Radha Ashtami 2025: जानें कब है राधा जयंती और इसकी व्रत विधि

Authored By: स्मिता

Published On: Thursday, August 28, 2025

Last Updated On: Thursday, August 28, 2025

Radha Ashtami 2025 राधा जयंती पूजा और व्रत विधि की छवि.
Radha Ashtami 2025 राधा जयंती पूजा और व्रत विधि की छवि.

Radha Ashtami 2025: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाजी की जयंती मानी जाती है. इस वर्ष यह तिथि 31 अगस्त को है. जानते हैं कि इस अवसर पर राधा रानी के भक्तगण द्वारा अपनाई जाने वाली व्रत विधि.

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Radha Ashtami 2025: भगवान श्रीकृष्ण प्रिया देवी राधा के जन्मोत्सव के रूप में राधा अष्टमी मनाई जाती है. राधा जी की जयंती भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मानी जाती है. राधा अष्टमी के दिन भक्त व्रत रखते हैं. देवी राधा की पूजा मध्याह्न काल के दौरान की जाती है, जो दिन के हिंदू विभाजन के अनुसार दोपहर का समय है. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त या सितंबर माह में राधा अष्टमी आती है.
कब है राधा अष्टमी.

Radha Ashtami 2025 Date & Time

विवरण जानकारी
राधा अष्टमी 31 अगस्त 2025, रविवार
मध्याह्न समय सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक
अष्टमी तिथि प्रारंभ 30 अगस्त 2025 को रात्रि 10:46 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त 01 सितंबर, 2025 को 12:57 पूर्वाह्न
कहां मनाई जाती है राधा अष्टमी

यह पर्व देश भर में मनाया जाता है. श्री राधा अष्टमी का पर्व ब्रज क्षेत्र, विशेषकर बरसाना में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस अवसर पर बरसाना स्थित श्री लाडली जी महाराज मंदिर में एक भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है. इसमें श्रीराधा जी का अभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. राधा अष्टमी को राधाष्टमी (Radha Ashtami) और राधा जयंती (Radha Jayanti 2025) के नाम से भी जाना जाता है।

राधा अष्टमी व्रत विधि (Radha Ashtami Vrat Vidhi)

बृहन्नारदीय पुराण के अनुसार, राधा अष्टमी व्रत का पालन विधिपूर्वक करने पर विशेष आध्यात्मिक फल प्राप्त होता है.

  • सबसे पहले स्नानादि नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ और शुद्ध वस्त्र धारण करें.
  • किसी पवित्र स्थान या मंडप में एक पवित्र मंडल बनायें और उसके मध्य में मिट्टी या तांबे का कलश स्थापित करें.
  • कलश के ऊपर तांबे की थाली रखें. उस पर देवी राधारानी की स्वर्ण प्रतिमा स्थापित करें.
  • प्रतिमा को दो नए वस्त्र पहनायें.
  • मध्याह्न काल में राधारानी की पूर्ण षोडशोपचार विधि और भक्तिपूर्वक पूजा करें.
  • अपनी क्षमतानुसार पूरे दिन का उपवास रखें. यदि ऐसा करना संभव न हो, तो एकभुक्त व्रत, अर्थात् एक समय का उपवास रखें.
  • अगले दिन विवाहित स्त्रियों को प्रेमपूर्वक भोजन कराएं.
  • पूजित मूर्ति को किसी आचार्य को दान स्वरूप अर्पित करें. परिवार सहित भोजन करके व्रत का समापन करें.

कौन हैं श्रीराधा रानी (Radha Rani)

कई परंपराओं में राधा रानी को लक्ष्मी का अवतार माना जाता है. गौडीय वैष्णव परंपरा में राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की आंतरिक शक्ति और आदि शक्ति के रूप में पूजा जाता है. कुछ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, उन्हें स्वयं कृष्ण का स्त्री रूप भी कहा जाता है. राधा रानी को परम आनंद  यानी परमात्मा को पाने  का आधार माना जाता है.

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स्मिता धर्म-अध्यात्म, संस्कृति-साहित्य, और स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर शोधपरक और प्रभावशाली पत्रकारिता में एक विशिष्ट नाम हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव समसामयिक और जटिल विषयों को सरल और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने में उनकी दक्षता को उजागर करता है। धर्म और आध्यात्मिकता के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और साहित्य के विविध पहलुओं को समझने और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने में उन्होंने विशेषज्ञता हासिल की है। स्वास्थ्य, जीवनशैली, और समाज से जुड़े मुद्दों पर उनके लेख सटीक और उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं। उनकी लेखनी गहराई से शोध पर आधारित होती है और पाठकों से सहजता से जुड़ने का अनोखा कौशल रखती है।
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