Happy Makar Sankranti 2026: कब है मकर संक्रांति, क्यों मनाई जाती है और क्या है इसका धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व

Authored By: Nishant Singh

Published On: Monday, January 12, 2026

Last Updated On: Monday, January 12, 2026

Makar Sankranti 2026 की तिथि, महत्व और परंपराएं - जानें क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति और इसका धार्मिक व सांस्कृतिक अर्थ.
Makar Sankranti 2026 की तिथि, महत्व और परंपराएं - जानें क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति और इसका धार्मिक व सांस्कृतिक अर्थ.

Makar Sankranti 2026 भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है. यह केवल एक पर्व नहीं है. यह सूर्य की चाल बदलने का संकेत है. यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है. मकर संक्रांति भारत के उन त्योहारों में से है, जो प्रकृति, खगोल विज्ञान और आस्था को एक साथ जोड़ता है. ऐसे में जानिए मकर संक्रांति 2026 की सही तारीख, धार्मिक मान्यताएं, महत्व और देशभर में इसे मनाने के अलग-अलग तरीके.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Monday, January 12, 2026

Makar Sankranti 2026 आते ही सर्दियों की ठिठुरन के बीच धूप की गर्माहट महसूस होने लगती है. यह पर्व केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा नहीं है, बल्कि प्रकृति के बदलाव और नई शुरुआत का संकेत भी देता है. मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और इसी के साथ उत्तरायण काल की शुरुआत होती है. यही कारण है कि इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व माना गया है. किसानों के लिए यह पर्व नई फसल की खुशी लेकर आता है, वहीं आम लोगों के लिए यह सकारात्मक सोच और रिश्तों में मिठास घोलने का अवसर बनता है. मकर संक्रांति 2026 की तारीख, महत्व और इससे जुड़ी परंपराएं हर साल लोगों के बीच खास चर्चा का विषय रहती हैं.

कब है मकर संक्रांति 2026?

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में सूर्य 14 जनवरी, बुधवार को धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे. यह संक्रांति दोपहर के समय होगी. इसी कारण पूरे देश में 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा. खास बात यह है कि मकर संक्रांति उन गिने-चुने हिंदू त्योहारों में से है, जिनकी तारीख हर साल लगभग एक जैसी रहती है. इसकी वजह यह है कि यह पर्व चंद्रमा नहीं, बल्कि सूर्य की गति पर आधारित है.

क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति?

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति का सीधा संबंध सूर्य से है. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है. इसे शुभ माना जाता है. मान्यता है कि उत्तरायण काल में किए गए दान, स्नान और पूजा का विशेष फल मिलता है. यही कारण है कि इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. दान-पुण्य करते हैं. तिल और गुड़ का सेवन करते हैं. यह पर्व सर्दी के अंत और नई शुरुआत का प्रतीक भी है. किसानों के लिए यह नई फसल की खुशी का समय होता है. मेहनत का फल घर आता है और उसी खुशी में पर्व मनाया जाता है.

मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. उन्हें जल अर्पित किया जाता है. मान्यता है कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है. इसी दिन से देवताओं का दिन शुरू होता है. महाभारत काल में भी इस दिन का महत्व बताया गया है. कहा जाता है कि भीष्म पितामह ने उत्तरायण के समय ही देह त्याग किया था. इसलिए इस दिन को मोक्षदायी भी माना जाता है.

मकर संक्रांति पर क्या-क्या किया जाता है?

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने की परंपरा है. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. तिल, गुड़, खिचड़ी, दही और मिठाइयों का दान किया जाता है. कई जगहों पर इस दिन खिचड़ी खाने और खिलाने की परंपरा है. माना जाता है कि तिल और गुड़ रिश्तों में मिठास लाते हैं और आपसी मनमुटाव को दूर करते हैं. यही कारण है कि लोग एक-दूसरे को तिलगुल भेंट करते हैं.

देश के अलग-अलग हिस्सों में मकर संक्रांति

मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाई जाती है. पंजाब में इसे लोहड़ी के अगले दिन मनाया जाता है. गुजरात और महाराष्ट्र में पतंग उड़ाने की परंपरा है. असम में इसे बिहू कहा जाता है. तमिलनाडु में यह पर्व पोंगल के रूप में मनाया जाता है. कहीं खेतों में उत्सव होता है, तो कहीं छतों पर पतंगों से आसमान रंगीन हो जाता है. रूप अलग-अलग हैं, लेकिन भावना एक ही है नई शुरुआत और खुशहाली.

किसानों के लिए क्यों है खास मकर संक्रांति?

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति किसानों के जीवन से गहराई से जुड़ी है. इस समय रबी फसल की कटाई शुरू हो जाती है. खेतों में हरियाली होती है. मेहनत रंग लाती है. किसान इस पर्व को प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने के रूप में मनाते हैं. यह त्योहार बताता है कि हमारी संस्कृति प्रकृति के साथ तालमेल में जीना सिखाती है.

मकर संक्रांति का सामाजिक संदेश

Makar Sankranti 2026

मकर संक्रांति हमें बांटना सिखाती है. दान का महत्व बताती है. यह पर्व याद दिलाता है कि जब सूर्य अपनी दिशा बदल सकता है, तो हम भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं. रिश्तों में मिठास घोल सकते हैं. पुराने गिले-शिकवे भूलकर आगे बढ़ सकते हैं. यही मकर संक्रांति का असली संदेश है.

इस तरह मकर संक्रांति 2026 केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आशा, ऊर्जा और नई शुरुआत का पर्व है. यह त्योहार हर साल हमें फिर से जोड़ता है प्रकृति से, परंपरा से और एक-दूसरे से.

FAQ

मकर संक्रांति 2026 बुधवार, 14 जनवरी को मनाई जाएगी. इसी दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे.

मकर संक्रांति सूर्य की चाल पर आधारित पर्व है. इसलिए यह चंद्र कैलेंडर पर नहीं, बल्कि सौर कैलेंडर के अनुसार मनाई जाती है, इसी कारण इसकी तारीख लगभग हर साल 14 या 15 जनवरी के आसपास रहती है.

तिल और गुड़ को सेहत के लिए लाभकारी माना जाता है. साथ ही मान्यता है कि तिल-गुड़ खाने से रिश्तों में मिठास आती है और आपसी मतभेद दूर होते हैं.

इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है. उत्तरायण काल की शुरुआत होने के कारण स्नान, दान और जप का विशेष फल माना जाता है. धार्मिक दृष्टि से यह दिन अत्यंत शुभ माना गया है.

भारत के अलग-अलग राज्यों में मकर संक्रांति अलग नामों से मनाई जाती है. कहीं पतंग उड़ाई जाती है, कहीं पोंगल और बिहू जैसे पर्व मनाए जाते हैं. रूप अलग होते हैं, लेकिन पर्व का उद्देश्य एक ही होता है – नई शुरुआत और खुशहाली.

About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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