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मुक्ति का मार्ग बताते हैं शिवजी : सद्गुरु जग्गी वासुदेव
Authored By: स्मिता
Published On: Friday, July 11, 2025
Last Updated On: Friday, July 11, 2025
भोलेबाबा महादेव का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है. साथ ही, दूर-दूर से लोग कांवड़ यात्रा कर शिवजी का जलाभिषेक करने शिव मंदिर पहुंच रहे हैं. आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव शिवजी को मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले के रूप में बताते हैं.
Authored By: स्मिता
Last Updated On: Friday, July 11, 2025
Path of Liberation: भोलेबाबा महादेव का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है. साथ ही, दूर-दूर से लोग कांवड़ यात्रा कर शिवजी का जलाभिषेक करने शिव मंदिर पहुंच रहे हैं. आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव शिवजी को मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाले के रूप में बताते हैं.
शिवजी का प्रिय महीना सावन शुरू हो चुका है. जगह-जगह से कांवड़ के साथ यात्रा करने वाले तीर्थयात्री शिवजी का जलाभिषेक करने चल पड़े हैं. आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव शिवजी को सिर्फ पारंपरिक अर्थों में किसी देवता के रूप में नहीं, बल्कि परम सत्य, सृष्टि के स्रोत और प्रत्येक व्यक्ति के भीतर असीम संभावनाओं का प्रतीक बताते हैं. वे शिव आदियोगी कहते हैं. शिवजी पहले योगी थे, जिन्होंने योग विज्ञान को जाना और लोगों को इसके बारे में ज्ञान दिया. सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनुसार, शिवजी उस असीम शून्य का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिससे सब कुछ उत्पन्न होता है. शिवजी ही एकमात्र ऐसे देव हैं, जो मनुष्य की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं.
समस्त सृष्टि के स्रोत शिवजी
सद्गुरु के अनुसार, शिव असीम शून्यता का प्रतिनिधित्व करने के बावजूद समस्त सृष्टि के स्रोत हैं. भगवान शिव को ब्रह्मांड के संहारक और इसका रूपांतरण करने वाले के रूप में देखा जाता है. यह भूमिका सृष्टि के सृजन, संरक्षण और विनाश के चक्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. वे ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़े हैं. उन्हें विनाश और नवीनीकरण का देवता माना जाता है. ब्रह्मा को पारंपरिक रूप से सृष्टिकर्ता माना जाता है, वहीं शिव की भूमिका ब्रह्मांड के अस्तित्व और परिवर्तन की सतत प्रक्रिया का अभिन्न अंग है.
आदियोगी हैं आशुतोष
सद्गुरु के अनुसार, शिव की भूमिका आदियोगी की रही है. वे पहले योगी थे, जिन्होंने योग विज्ञान को मानवता के साथ साझा किया. वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि शिव का योग ज्ञान केवल अभ्यास के लिए नहीं था, बल्कि अस्तित्व के मूलभूत विज्ञान की गहन समझ सभी को बताना था.
शिव का अस्तित्व
सद्गुरु शिव को किसी पूजनीय पौराणिक पात्र के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे अस्तित्व के रूप में चित्रित करते हैं, जिसे आत्म-साक्षात्कार के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है. वे व्यक्तियों को शिव के सिद्धांतों के साथ तालमेल बिठाते हुए अपने भीतर की संभावनाओं को तलाशने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. यह ज्ञान सीमाओं और द्वैत से परे हैं.
पुरुष और स्त्री ऊर्जा से लगाव
सद्गुरु अक्सर जीवन और सृष्टि के विभिन्न पहलुओं, जैसे पुरुष और स्त्री ऊर्जा, सृष्टि की तीन प्रमुख शक्तियां (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) और समय की अवधारणा (महाकाल) के संबंध में शिव की चर्चा करते हैं. स्त्री ऊर्जा को वे शक्ति का स्वरुप मानते हैं
बताते हैं मुक्ति का मार्ग
हर व्यक्ति का अंतिम लक्ष्य मोक्ष को प्राप्त करना होता है. इसके लिए वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति चाहता है. सद्गुरु शिव को भौतिक संसार की सीमाओं और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति चाहने वालों के लिए एक शक्तिशाली प्रतीक के रूप में देखते हैं. वे इस बात पर ज़ोर देते हैं कि आंतरिक संतुलन और मुक्ति की अवस्था प्राप्त करने के लिए योग और ध्यान जैसे अभ्यासों के माध्यम से शिव की ऊर्जा का उपयोग किया जा सकता है.इसके अलावा शिव की ऊर्जा का उपयोग करना होगा.

















