GRAP क्या है और ये कैसे GRAP क्या है: दिल्ली-NCR में 2 नवंबर से लागू हुआ Stage 2, जानिए कैसे काम करता है ग्रैप और क्यों सिर्फ NCR में है काम करता है

Authored By: Rajeev Mandal

Published On: Thursday, November 5, 2026

Last Updated On: Thursday, November 5, 2026

GRAP क्या है और ये कैसे काम करता है
GRAP क्या है और ये कैसे काम करता है

दिल्ली-NCR में कई जगहों पर AQI 400 के पार 'गंभीर' (Severe) श्रेणी में दर्ज हो रहा है, जिससे स्मॉग और सांस लेने में भारी तकलीफ बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए GRAP के कड़े प्रतिबंध और एंटी-स्मॉग गन से पानी के छिड़काव जैसे उपाय लागू किए गए हैं। आइये विस्तार से जानते हैं ग्रैप के बारे में…

Authored By: Rajeev Mandal

Last Updated On: Thursday, November 5, 2026

हर साल अक्टूबर आते ही एक शब्द खबरों में छा जाता है – GRAP। दिल्ली का AQI 300 पार, GRAP-2 लागू, GRAP-3 लागू। निर्माण बंद, गाड़ियों पर रोक, स्कूल बंद। लेकिन सवाल ये है कि GRAP है क्या, और ये सिर्फ दिल्ली-NCR के लिए ही क्यों?

क्या है GRAP

GRAP का पूरा नाम है – Graded Response Action Plan। मतलब, जैसे-जैसे हवा गंदी होती जाएगी, वैसे-वैसे रोक भी सख्त होती जाएगी। इसे 2017 में सुप्रीम कोर्ट के कहने पर बनाया गया था। इसके 4 स्टेज हैं –

स्टेज-1: AQI 201-300, हवा खराब। धूल पर पानी छिड़काव, कंस्ट्रक्शन पर नजर, कूड़ा जलाने पर रोक।

स्टेज-2: AQI 301-400, बहुत खराब। कोयला-लकड़ी के तंदूर बंद, डीजल जनरेटर पर रोक, पार्किंग महंगी ताकि लोग गाड़ी कम निकालें।

स्टेज-3: AQI 401-450, गंभीर। सारे कंस्ट्रक्शन बंद, BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल गाड़ियों पर रोक।

स्टेज-4: AQI 450 से ऊपर, अति गंभीर। दिल्ली में ट्रकों की एंट्री बंद, दफ्तरों में 50% वर्क फ्रॉम होम, स्कूल बंद।

इस बार 21 अक्टूबर को स्टेज-1 लगा था, 2 नवंबर को स्टेज-2 लग गया है।

प्रदूषण रोकने के लिए कितनी फौज है

कागज पर देखें तो पूरी फौज खड़ी है –

1. CAQM – सबसे बड़ा बॉस। कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट। 2021 में कानून बनाकर इसे बनाया गया। GRAP लगाना या हटाना यही तय करता है। दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान को ऑर्डर दे सकता है।

2. CPCB – सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड। पूरे देश का AQI नापता है, आंकड़े देता है, गाइडलाइन बनाता है।

3. SPCB / DPCC – हर राज्य का अपना प्रदूषण बोर्ड। जैसे दिल्ली का DPCC, यूपी का UPPCB। जमीन पर चालान, फैक्ट्री बंद करना इन्हीं का काम है।

4. NGT – नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल। जहां बोर्ड नहीं सुनते, वहां NGT जुर्माना ठोकता है।

5. IMD और IITM – मौसम विभाग और पुणे का ट्रॉपिकल मौसम संस्थान। ये बताते हैं अगले 3 दिन हवा कैसी रहेगी, उसी पर GRAP लगता है।

इसके अलावा पर्यावरण मंत्रालय, NCAP यानी नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम भी है, जिसका टारगेट था 131 शहरों की हवा साफ करना।

दिल्ली से बाहर हवा की फिक्र भी जरूरी

प्रदूषण से हर शहर परेशान है लेकिन चिंता सिर्फ दिल्ली की ही क्यों होती है? यही सबसे बड़ा सवाल है। GRAP का कानून ही सिर्फ NCR के लिए बना है। CAQM का अधिकार भी सिर्फ दिल्ली और उसके आसपास के जिलों तक है – गाजियाबाद, नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत तक।

जबकि CPCB के ही आंकड़े बताते हैं कि 3 नवंबर को देश का सबसे गंदा शहर दिल्ली नहीं था। गजरौला (UP) का AQI 399 था, कैथल 330, हापुड़ 306, बड़ौत 310। ये सब दिल्ली से ज्यादा या उसके बराबर थे, पर वहां न GRAP है, न कोई रोक।

छोटे शहरों की तीन दिक्कतें हैं

पहली, वहां AQI नापने की मशीन ही नहीं है। दिल्ली में 40 से ज्यादा स्टेशन हैं, कई जिलों में एक भी नहीं। जब नापेंगे ही नहीं, तो खबर कैसे बनेगी?

दूसरी, NCAP में शहरों को पैसा तो दिया, पर कोई सख्ती नहीं। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की नजर रहती है, छोटे शहर में कोई पूछने वाला नहीं।

तीसरी, मीडिया और सरकार की नजर भी दिल्ली पर है, क्योंकि मंत्री, कोर्ट, अफसर सब वहीं रहते हैं। धुंध उन्हें दिखती है, तो हंगामा होता है। गजरौला, कैथल, हापुड़ की धुंध किसी को नहीं दिखती।

हकीकत ये है कि दिल्ली की हवा में जहर सिर्फ दिल्ली का नहीं है। पराली, फैक्ट्री, गाड़ियों का धुआं पूरे उत्तर भारत का है। जब तक GRAP जैसा सिस्टम पूरे देश के 131 जहरीले शहरों में नहीं लगेगा, तब तक हर साल हम सिर्फ दिल्ली का AQI देखकर छाती पीटते रहेंगे, और छोटे शहर चुपचाप जहर पीते रहेंगे।

About the Author: Rajeev Mandal
वरिष्ठ पत्रकार राजीव मंडल पिछले 25 वर्षों से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हैं। दैनिक जागरण (लखनऊ) से बतौर कॅरियर की शुरुआत हुई। गलगोटिया टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान से जुड़ने से पहले राजीव ने टीवी इंडस्ट्री-ईटीवी और नेपाल वन न्यूज चैनल- में भी काम किया। इसके अलावा राष्ट्रीय सहारा अखबार के साथ 19 वर्षों तक इनका साथ रहा। इस अखबार के संपादकीय पृष्ठ और साप्ताहिक परिशिष्ट 'हस्तक्षेप" अंक का बतौर प्रभारी लंबे समय तक नेतृत्व किया। राजीव ने पत्रकारिता से मास्टर डिग्री (2000-2001) काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी से हासिल किया। फिलहाल राजीव गलगोटिया टाइम्स के लिए राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसामयिक विषयों पर कलम चलाते हैं।
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