Lifestyle News
इच्छाओं में उलझे बिना जोश में कैसे जीएं, बता रहे हैं सद्गुरु जग्गी वासुदेव
Authored By: स्मिता
Published On: Thursday, August 21, 2025
Last Updated On: Thursday, August 21, 2025
आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार, इच्छा कभी आत्म ज्ञान की ओर नहीं ले जा सकती है, बिना इच्छा के कोई गति नहीं हो सकती है. इसका अर्थ है कि हमें बिना कोई इच्छा पैदा किये जीवन में निरंतरता बनाए रखनी होगी.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Thursday, August 21, 2025
Sadhguru Jaggi Vasudev Life Lessons: सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने बताया, ‘कुछ समय पहले मैं एक आदमी से बातचीत कर रहा था. वह आदमी ब्रह्मचारी बनना चाहता था. मैंने उससे पूछा कि वह ब्रह्मचारी क्यों बनना चाहता है? उसने कहा – मुझे आत्म-ज्ञान चाहिए’. मैंने कहा – ‘दिक्कत क्या है? इसे पाने के कई दूसरे तरीके भी हैं. ’ उसने कहा – ‘नहीं, मैं जल्दी पाना चाहता हूं. मुझे ज्ञान जल्दी चाहिए’. सद्गुरु ने कहा कि यह तो अच्छी बात है कि किसी की इतनी बड़ी, लेकिन सरल इच्छा है कि वह आत्म-ज्ञानी होना चाहता है.
एक तरह से देखा जाए तो यह पूरी दुनिया को जीत लेने जैसा है. दूसरी तरह से देखें तो बस आप अपनी जगह पर बैठे रहते हैं. आपको कहीं नहीं जाना है, बस थोड़ा-सा अपने भीतर की ओर मुड़ना है। कोई भी इंसान अभी जैसा है, उससे अलग कुछ और बनने की चाहत में वह इस जीवन के सरल तौर-तरीके समझ नहीं पाता है. यह जीवन, यह मन, यह सृष्टि, इन सभी के बीच का रिश्ता, यह सब कैसे घटित हो रहा है, इन सभी चीजों से वह पूरी तरह से चूक जाता है.
इच्छा के बिना नहीं बढ़ सकते आगे
- सद्गुरु के अनुसार, आपको समझना होगा कि यह आपकी इच्छा ही है जिसने भूत, वर्तमान और भविष्य जैसी चीजों को बनाया है. चूंकि इच्छा है, इसीलिए भविष्य जैसी चीज है. एक बार जब आप अपने मन में एक भविष्य गढ़ते हैं, तो अतीत एक बहुत बड़ा हिस्सा घेर लेता है.
- दरअसल भविष्य के साथ संतुलन बनाने के लिए अतीत अपना महत्व भी बहुत अधिक बढ़ा लेता है, नहीं तो आप गिर पड़ेंगे. इस तरह जब भूत और भविष्य की अहमियत बढ़ जाती है, तो लोग इन दोनों के बीच सी-सॉ की तरह झूलने लगते हैं. वे कभी हकीकत में नहीं जीते हैं.
- अब अगर आपके भीतर इच्छा नहीं है, तो आपको पता ही नहीं चलेगा कि आगे कैसे बढ़ना है. इच्छा के अभाव में आज आप यहां नहीं होते. साथ ही जिस पल आपने इच्छा पैदा की, आपने एक भविष्य की भी रचना कर ली. हर तरह की योजनाएं आपके भीतर चलने लगीं. मन की सीमाओं के चलते कोई भी भविष्य में प्रवेश नहीं कर सकता, लेकिन आप योजनाएं तो बना ही सकते हैं. यह प्रोजेक्टेड मिरर जैसा होगा मतलब शीशे के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग दिशाओं को दिखा रहे हैं.
- आप सोच सकते हैं कि ये दर्पण कितना खराब होगा. हम जो भी साधना करते हैं, वह मन को ठीक करने के लिए नहीं है. उसका मकसद किसी कबाड़ में से कोई काम की चीज निकालना नहीं है। लोग तीन दिन राम-राम जपते हैं, और दावा करने लगते हैं कि उनका मन पवित्र हो गया है। सच्चाई तो यह है कि मन बस एक कूड़ादान है. उसके पवित्र होने का सवाल ही नहीं है. इच्छा और मन दोनों पर नियन्त्रण करने पर ही हमारा जीवन सही दिशा में जा सकता है. हम जोश में जी सकते हैं और अपने लक्ष्य पा सकते हैं.
यह भी पढ़ें :- Shardiya Navratri 2025: 22 या 23 सितंबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्र पूजा

















