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May 2026 Vrat Tyohar List: बुद्ध पूर्णिमा, शनि जयंती, वट सावित्री और गंगा दशहरा सहित मई के प्रमुख पर्वों की पूरी लिस्ट और जानकारी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, April 28, 2026
Last Updated On: Tuesday, April 28, 2026
May 2026 Vrat & Festival List: मई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें बुद्ध पूर्णिमा, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत और गंगा दशहरा जैसे प्रमुख पर्व आते हैं. यह समय व्रत, पूजा, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माना जाता है. ग्रह गोचर भी इस माह विशेष प्रभाव डालते हैं. जानें मई 2026 के व्रत-त्योहार की लिस्ट.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, April 28, 2026
May 2026 Vrat & Festival List: मई का महीना केवल मौसम या कैलेंडर का एक सामान्य हिस्सा नहीं होता, बल्कि हिंदू धर्म में इसे आस्था, साधना और पुण्य का विशेष समय माना जाता है. इस महीने में कई ऐसे व्रत और त्योहार आते हैं जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का संदेश देते हैं. कहीं बुद्ध पूर्णिमा का ज्ञान और करुणा का प्रकाश फैलता है, तो कहीं शनि जयंती कर्म और न्याय की सीख देती है. वहीं वट सावित्री व्रत सुहागिनों की श्रद्धा का प्रतीक बनकर आता है और गंगा दशहरा पवित्रता का संदेश देता है. इसी कारण मई का पूरा महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
मई महीने का धार्मिक महत्व: आस्था और पुण्य का समय
हिंदू पंचांग के अनुसार मई का समय वैशाख और ज्येष्ठ मास के संयोग में आता है, जो व्रत-उपवास और दान-पुण्य के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. इस अवधि में कई प्रमुख पर्व आते हैं, जिनका संबंध देवी-देवताओं की पूजा, तपस्या और आध्यात्मिक साधना से होता है.
इस महीने की खास बात यह भी है कि इसमें ग्रहों की स्थिति में बदलाव भी देखने को मिलता है, जिसका प्रभाव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, करियर और संबंधों पर पड़ता है. लेकिन मुख्य रूप से यह समय धार्मिक कार्यों और शुभ कर्मों के लिए उत्तम माना जाता है.
मई 2026 के प्रमुख व्रत-त्योहारों की पूरी सूची
नीचे मई 2026 में आने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची दी गई है-
| तिथि | व्रत / त्योहार |
|---|---|
| 1 मई | बुद्ध पूर्णिमा, कूर्म जयंती, वैशाख पूर्णिमा |
| 2 मई | नारद जयंती |
| 5 मई | एकदन्त संकष्टी, पहला बड़ा मंगल |
| 12 मई | हनुमान जयंती, दूसरा बड़ा मंगल |
| 13 मई | अपरा एकादशी |
| 14 मई | गुरु प्रदोष व्रत |
| 15 मई | वृषभ संक्रांति, मासिक शिवरात्रि |
| 16 मई | शनि जयंती, वट सावित्री व्रत |
| 17 मई | ज्येष्ठ अधिक मास प्रारंभ |
| 25 मई | गंगा दशहरा |
| 26 मई | पद्मिनी एकादशी, चौथा बड़ा मंगल |
| 28 मई | गुरु प्रदोष व्रत |
| 31 मई | ज्येष्ठ पूर्णिमा |
यह सूची बताती है कि पूरा महीना धार्मिक गतिविधियों और व्रत-उपवास से भरा हुआ है.
बुद्ध पूर्णिमा: ज्ञान और करुणा का प्रकाश
1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी, जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है. यह दिन महात्मा बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से जुड़ा हुआ है.
इस दिन भगवान बुद्ध की शिक्षाओं अहिंसा, करुणा और शांति को याद किया जाता है. साथ ही हिंदू धर्म में इसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए भी शुभ माना जाता है. लोग इस दिन दान-पुण्य और ध्यान करते हैं ताकि जीवन में मानसिक शांति और सकारात्मकता बनी रहे.
नारद जयंती: ज्ञान और संवाद के प्रतीक का दिन
2 मई को नारद जयंती मनाई जाती है. नारद मुनि को देवताओं के संदेशवाहक और पहले पत्रकार के रूप में भी जाना जाता है. वे हमेशा सत्य और ज्ञान का प्रसार करते थे.
इस दिन भक्त नारद मुनि की पूजा करके जीवन में सही मार्गदर्शन और बुद्धिमानी की कामना करते हैं. माना जाता है कि उनकी कृपा से व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति मिलती है.
अपरा एकादशी: भगवान विष्णु की कृपा पाने का दिन
13 मई को अपरा एकादशी का व्रत रखा जाएगा. हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व होता है, और यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है.
इस दिन उपवास और पूजा करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं.
शनि जयंती और वट सावित्री व्रत: कर्म और श्रद्धा का संगम
16 मई 2026 का दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन दो प्रमुख पर्व एक साथ पड़ रहे हैं शनि जयंती और वट सावित्री व्रत.
शनि जयंती को शनिदेव के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है. इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन में न्याय, अनुशासन और स्थिरता आती है. वहीं वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है. महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करके अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.
गंगा दशहरा: पवित्रता और मोक्ष का पर्व
25 मई को गंगा दशहरा मनाया जाएगा. मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं. यह पर्व पवित्रता और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है.
इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व होता है. कहा जाता है कि गंगा में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है.
पद्मिनी एकादशी: विष्णु कृपा पाने का विशेष अवसर
26 मई को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा, जिसे कमला एकादशी भी कहा जाता है. यह अधिक मास में आने वाली एकादशी होती है और इसे अत्यंत शुभ माना गया है.
इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत जीवन में आध्यात्मिक शक्ति भी बढ़ाता है.
ज्येष्ठ अधिक मास: पुण्य कमाने का विशेष समय
मई के मध्य से ज्येष्ठ अधिक मास की शुरुआत होती है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. इस महीने में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह आदि नहीं किए जाते, लेकिन पूजा, दान और भक्ति का विशेष महत्व होता है.
इस पूरे समय को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर माना जाता है.
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