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UPSC के 100 साल पूरे! PM मोदी करेंगे बड़ा ऐलान, जारी होगा खास सिक्का और डाक टिकट
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Thursday, October 1, 2026
Last Updated On: Sunday, November 1, 2026
UPSC के 100 साल पूरे होने पर PM मोदी सिक्का और डाक टिकट जारी करेंगे. शताब्दी समारोह से जुड़ी अहम जानकारी यहां पढ़ें.
Authored By: Mazhar Pathan
Last Updated On: Sunday, November 1, 2026
देश में सिविल सेवाओं की भर्ती से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग यानी UPSC के लिए 1 अक्टूबर 2026 खास दिन है. आयोग अपनी स्थापना के 100 साल पूरे (UPSC 100 Years) कर रहा है. इस अवसर पर नई दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह का आयोजन किया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह 11 बजे कार्यक्रम में शामिल होंगे और सभा को संबोधित करेंगे. इसके साथ ही वह UPSC के शताब्दी वर्ष के मौके पर एक स्मारक सिक्का, स्मारक डाक टिकट और एक विशेष पुस्तक जारी करेंगे. यह कार्यक्रम एक साल से चल रहे शताब्दी समारोह का समापन भी होगा.
1 अक्टूबर 1926 को हुई थी Public Service Commission की स्थापना
UPSC की मौजूदा संवैधानिक संस्था बनने की कहानी करीब एक सदी पुरानी है. भारत में पहली Public Service Commission की स्थापना 1 अक्टूबर 1926 को हुई थी. इससे पहले सरकारी सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए एक स्थायी संस्था की जरूरत पर चर्चा हो चुकी थी.
भारत में संवैधानिक सुधारों से संबंधित 1919 के एक सरकारी दस्तावेज में भी सिविल सेवाओं के मामलों को व्यवस्थित तरीके से देखने के लिए स्थायी व्यवस्था की आवश्यकता पर जोर दिया गया था. इसके बाद 1924 में लॉर्ड ली की अध्यक्षता वाले Royal Commission on the Superior Civil Services in India ने Public Service Commission बनाने की सिफारिश की. इसके आधार पर 1 अक्टूबर 1926 को पहली Public Service Commission अस्तित्व में आई. इसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे.
आजादी के बाद UPSC को मिला संवैधानिक दर्जा
- समय के साथ आयोग की भूमिका और संरचना में बदलाव हुए. Government of India Act, 1935 के तहत Federal Public Service Commission की व्यवस्था की गई. आजादी के बाद इसी संस्थागत व्यवस्था ने Union Public Service Commission यानी UPSC का रूप लिया.
- 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के बाद UPSC को संवैधानिक दर्जा मिला. संविधान के अनुच्छेद 315 में संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान है. वहीं अनुच्छेद 320 आयोग के प्रमुख कार्यों से संबंधित है.
- इस संवैधानिक व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी सेवाओं में भर्ती और उससे जुड़े मामलों के लिए एक संस्थागत प्रक्रिया उपलब्ध कराना है.
UPSC करता है कई अहम परीक्षाओं का आयोजन
UPSC देश में संघ सरकार की विभिन्न सेवाओं के लिए भर्ती से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित करता है. इनमें Civil Services Examination यानी CSE सबसे चर्चित परीक्षाओं में शामिल है. इसी परीक्षा के माध्यम से भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS, भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS और अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए उम्मीदवारों का चयन किया जाता है.
आयोग केवल परीक्षा आयोजित करने तक सीमित नहीं है. वह चयन और इंटरव्यू के जरिए सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति और सेवा से जुड़े कुछ अन्य मामलों में भी सरकार को सलाह देता है. भर्ती नियमों को बनाने और उनमें बदलाव तथा अनुशासनात्मक मामलों में भी आयोग की भूमिका है.
भारत मंडपम में दो दिन का कार्यक्रम
UPSC का शताब्दी(UPSC 100 Years) समारोह दो दिनों का रखा गया है. 30 सितंबर को ‘शताब्दी समारोह- मंथन’ के तहत विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के संबोधन और पैनल चर्चा हुई. इसमें सार्वजनिक सेवा, प्रशासन और भर्ती व्यवस्था से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया.
इस कार्यक्रम में राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य, केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और UPSC से जुड़े अधिकारी शामिल हो रहे हैं.
PM मोदी जारी करेंगे स्मारक सिक्का और डाक टिकट
1 अक्टूबर को होने वाले मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी UPSC की 100 साल की यात्रा को याद करते हुए स्मारक सिक्का और स्मारक डाक टिकट जारी करेंगे. इसके अलावा वह ‘100 Landmark Judgements- Shaping the Policies of UPSC and Public Service Commissions in India’ नाम की पुस्तक भी जारी करेंगे.
यह पुस्तक UPSC और देश के विभिन्न Public Service Commissions से संबंधित नीतियों और कामकाज को प्रभावित करने वाले 100 महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों को संकलित करती है.
अगले 100 साल के लिए UPSC का फोकस
शताब्दी समारोह केवल पिछली यात्रा को याद करने तक सीमित नहीं है. 30 सितंबर को कार्यक्रम में UPSC के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार ने आयोग की आगे की दिशा को लेकर Trust, Transparency और Technology यानी विश्वास, पारदर्शिता और तकनीक को प्रमुख सिद्धांतों के रूप में रेखांकित किया.
इससे संकेत मिलता है कि आयोग आने वाले समय में भर्ती प्रक्रिया को तकनीक के साथ और बेहतर बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और संस्थागत भरोसे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है.
एक सदी की यात्रा का खास पड़ाव
UPSC की 100 साल की यात्रा भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था के विकास से भी जुड़ी हुई है. 1926 में सीमित सलाहकारी भूमिका वाली Public Service Commission से शुरू हुई यह व्यवस्था आज संविधान के तहत काम करने वाली संस्था बन चुकी है.
1 अक्टूबर का समारोह इसी लंबी संस्थागत यात्रा को याद करने और आने वाले वर्षों की दिशा पर चर्चा करने का अवसर होगा. भारत मंडपम में प्रधानमंत्री मोदी(PM Modi) की मौजूदगी और स्मारक सिक्का, डाक टिकट तथा पुस्तक का विमोचन इस शताब्दी समारोह के प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल रहेगा.
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