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Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत 2026, बरगद पर सात बार सूत बांधने का रहस्य और सुहागिनों के लिए महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, May 8, 2026
Last Updated On: Friday, May 8, 2026
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं का विशेष पर्व है, जिसमें वे पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं. इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा कर सात बार सूत बांधने की परंपरा निभाई जाती है, जो अटूट प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, May 8, 2026
Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास और आस्था से जुड़ा पर्व माना जाता है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और सुरक्षित जीवन के लिए निर्जला या फलाहार व्रत रखती हैं. यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट रिश्ते और विश्वास का प्रतीक है. खास बात यह है कि इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है, जिसे “वट वृक्ष” कहा जाता है. माना जाता है कि इस वृक्ष में दिव्य शक्तियों का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का आशीर्वाद मिलता है.
कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2026?
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई, शनिवार को मनाया जाएगा. ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि इस दिन सुबह 5 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर रात 1 बजकर 30 मिनट तक रहेगी. इस पूरे दिन महिलाएं विधि-विधान से व्रत रखकर पूजा करती हैं. इस दिन का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसी तिथि पर शनि जयंती भी पड़ती है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और गहरा हो जाता है.
सावित्री-सत्यवान की कथा का रहस्य
वट सावित्री व्रत की जड़ें पौराणिक कथा में छिपी हैं. मान्यता है कि सावित्री नाम की एक पतिव्रता स्त्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त कर लिए थे. अपनी बुद्धिमत्ता, भक्ति और दृढ़ निश्चय से उन्होंने मृत्यु को भी परास्त कर दिया. यही कारण है कि इस दिन महिलाएं सावित्री की तरह अपने पति की रक्षा और दीर्घायु की कामना करती हैं. यह कथा सिखाती है कि सच्चा प्रेम और विश्वास किसी भी कठिन परिस्थिति को जीत सकता है.
बरगद के पेड़ का धार्मिक महत्व
वट वृक्ष यानी बरगद को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना गया है. मान्यता के अनुसार, इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है. इस कारण यह वृक्ष सृष्टि, पालन और संहार की शक्तियों का प्रतीक बन जाता है. जब महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करती हैं, तो वे एक साथ तीनों देवों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं. यह पूजा जीवन में संतुलन, शक्ति और संरक्षण का प्रतीक मानी जाती है.
क्यों बांधा जाता है 7 बार कच्चा सूत?
वट सावित्री व्रत के दिन बरगद के पेड़ पर सात बार कच्चा सूत लपेटने की परंपरा बहुत खास मानी जाती है. यह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि गहरे अर्थों से जुड़ी हुई आस्था है. माना जाता है कि ऐसा करने से पति पर आने वाले सभी संकट दूर होते हैं और दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है. सात बार सूत लपेटना सात जन्मों के बंधन का प्रतीक होता है, जो पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत और अटूट बनाता है.
सूत बांधने के पीछे छिपी आस्था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब महिलाएं वट वृक्ष के चारों ओर सूत बांधती हैं, तो वे भगवान को साक्षी मानकर अपने परिवार की सुरक्षा और खुशहाली की कामना करती हैं. यह एक तरह का आध्यात्मिक “सुरक्षा कवच” माना जाता है. इस दौरान महिलाएं मन ही मन अपने पति की लंबी उम्र, स्वास्थ्य और सुखमय जीवन की प्रार्थना करती हैं. इस प्रक्रिया में भक्ति, विश्वास और समर्पण का अनोखा संगम देखने को मिलता है.
वट सावित्री व्रत का सामाजिक संदेश
यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रिश्तों की मजबूती और आपसी समझ का संदेश भी देता है. यह दिन पति-पत्नी के बीच प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी को और गहरा करने का अवसर होता है. साथ ही यह परंपरा हमें प्रकृति के प्रति सम्मान और वृक्षों के महत्व को भी समझाती है. बरगद जैसे विशाल वृक्ष की पूजा करना हमें पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है.














