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Balarama Jayanti 2025: जानें कब है और कैसे मनाई जाती है.
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, August 28, 2025
Last Updated On: Friday, August 29, 2025
Balarama Jayanti 2025 : बलराम जयंती बलदेव छठ और बलभद्र जयंती के नाम से भी जाना जाता है. बलरामजी का जन्म भाद्रपद माह की शुक्ल षष्ठी को हुआ था. इस वर्ष यह तिथि शुक्रवार, 29 अगस्त, 2025 है.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Friday, August 29, 2025
Balarama Jayanti 2025: श्रीकृष्ण के भाई बलरामजी को भगवान विष्णु के 8वें अवतार के रूप में पूजा जाता है. भगवान बलराम जन्मोत्सव बलराम जयंती के रूप में मनाया जाता है. बलराम जयंती को बलदेव छठ के नाम से भी जाना जाता है. गुजरात में बलराम जयंती को बलभद्र जयंती के नाम से जाना जाता है. बलरामजी का जन्म भाद्रपद माह की शुक्ल षष्ठी को हुआ था. क्या कहते हैं धर्मग्रंथ श्री गर्ग संहिता के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को स्वाति नक्षत्र में बुधवार के दिन वसुदेव की पत्नी रोहिणी के गर्भ से अनंत देव बलराम जी का जन्म हुआ. बालक का जन्म दोपहर के समय हुआ था. जन्म के समय देवता पुष्प वर्षा कर रहे थे और बादल वर्षा की बूंदें बिखेर रहे थे.
कब है बलराम जयंती (Balrama Jayanti 2025 Date & Time)
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| बलराम जयंती | शुक्रवार, अगस्त 29 2025 |
| बलराम जयंती मुहूर्त | सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:39 बजे तक |
| षष्ठी तिथि आरंभ | 28 अगस्त 2025 को शाम 05:56 बजे से |
| षष्ठी तिथि समाप्त | 29 अगस्त 2025 को रात्रि 08:21 बजे |
आदिशेष के अवतार बलराम (Shree Vishnu Avtar Balram)
बलराम भगवान कृष्ण के बड़े भाई थे. ब्रजवासी भगवान बलराम की ब्रज के राजा के रूप में पूजा करते हैं. भगवान बलराम को दाऊजी भी कहा जाता है. उन की स्तुति में ब्रजवासी नारा लगाते हैं और कहते हैं, “बलराम, ब्रज के दयालु राजा, यदि आपको भांग पीनी ही है, तो कम से कम यहां तो आइए.
“भगवान बलराम को आदिशेष के अवतार के रूप में भी पूजा जाता है. भगवान विष्णु जिस दिव्य सर्प पर विश्राम करते हैं, उसे आदिशेष के नाम से जाना जाता है. भगवान बलराम को बलदेव, बलभद्र और हलायुध के रूप में भी माना जाता है. बलराम युद्ध-कुश्ती और गदा युद्ध जैसी पारंपरिक युद्ध कलाओं में निपुण थे.
मथुरा के मंदिरों में बलदेव छठ (Baldeo Chhath)
मथुरा जिले के बलदेव नगर स्थित श्री दाऊजी महाराज मंदिर में श्री बलराम का जन्मोत्सव हर साल भाद्रपद शुक्ल षष्ठी को पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है. ब्रज के मंदिर और स्थानीय समुदाय इस दिन बलदेव छठ मनाते हैं. इसे बलराम जन्मोत्सव के नाम से भी जाना जाता है. बलदेव छठ को मोर छठ के नाम से भी जाना जाता है. श्री दाऊजी महाराज मंदिर बलराम जयंती के शुभ दिन को मनाने के लिए विशेष प्रार्थना और पूजा अनुष्ठान आयोजित करता है. बलराम का विशेष अभिषेक किया जाता है. उन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए सुंदर परिधानों, बहुमूल्य रत्नों, हीरों और स्वर्ण आभूषणों से सुसज्जित किया जाता है.
मनाया जाता है दधिकांदो उत्सव
बलराम जयंती के अवसर पर मंदिर परिसर में दधिकांदो उत्सव भी मनाया जाता है. इस उत्सव में भक्तों पर दही, मक्खन, हल्दी और केसर का मिश्रण छिड़का जाता है. खुशी के प्रतीक के रूप में फल, खिलौने, कपड़े और पैसे जैसी विभिन्न वस्तुयें बांटी जाती हैं. इस अवसर पर एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है. यह स्थानीय लोगों के बीच देवछठ मेले के रूप में भी लोकप्रिय है. यह मेला हर साल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाता है. मेले की शुरुआत ध्वजारोहण समारोह के साथ होती है. कई दिनों तक चलने वाले मेले के दौरान रागिनी गायन और पारंपरिक कुश्ती प्रतियोगिताओं जैसे विभिन्न सांस्कृतिक लोक और खेल आयोजन आयोजित किए जाते हैं. अंतिम दिन काली अखाड़े या काली लीला के आयोजन और एक भव्य जुलूस के साथ मेले का समापन होता है. इसमें विभिन्न देवताओं की जीवन कथाओं को दर्शाती सुंदर झांकियां प्रदर्शित की जाती हैं.
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