Falgun Pradosh Vrat 2026: जानें प्रदोष काल की तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि पूरी जानकारी

Authored By: Nishant Singh

Published On: Saturday, February 28, 2026

Last Updated On: Saturday, February 28, 2026

Falgun Pradosh Vrat 2026 में प्रदोष काल के दौरान भगवान शिव की पूजा करते श्रद्धालु
Falgun Pradosh Vrat 2026 में प्रदोष काल के दौरान भगवान शिव की पूजा करते श्रद्धालु

Falgun Pradosh Vrat 2026: फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026, रविवार को रखा जाएगा. त्रयोदशी तिथि 28 फरवरी की शाम से शुरू होकर 1 मार्च की शाम तक रहेगी. प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा, अभिषेक और मंत्र जाप विशेष फलदायी माना जाता है. यह व्रत दोषों का शमन कर सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करता है.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Saturday, February 28, 2026

Falgun Pradosh Vrat 2026: सनातन परंपरा में हर महीने की त्रयोदशी तिथि को आने वाला प्रदोष व्रत बेहद खास माना जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर जीवन के दोषों का शमन होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है. साल 2026 में फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत विशेष रूप से शुभ योगों के कारण और भी अधिक फलदायी माना जा रहा है. खास बात यह है कि यह रवि प्रदोष के रूप में मनाया जाएगा, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है.

कब है फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत?

वर्ष 2026 में फाल्गुन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत रविवार, 1 मार्च 2026 को रखा जाएगा. यह शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि होगी. त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 28 फरवरी 2026, शनिवार को शाम 8 बजकर 43 मिनट पर होगी और इसका समापन 1 मार्च 2026, रविवार को शाम 7 बजकर 9 मिनट पर होगा. चूंकि प्रदोष व्रत की पूजा संध्या काल में की जाती है, इसलिए 1 मार्च को ही व्रत और पूजन किया जाएगा. रविवार को पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा, जो सूर्य और शिव दोनों की कृपा प्राप्त कराने वाला माना जाता है.

प्रदोष काल मुहूर्त और शुभ योग

प्रदोष व्रत का सबसे महत्वपूर्ण समय प्रदोष काल होता है, जो सूर्यास्त के आसपास का समय माना जाता है. 1 मार्च 2026 को प्रदोष काल लगभग शाम 6 बजे से रात 8 बजे के बीच रहेगा. इसी अवधि में भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन दुर्लभ शोभन योग का निर्माण भी हो रहा है, जो धार्मिक कार्यों और साधना के लिए बहुत उत्तम माना जाता है. ऐसे शुभ संयोग में की गई पूजा और जप का कई गुना फल प्राप्त होता है.

प्रदोष व्रत का महत्व और आध्यात्मिक लाभ

प्रदोष व्रत को दोषों का शमन करने वाला व्रत कहा गया है. मान्यता है कि इस दिन उपवास और शिव आराधना करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. जो लोग आर्थिक तंगी, मानसिक तनाव या पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहे होते हैं, उन्हें यह व्रत विशेष लाभ देता है. शिव और पार्वती की कृपा से दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है और संतान सुख की भी प्राप्ति होती है. फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह होली से पहले आने वाला आध्यात्मिक अवसर होता है, जो जीवन में नई शुरुआत का संकेत देता है.

व्रत की विधि और पूजा का तरीका

  • सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें.
  • दिनभर फलाहार या निर्जला उपवास रखें, मन में शिव का ध्यान बनाए रखें.
  • शाम को प्रदोष काल में पूजा स्थान को साफ कर दीपक जलाएं.
  • शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक करें.
  • बिल्व पत्र, धतूरा, सफेद फूल, फल और मिठाई अर्पित करें.
  • पंचामृत से भोग लगाकर भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
  • अंत में परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.

प्रदोष व्रत में कौन से मंत्र करें?

ॐ नमः शिवाय – इस पंचाक्षरी मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है.

महामृत्युंजय मंत्र –

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति, उत्तम स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है.
प्रदोष काल में शांत मन और पूर्ण श्रद्धा से मंत्र जप करने से भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है.

क्यों खास है फाल्गुन का अंतिम प्रदोष?

फाल्गुन का महीना भक्ति और उल्लास का प्रतीक माना जाता है. इस महीने का अंतिम प्रदोष व्रत भक्तों के लिए एक ऐसा अवसर है, जब वे पूरे महीने की साधना का फल प्राप्त कर सकते हैं. रवि प्रदोष और शुभ योग के संयोग में की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का द्वार खोलती है. जो भक्त श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत रखते हैं, उनके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं और सफलता के मार्ग प्रशस्त होते हैं.
फाल्गुन महीने का अंतिम प्रदोष व्रत 1 मार्च 2026 को है. यदि आप भी शिव कृपा और जीवन में सकारात्मक बदलाव की कामना करते हैं, तो इस पावन दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत और पूजा अवश्य करें.

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निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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