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भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकी? लावरोव ने किया बड़ा खुलासा
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, February 12, 2026
Last Updated On: Thursday, February 12, 2026
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर फैली अटकलों पर विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने साफ किया है कि भारत ने ऐसा कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है. उन्होंने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भारत की ओर से कोई संकेत नहीं मिला. भारत ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संतुलित नीति अपना रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, February 12, 2026
Russian oil: हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक सवाल तेजी से चर्चा में है कि क्या भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद रोक दी है? इस मुद्दे पर अब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का बड़ा बयान सामने आया है. लावरोव ने साफ शब्दों में कहा है कि भारत सरकार की ओर से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है कि वह रूसी तेल की खरीद बंद कर रही है. उन्होंने इस दावे को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से जोड़ते हुए कहा कि भारत की तरफ से अब तक ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है.
स्टेट ड्यूमा में लावरोव का स्पष्ट बयान
रूस की संसद स्टेट ड्यूमा में एक सांसद के सवाल का जवाब देते हुए लावरोव ने कहा, “आप कह रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह घोषणा की है कि भारत रूसी तेल नहीं खरीदेगा, लेकिन मैंने ऐसा बयान न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुना है और न ही किसी अन्य भारतीय नेता से.” उन्होंने दो टूक कहा कि भारत की ओर से इस तरह की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है और फिलहाल ऐसी खबरें सिर्फ अटकलों पर आधारित हैं.
अमेरिका पर दबाव बनाने का आरोप
लावरोव ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वॉशिंगटन भारत और अन्य ब्रिक्स देशों पर रूसी तेल न खरीदने का दबाव बना रहा है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका टैरिफ और प्रतिबंधों का इस्तेमाल कर इन देशों को रूस से दूरी बनाने के लिए मजबूर करना चाहता है. इससे पहले भी एक इंटरव्यू में लावरोव कह चुके हैं कि अमेरिका रूस के खिलाफ आर्थिक हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है और उसके रणनीतिक साझेदारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है.
ब्रिक्स बैठक में ऊर्जा बना अहम मुद्दा
लावरोव ने बताया कि भारत में हाल ही में हुई ब्रिक्स शेरपा बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ किया कि ऊर्जा सुरक्षा इस साल होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख एजेंडा होगा. भारत इस वर्ष ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे. ऐसे में भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर चर्चा और गहरी हो सकती है.
पुतिन की भारत यात्रा से मजबूत हुए रिश्ते
रूसी विदेश मंत्री ने दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण संयुक्त दस्तावेजों पर हस्ताक्षर हुए थे. लावरोव के अनुसार, इस यात्रा ने भारत-रूस के संबंधों को और मजबूत किया और दोनों देशों की विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई दी.
‘रिश्तों की कोई सीमा नहीं’- लावरोव
लावरोव ने भारत-रूस संबंधों को लेकर बेहद सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोई सीमा नहीं है. उन्होंने कहा, “रूस भारत के साथ संबंधों को उतनी दूर तक ले जाने के लिए तैयार है, जितना भारत चाहे. इसकी सीमा सिर्फ आकाश है.” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के नेताओं की अगली मुलाकात ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है.
ट्रंप के दावे और भारत की स्थिति
गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है. हालांकि भारत सरकार ने इस पर संतुलित रुख अपनाया है. विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने स्पष्ट किया कि भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिए विविधता बनाए रखेगा.
निष्कर्ष: अफवाहों से अलग है हकीकत
कुल मिलाकर, रूसी तेल को लेकर भारत की नीति में किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. लावरोव के बयान से यह साफ है कि फिलहाल भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने का कोई ऐलान नहीं किया है. अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति अपनाए हुए है.
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