से लेकर ₹2000 तक के सभी नोटों की जिम्मेदारी रिजर्व बैंक संभालता है, लेकिन ₹1 का नोट इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं है. ₹1 का नोट एकमात्र ऐसा भारतीय नोट है जिसे आरबीआई छापता भी नहीं और जारी भी नहीं करता. यह नोट पूरी तरह से भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है, यही कारण है कि इस पर आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर नहीं, बल्कि वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं. इस विशेष पहचान के कारण यह नोट बाकी सभी नोटों से अलग दिखाई देता है और इसका कानूनी दर्जा भी बिल्कुल अलग है.
₹1 का नोट RBI क्यों नहीं छापता?
इसका जवाब छिपा है RBI Act, 1934 की धारा 22 में. इस धारा के अनुसार, रिजर्व बैंक को ₹2 और उससे अधिक मूल्यवर्ग के नोट जारी करने का अधिकार दिया गया है. कानून ने जानबूझकर ₹1 के नोट को इस अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा है. इसका अर्थ है कि ₹1 का नोट जारी करने की पूरी जिम्मेदारी और नियंत्रण भारत सरकार के पास रहता है. यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि राष्ट्र की सबसे छोटी करेंसी यूनिट पर नियंत्रण सीधे सरकार के हाथों में रहे और उसकी गारंटी भी केंद्र सरकार द्वारा ही दी जा सके.
₹1 के नोट को कागज़ का सिक्का क्यों माना जाता है?
कागज़ से बना होने के बावजूद ₹1 का नोट भारतीय कानून में एक सिक्के की तरह माना जाता है. भारतीय सिक्का अधिनियम 2011 की परिभाषा के अनुसार ₹1 के नोट को ‘कॉइन’ की कैटेगरी में रखा गया है. इसका मतलब है कि इसका मूल्य, इसका डिजाइन, इसकी छपाई और बाजार में इसकी उपलब्धता को नियंत्रित करने का अधिकार भारत सरकार के पास ही है. यही वजह है कि इस नोट के डिज़ाइन से लेकर इसके रंग और सुरक्षा फीचर्स तक हर चीज़ को तय करने का अधिकार वित्त मंत्रालय के पास होता है, और आरबीआई केवल इसके वितरण में एक एजेंट के रूप में सहायता करता है.
₹1 के नोट पर प्रॉमिस क्लॉज क्यों नहीं होता?
आपने देखा होगा कि RBI द्वारा जारी किए गए हर नोट पर एक वाक्य लिखा होता है – “मैं धारक को… रुपए अदा करने का वचन देता हूं.” लेकिन यह वाक्य ₹1 के नोट पर नहीं मिलता. इसका मुख्य कारण यह है कि इस नोट की वैल्यू की गारंटी आरबीआई नहीं, बल्कि भारत सरकार देती है. चूंकि ₹1 का नोट प्राइमरी करेंसी माना जाता है और इसकी जिम्मेदारी सीधे केंद्र सरकार पर होती है, इसलिए इसमें वचन क्लॉज लिखने की जरूरत नहीं होती. वित्त सचिव के हस्ताक्षर होने का अर्थ ही यही है कि इसकी पूरी जिम्मेदारी भारत सरकार अपने ऊपर लेती है.
₹1 के नोट की छपाई और वितरण कैसे होता है?
हालांकि ₹1 का नोट जारी करने का अधिकार भारत सरकार के पास है, लेकिन इसकी छपाई भी सरकार द्वारा संचालित अपनी प्रिंटिंग प्रेसों में की जाती है. इस छपाई प्रक्रिया में उपयोग होने वाले कागज़ से लेकर उसके रंग, आकार और डिज़ाइन तक सभी निर्णय वित्त मंत्रालय लेता है. छपाई के बाद इन नोटों को देशभर में पहुंचाने और उन्हें नियमित रूप से संचालित बनाए रखने की जिम्मेदारी आरबीआई निभाता है, लेकिन वह इसे केवल एक वितरक एजेंट की तरह ही संभालता है. नोट के वास्तविक स्वामित्व और नियंत्रण का अधिकार पूरी तरह से भारत सरकार के पास ही बना रहता है.
निष्कर्ष: छोटा नोट लेकिन खास पहचान वाला करेंसी
₹1 का नोट भले ही मूल्य के मामले में सबसे छोटा हो, लेकिन इसकी पहचान, छपाई प्रक्रिया और कानूनी स्थिति इसे देश के सभी नोटों में सबसे अनोखा बनाती है. यह एक ऐसा नोट है जिसे न तो आरबीआई छापता है और न ही इसमें आरबीआई गवर्नर के हस्ताक्षर होते हैं. यह भारत का वह विशेष करेंसी नोट है जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह से केंद्र सरकार के पास होती है. इसलिए अगली बार जब आप ₹1 का नोट अपने हाथ में लें, तो यह समझिए कि यह देश की करेंसी का सिर्फ छोटा हिस्सा नहीं, बल्कि एक बड़ा और रोचक अध्याय है.
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