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14 साल की उम्र में ऐसा कारनामा, क्रिकेट से सीधे राष्ट्रपति भवन पहुंचे वैभव सूर्यवंशी, रिकॉर्ड भी तोड़े और मिला देश का सबसे बड़ा सम्मान
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, December 26, 2025
Last Updated On: Friday, December 26, 2025
जिस उम्र में बच्चे अपने सपनों की पहली उड़ान भरते हैं, उसी उम्र में बिहार का 14 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी देशभर की पहचान बन चुका है. अपने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को चौंकाने वाले वैभव को अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया है. यह सम्मान न सिर्फ उनकी प्रतिभा की जीत है, बल्कि हर मेहनती बच्चे के लिए यह संदेश भी है कि कड़ी मेहनत कभी अनदेखी नहीं जाती.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, December 26, 2025
Vaibhav Suryavanshi: जिस उम्र में ज़्यादातर बच्चे अपने भविष्य के सपने देखना शुरू करते हैं, उसी उम्र में बिहार का एक लड़का देश के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा चुका है. क्रिकेट के मैदान पर अपने बल्ले से रिकॉर्ड तोड़ने वाला 14 साल का वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ एक उभरता खिलाड़ी नहीं, बल्कि देश की प्रेरणा बन चुका है. उनकी मेहनत, प्रतिभा और आत्मविश्वास ने उन्हें राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया है, जहां उन्हें देश के सबसे बड़े बाल सम्मान से नवाज़ा गया.
राष्ट्रपति भवन में गूंजा एक किशोर का नाम
वीर बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 20 असाधारण बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ से सम्मानित किया. ये बच्चे देश के 18 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए थे. इस समारोह में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार के युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की रही, जिन्हें राष्ट्रपति ने स्वयं अपने हाथों से पुरस्कार प्रदान किया. यह पल वैभव के जीवन का सबसे गर्व और यादगार क्षण बन गया.
कौन बन सकता है इस राष्ट्रीय सम्मान का हकदार
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार उन भारतीय बच्चों को दिया जाता है, जिनकी उम्र 5 साल से अधिक और 18 साल से कम होती है और जो भारत में निवास करते हैं. इन बच्चों का चयन महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा बेहद कड़ी प्रक्रिया के तहत किया जाता है. इस सम्मान को पाने वाले बच्चों को गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्यपथ पर होने वाली परेड में शामिल होने का भी गौरव प्राप्त होता है, जो किसी भी बच्चे के लिए ऐतिहासिक अनुभव होता है.
पुरस्कार की श्रेणियां और मिलने वाली नकद राशि
यह प्रतिष्ठित पुरस्कार पहले छह श्रेणियों में दिया जाता था, जिनमें कला एवं संस्कृति, बहादुरी, नवाचार, शिक्षा, सामाजिक सेवा और खेल शामिल थे. अब इसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी को भी जोड़ा गया है. इस पुरस्कार के तहत विजेता बच्चे को एक मेडल, एक प्रमाण पत्र और 1 लाख रुपये की नकद राशि प्रदान की जाती है. यह सम्मान न केवल आर्थिक सहयोग है, बल्कि देश की ओर से प्रतिभा को मिली बड़ी पहचान भी है.
बल्ले से लिखी गई रिकॉर्ड्स की कहानी
वैभव सूर्यवंशी ने अपने प्रदर्शन से न सिर्फ भारतीय क्रिकेट प्रेमियों, बल्कि दुनिया भर के पूर्व क्रिकेटरों को भी चौंका दिया है. आईपीएल में उन्होंने महज 35 गेंदों में शतक जड़कर तहलका मचा दिया था. वहीं विजय हजारे ट्रॉफी में केवल 36 गेंदों में शतक लगाकर उन्होंने इतिहास रच दिया. अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ खेले गए मैच में 84 गेंदों पर 190 रनों की विस्फोटक पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया. लिस्ट-ए क्रिकेट में वह भारत के तीसरे सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं.
प्रधानमंत्री से मुलाकात, युवाओं के लिए संदेश
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिलने के बाद वैभव सूर्यवंशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे. यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश है कि अगर प्रतिभा और मेहनत सच्ची हो, तो देश का सर्वोच्च नेतृत्व भी उसे पहचान देता है.
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है. यह दिन गुरु गोविंद सिंह के चार साहिबजादों अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह की शहादत को समर्पित है. 26 दिसंबर 1705 को मुगल सेना ने इन चारों वीर बालकों की हत्या कर दी थी. उनकी अद्भुत वीरता और बलिदान की याद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 में 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी, ताकि देश की नई पीढ़ी उनके साहस से प्रेरणा ले सके.
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