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March 2026 Kalashtami Vrat: जानें कालाष्टमी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और विधि-विधान से पूजा करने का महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, March 3, 2026
Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026
March 2026 Kalashtami Vrat: कालाष्टमी का व्रत भगवान काल भैरव को समर्पित माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से जीवन के संकट और बाधाएं दूर होती हैं. मार्च 2026 में कालाष्टमी कब पड़ेगी, इसका शुभ मुहूर्त क्या है और विधि-विधान से पूजा कैसे करें- जानें यहां पूरी जानकारी सरल शब्दों में.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, March 3, 2026
March 2026 Kalashtami Vrat: सनातन धर्म में हर महीने आने वाली कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है. यह तिथि भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होती है, जिन्हें समय और न्याय का देवता माना जाता है. इस दिन कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा से काल भैरव की पूजा-अर्चना करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत और पूजा करते हैं, उनके जीवन से भय, बाधा और संकट दूर हो जाते हैं. यह दिन विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण होता है जो जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति पाना चाहते हैं. काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है और उनकी कृपा से साधक को साहस, सुरक्षा और सफलता प्राप्त होती है.
मार्च 2026 कालाष्टमी व्रत की तिथि
मार्च 2026 में कालाष्टमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को पड़ेगी. पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 मार्च को देर रात 01 बजकर 54 मिनट पर होगी और समापन 12 मार्च को सुबह 04 बजकर 19 मिनट पर होगा. चूंकि कालाष्टमी की पूजा निशा काल में की जाती है, इसलिए 11 मार्च 2026 को ही व्रत रखा जाएगा. इस दिन रात्रि में पूजा करना अधिक शुभ माना गया है.
तिथि और समय:
- अष्टमी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च, रात 01:54 बजे
- अष्टमी तिथि समाप्त: 12 मार्च, सुबह 04:19 बजे
- व्रत और पूजा: 11 मार्च 2026 (निशा काल में)
शुभ मुहूर्त और पूजा का समय
कालाष्टमी पर निशा काल का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि इस समय भगवान काल भैरव शीघ्र प्रसन्न होते हैं. 11 मार्च की रात अष्टमी तिथि प्रभावी रहेगी, इसलिए इसी रात दीप जलाकर, मंत्र जाप और आरती करना श्रेष्ठ रहेगा. उपवास रखकर श्रद्धा से पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है.
शुभ मुहूर्त की विशेषताएं:
- निशा काल में पूजा सर्वोत्तम.
- दीपक और धूप से आराधना करें.
- मंत्र जाप से मानसिक शांति मिलती है.
- नियम और श्रद्धा का पालन जरूरी.
कालाष्टमी पूजा विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान की सफाई करें. दीपक जलाकर भगवान का स्मरण करें. यदि संभव हो तो मंदिर में जाकर पूजा करें. भगवान को धूप, दीप, फूल, फल और काले तिल अर्पित करें. “ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें. व्रत का पालन करते हुए दिनभर संयम रखें.
पूजा विधि के चरण:
- सुबह स्नान कर साफ कपड़े पहनें.
- दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें.
- धूप, दीप, फूल और फल अर्पित करें.
- “ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें.
- काले कुत्ते को भोजन अवश्य कराएं.
- घर में मूर्ति न रखें, मंदिर में पूजा करें.
कालाष्टमी व्रत का महत्व और लाभ
धार्मिक मान्यता है कि कालाष्टमी का व्रत करने से शत्रु भय, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव से राहत मिलती है. यह व्रत आत्मविश्वास बढ़ाता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है. नियमित रूप से व्रत रखने से व्यक्ति के जीवन में स्थिरता और सुख-समृद्धि बनी रहती है.
व्रत के लाभ:
- संकट और बाधाओं से मुक्ति.
- मानसिक शांति और साहस की प्राप्ति.
- नकारात्मक ऊर्जा का नाश.
- परिवार में सुख-समृद्धि का वास.
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