बॉडी को कैसे प्रभावित करता है क्रोनिक स्ट्रेस? लंदन के डॉक्टर ने बताए इसके खतरे और लक्षण

Authored By: Galgotias Times Bureau

Published On: Wednesday, November 26, 2025

Updated On: Wednesday, November 26, 2025

Stress Health Risk: क्रोनिक स्ट्रेस के खतरे और लक्षण जानें, कैसे यह शरीर की ऊर्जा, नींद और हार्ट हेल्थ को प्रभावित करता है.

क्रोनिक तनाव अक्सर धीरे-धीरे शरीर में असर डालता है, जब तक आप इसे महसूस नहीं करते. लंदन के चिकित्सक डॉ. सेरमेड मेझेर बताते हैं कि थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग और पाचन समस्याएँ इसके सूक्ष्म संकेत हैं. इन्हें नजरअंदाज करना स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है.

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Updated On: Wednesday, November 26, 2025

Stress Health Risk: अक्सर हम काम के बोझ, कम नींद और भागदौड़ को सामान्य मान लेते हैं, लेकिन शरीर लगातार संकेत देता रहता है कि सब ठीक नहीं है.  क्रोनिक तनाव खुलकर दिखाई नहीं देता, बल्कि थकान, सिरदर्द, मूड स्विंग, बदन दर्द और अनियमित नींद जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है.  जब हम इन संकेतों को लंबे समय तक अनदेखा करते हैं, तो शरीर और ज़ोर से प्रतिक्रिया देने लगता है.  लंदन के फैमिली डॉक्टर और कंटेंट क्रिएटर डॉ. सेरमेड मेझेर ने अपने हालिया इंस्टाग्राम पोस्ट में समझाया कि कैसे लगातार तनाव शरीर को धीरे-धीरे प्रभावित करता है और क्यों इसे समय रहते पहचानना जरूरी है. 

दीर्घकालिक तनाव का शरीर पर प्रभाव

डॉ. मेज़र के अनुसार, दीर्घकालिक तनाव सिर्फ मूड को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि यह शरीर की कई प्रणालियों पर भी दबाव डालता है.  हृदय प्रणाली में लंबे समय तक तनाव हार्मोन, जैसे कोर्टिसोल और एड्रेनालाईन, रक्तचाप बढ़ा सकते हैं, हृदय की धड़कन तेज कर सकते हैं और सूजन बढ़ा सकते हैं, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है. 

डॉ. मेज़र बताते हैं कि तनाव शरीर को लगातार लड़ो या भागो की स्थिति में रखता है.  इसके कारण तंत्रिका तंत्र हमेशा सतर्क रहता है, जिससे आराम करना, सोना और ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाता है.  साथ ही, आंत भी तनाव के प्रति तीव्र प्रतिक्रिया करती है और अक्सर स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों का पहला कारण यही बनता है.  जठरांत्र तंत्र तनाव के कारण मतली, पेट दर्द, दस्त, कब्ज या IBS जैसी समस्याओं के रूप में प्रतिक्रिया कर सकता है.   

तनाव के अनियंत्रित होने पर शरीर के चेतावनी संकेत

जब तनाव लंबे समय तक अनियंत्रित रहता है, तो यह हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित करता है.  डॉ. मेज़र बताते हैं कि अंतःस्रावी तंत्र लंबे समय तक तनाव हार्मोन के असर से प्रभावित होता है.  इससे चयापचय बिगड़ सकता है, भूख में बदलाव आ सकता है और प्रजनन हार्मोन पर भी असर पड़ सकता है. शरीर अंततः स्पष्ट चेतावनी संकेत भेजता है कि वह लंबे समय से दबाव में है.  थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, पाचन संबंधी समस्याएँ या खुद को तनावग्रस्त और थका हुआ महसूस करना ऐसे संकेत हैं.  ये कमजोरी नहीं, बल्कि चेतावनी हैं. 

डॉ. मेज़र कहते हैं कि इन संकेतों को जल्दी समझना बहुत जरूरी है.  अपने शरीर की आवाज़ सुनना, आराम करना, सीमाएँ तय करना और तनाव प्रबंधन की रणनीतियाँ अपनाना विलासिता नहीं, बल्कि शरीर को लंबे समय के तनाव से बचाने का तरीका है. 

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