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जीवन के संतुलन में छिपे हैं सहजता के सूत्र : श्री श्री रविशंकर
Authored By: स्मिता
Published On: Monday, July 28, 2025
Last Updated On: Monday, July 28, 2025
आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुसार, जीवन को सहज बनाने के लिए सबसे पहले संतुलित रूप से जीना जरूरी है. सकारात्मक विचारों को महत्व देने और ध्यान के साथ जुड़ने पर आंतरिक शांति विकसित हो सकती है. ध्यान दें कि आध्यात्मिक विकास के लिए सांसारिक जिम्मेदारियों से विमुख होना कहीं से भी सही नहीं है.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Monday, July 28, 2025
जीवन को संतुलित (Life Balance) रखना जरूरी है. संतुलित रहने के लिए जीवन में सहजता जरूरी है. आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर बताते हैं कि सहज जीवन से ही जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है. सबसे पहले आंतरिक शांति सबसे अधिक जरूरी है. तनाव प्रबंधन और सकारात्मक मानसिकता को बढ़ावा देकर जीवन को आसान बनाया जा सकता है.
अपनाएं करुणा क्षमा और दया जैसे सदगुण
आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के अनुसार, जीवन के प्रति एक संतुलित दृष्टिकोण होना चाहिए. सांसारिक ज़िम्मेदारियों के साथ आध्यात्मिक अभ्यासों को जोड़ना चाहिए. करुणा, क्षमा और दया जैसे सदगुणों को अपनाने से व्यक्तिगत परिवर्तन हो पाता है और जीवन अधिक संतुष्टिदायक हो पाता है. साथ ही तनाव प्रबंधन से आंतरिक शांति आ पाती है.
सुदर्शन क्रिया और ध्यान
- श्री श्री रविशंकर के अनुसार, सुदर्शन क्रिया एक श्वास तकनीक है. इसके अंतर्गत सांस लेने और सांस छोड़ने पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है. यदि यह क्रिया नियमित रूप से 15 से 20 मिनट भी की जाए, तो शरीर, मन और भावनाओं में सामंजस्य स्थापित करने में मदद मिलती है. इससे तनाव, थकान और नकारात्मक भावनायें कम होती हैं.
- साथ ही जीवन में ध्यान भी बहुत जरूरी है, मन को शांत करने, वर्तमान में जीने और ध्यान के माध्यम से गहराई से विश्राम करने के महत्व पर जोर देना चाहिए. इससे विश्राम और शांति का वातावरण बनता है.
सचेतनता
अपने विचारों और भावनाओं को दबाने या उनसे भागने की बजाय उनके प्रति जागरूक रहना जीवन की चुनौतियों से निपटने की कुंजी है. कोई भी कार्य सचेतन होकर करें. अतीत के दुखों और गलतियों का बोझ उतार कर लोगों को क्षमा करने का भाव विकसित करें. आंतरिक शांति के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है.
सकारात्मक सोच विकसित करें
अतीत के बारे में सोचने या भविष्य की चिंता करने की बजाय वर्तमान क्षण में जीने से चिंता कम हो सकती है और खुशी बढ़ सकती है. रोजमर्रा की गतिविधियों में आनंद खोजने और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए. जीवन में अच्छी चीजों को स्वीकार करने और उनकी सराहना करने से व्यक्ति का ध्यान बदल सकता है. इससे अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित हो सकता है.
अपेक्षाओं को छोड़ दें
जीवन को सहज रूप से जीने में अपेक्षा सबसे बड़ी बाधा बनती है. अपेक्षाओं को त्यागने से निराशा कम हो सकती है. जो है उसे बेहतर ढंग से स्वीकार करने में मदद मिल सकती है. ध्यान दें कि अध्यात्म की ओर उन्मुख होने पर अपनी सांसारिक जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ें. इसे पूरा करने के साथ ही खुद का आध्यात्मिक विकास हो सकता है और जीवन सहज हो सकता है.
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