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World Defence Budget 2026: दुनिया में ज्यादा सेना पर खर्च करने वाले 10 देश और भारत का स्थान
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, February 23, 2026
Last Updated On: Monday, February 23, 2026
World Defence Budget 2026 में बढ़ते वैश्विक तनाव और सुरक्षा चुनौतियों की साफ झलक मिलती है. दुनिया के कई देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं. सूची में भारत पांचवें स्थान पर है और रक्षा आधुनिकीकरण व स्वदेशी उत्पादन पर लगातार जोर दे रहा है. जानिए वो 10 देश, जो सेना पर पानी की तरह बहाते हैं पैसा….
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, February 23, 2026
World Defence Budget 2026: दुनिया इस समय ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां हर महाद्वीप पर किसी न किसी रूप में तनाव बना हुआ है. कहीं युद्ध चल रहा है, कहीं सीमा विवाद, तो कहीं तकनीकी वर्चस्व की होड़. ऐसे माहौल में देशों की प्राथमिकताओं में रक्षा बजट सबसे ऊपर आ गया है. World Defence Budget 2026 इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य की तस्वीर पेश करता है, जहां देश अपनी सुरक्षा के लिए अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं.
रक्षा बजट क्यों बन गया है सबसे बड़ा मुद्दा?
आज की जंग सिर्फ जमीन या समुद्र तक सीमित नहीं है, बल्कि साइबर स्पेस, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मिसाइल डिफेंस तक फैल चुकी है. यही वजह है कि कई देश अपनी आर्थिक स्थिति से ज्यादा खर्च सेना पर कर रहे हैं. कुछ देश कर्ज लेकर रक्षा जरूरतें पूरी कर रहे हैं, तो कुछ तकनीकी बढ़त हासिल करने के लिए हथियारों पर पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं.
अमेरिका: दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत
Global Firepower Index 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा बजट रखने वाला देश है. अमेरिका का रक्षा बजट करीब 831.5 बिलियन डॉलर है, जबकि डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस के लिए 849.9 बिलियन डॉलर की मंजूरी दी गई है. यह पैसा सेना के आधुनिकीकरण, अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, नौसेना के विस्तार और सैनिकों की सैलरी पर खर्च किया जा रहा है. दुनिया भर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और वैश्विक दखल के कारण उसका रक्षा खर्च लगातार ऊंचा बना रहता है.
चीन: तेज़ी से बढ़ती सैन्य शक्ति
चीन इस सूची में दूसरे स्थान पर है और उसका रक्षा बजट लगभग 303 बिलियन डॉलर है. चीन ने अपने सैन्य खर्च में करीब 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. इसका बड़ा हिस्सा नौसेना को मजबूत करने, मिसाइल सिस्टम, साइबर वॉरफेयर और आधुनिक हथियारों पर लगाया जा रहा है. अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते चीन अपनी सेना को तकनीकी रूप से बेहद सक्षम बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.
रूस: युद्ध के बाद बढ़ा सैन्य खर्च
रूस तीसरे नंबर पर है, जिसका अनुमानित रक्षा बजट 212.64 बिलियन डॉलर बताया गया है. रूस अपने रक्षा खर्च की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करता, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यूक्रेन युद्ध के बाद सैन्य खर्च में बड़ी बढ़ोतरी हुई है. रूस का फोकस हथियार उत्पादन, मिसाइल तकनीक और जमीनी सेनाओं को मजबूत करने पर है. मौजूदा हालात में रूस अपनी सैन्य क्षमता को बनाए रखने के लिए भारी निवेश कर रहा है.
जर्मनी: यूरोप की नई सैन्य तैयारी
जर्मनी चौथे स्थान पर है और उसका रक्षा बजट लगभग 127.4 बिलियन डॉलर है. लंबे समय तक सीमित सैन्य खर्च करने के बाद अब जर्मनी अपनी सेना को तेजी से आधुनिक बना रहा है. नाटो के जीडीपी के 2 प्रतिशत रक्षा खर्च के लक्ष्य को हासिल करना उसकी प्राथमिकता है. जर्मनी हथियारों की खरीद, सैन्य ढांचे के सुधार और सैनिकों की क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रहा है.
भारत: आत्मनिर्भर रक्षा की दिशा
भारत इस सूची में पांचवें स्थान पर है और उसका रक्षा बजट करीब 109 बिलियन डॉलर है. यह पिछले साल की तुलना में 9.53 प्रतिशत ज्यादा है. भारत अपने कुल केंद्रीय बजट का लगभग 13.45 प्रतिशत रक्षा पर खर्च कर रहा है. सरकार का फोकस सैन्य आधुनिकीकरण, स्वदेशी हथियारों की खरीद और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर है, ताकि विदेशी निर्भरता कम हो सके.
यूनाइटेड किंगडम: सुरक्षा खतरों की तैयारी
यूनाइटेड किंगडम छठे नंबर पर है और उसका रक्षा बजट लगभग 88.53 बिलियन डॉलर है. यह उसकी जीडीपी का करीब 2.26 प्रतिशत है. यूरोप में बढ़ते सुरक्षा खतरों और रूस-यूक्रेन युद्ध के असर को देखते हुए ब्रिटेन अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. सरकार की योजना 2035 तक रक्षा बजट को जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक ले जाने की है.
फ्रांस: समुद्र और आसमान पर फोकस
फ्रांस सातवें स्थान पर है और उसका रक्षा बजट करीब 67.23 बिलियन डॉलर है. यह उसकी जीडीपी का लगभग 2.02 प्रतिशत है. फ्रांस विमानवाहक पोत, युद्धपोत और एयर डिफेंस सिस्टम पर बड़ा निवेश कर रहा है. यूरोप और अफ्रीका में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए फ्रांस अपनी सैन्य मौजूदगी और तकनीकी क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है.
सऊदी अरब: स्थानीय रक्षा उद्योग पर ज़ोर
सऊदी अरब आठवें नंबर पर है और उसका रक्षा बजट लगभग 63.99 बिलियन डॉलर है. देश का फोकस सैन्य आधुनिकीकरण के साथ-साथ रक्षा उत्पादन को स्थानीय बनाने पर है. सऊदी अरब का लक्ष्य 2030 तक रक्षा खर्च का 50 प्रतिशत से अधिक देश के भीतर तैयार करना है. इसके तहत ड्रोन, एयरोस्पेस और बख्तरबंद वाहनों पर खास ध्यान दिया जा रहा है.
जापान: बढ़ते खतरे और बढ़ता बजट
जापान नौवें स्थान पर है और उसका रक्षा बजट लगभग 58 बिलियन डॉलर है. चीन, उत्तर कोरिया और रूस से जुड़े सुरक्षा खतरों के कारण जापान ने हाल के वर्षों में रक्षा खर्च तेजी से बढ़ाया है. उसका फोकस मिसाइल डिफेंस सिस्टम, समुद्री सुरक्षा और आधुनिक तकनीक पर है. जापान अपनी पारंपरिक रक्षा नीति में धीरे-धीरे बदलाव करता नजर आ रहा है.
ऑस्ट्रेलिया: इंडो-पैसिफिक पर नजर
ऑस्ट्रेलिया दसवें स्थान पर है और उसका रक्षा बजट करीब 57.35 बिलियन डॉलर है. साउथ चाइना सी में बढ़ते तनाव और चीन से संभावित खतरे को देखते हुए ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य क्षमताएं मजबूत कर रहा है. वह ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मिसाइल तकनीक पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा बनाए रखी जा सके.
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