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कब मनाई जाएगी Vivah Panchami 2025? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Authored By: Ranjan Gupta
Published On: Friday, November 7, 2025
Last Updated On: Friday, November 7, 2025
Vivah Panchami 2025 Date, Shubh muhurat, puja-vidhi: विवाह पंचमी भगवान श्रीराम और माता सीता के दिव्य विवाह की स्मृति में मनाया जाने वाला पावन पर्व है. मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि पर यह पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ विशेष रूप से मिथिला और अयोध्या में मनाया जाता है. इस दिन राम-सीता विवाह की झांकियां सजाई जाती हैं और मंगल गीतों से वातावरण भक्तिमय बन जाता है.
Authored By: Ranjan Gupta
Last Updated On: Friday, November 7, 2025
Vivah Panchami 2025 Date, Shubh muhurat, puja-vidhi: विवाह पंचमी हिन्दू पंचांग के अनुसार हर वर्ष मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है. यह तिथि भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र विवाह की याद दिलाती है. त्रेता युग में राजा जनक के दरबार में आयोजित स्वयंवर में भगवान राम द्वारा शिव धनुष तोड़ने के बाद इसी दिन माता सीता ने उन्हें जीवनसाथी के रूप में वरण किया था. यही कारण है कि यह पर्व केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्श गृहस्थ जीवन के प्रतीक के रूप में पूजित है.
विवाह पंचमी 2025 में यह शुभ पर्व 25 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा. इस दिन ध्रुव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे पूजा का फल अनेक गुना बढ़ जाएगा. भक्त इस दिन रामचरितमानस के विवाह प्रसंग का पाठ करते हैं और भगवान राम-सीता की आराधना कर अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.
विवाह पंचमी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त (Vivah Panchami 2025 Date and Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 24 नवंबर 2025 की रात 9 बजकर 22 मिनट से शुरू होगी और 25 नवंबर की रात 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगी. हिंदू परंपरा के अनुसार, उदयातिथि ही प्रमुख मानी जाती है. इसलिए इस वर्ष विवाह पंचमी 25 नवंबर 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र विवाह की वर्षगांठ श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी.
इस दिन ध्रुव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग जैसे शुभ संयोग बन रहे हैं. ज्योतिष मान्यता है कि इन योगों में श्रीराम और माता सीता की पूजा करने से जीवन में सुख-शांति और सौभाग्य बढ़ता है. विवाहित दंपति के रिश्ते में प्रेम और सामंजस्य बना रहता है.
विवाह पंचमी 2025 की पूजा विधि (Vivah Panchami 2025 Puja Vidhi)
विवाह पंचमी के दिन सबसे पहले घर को साफ करें और पूजा स्थान को सजाएं. भगवान श्रीराम और माता सीता की मूर्ति या तस्वीर को एक पवित्र चौकी पर स्थापित करें. भगवान राम को पीले या लाल वस्त्र पहनाएं और माता सीता को सुहाग की सामग्री अर्पित करें.
उन्हें चंदन, रोली, अक्षत, धूप, दीप और पुष्प अर्पित करें. इसके बाद रामचरितमानस में वर्णित राम-सीता विवाह प्रसंग का पाठ करें. आरती करें और अपने जीवन की मंगलकामना करें. पूजा के अंत में भूल-चूक के लिए क्षमा याचना करें और दिनभर सात्विक भोजन ही करें. तामसिक चीजों के सेवन से बचना शुभ माना गया है.
इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा पूरे समर्पण से करने पर दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सुख-समृद्धि बनी रहती है.
धार्मिक महत्व एवं कथा
विवाह पंचमी का धार्मिक आधार भगवान श्रीराम और माता सीता के पवित्र विवाह से जुड़ा है. कथा के अनुसार, मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के स्वयंवर का आयोजन किया था, जिसमें भगवान शिव के धनुष को उठाकर प्रत्यंचा चढ़ाने की शर्त रखी गई थी. अनेक वीर राजकुमारों ने प्रयास किया, परंतु कोई भी उस धनुष को उठा न सका. अंततः भगवान राम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से धनुष उठाया और उसे तोड़ दिया. इसी के साथ माता सीता ने उन्हें वरमाला पहनाई और विवाह संपन्न हुआ.
यह विवाह केवल एक युगल का मिलन नहीं था, बल्कि यह सत्य, मर्यादा और धर्म के संगम का प्रतीक बन गया. इसीलिए इस दिन को “विवाह पंचमी” कहा जाता है. इस अवसर पर भक्त अपने घरों और मंदिरों में श्रीराम और माता सीता के विवाह की झांकी सजाते हैं और मंगलगीत गाते हैं.
प्रमुख उत्सव स्थल
विवाह पंचमी के अवसर पर सबसे भव्य आयोजन जनकपुर (नेपाल) और अयोध्या (उत्तर प्रदेश) में होता है. जनकपुर में इस दिन भगवान राम और माता सीता की झांकी सजाई जाती है, मंदिरों में विवाह उत्सव आयोजित होता है, और पूरा नगर दीपमालाओं से जगमगा उठता है. अयोध्या में भी श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और अन्य राम मंदिरों में विशेष पूजन और भक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं.
आधुनिक संदर्भ में महत्व
आज विवाह पंचमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह वैवाहिक जीवन में परस्पर प्रेम, समर्पण और मर्यादा के आदर्श को स्मरण करने का दिन है. यह पर्व हमें यह सिखाता है कि पति-पत्नी का रिश्ता केवल सामाजिक बंधन नहीं बल्कि आत्मिक एकता और ईश्वरीय प्रेरणा का प्रतीक है. इस दिन अनेक दंपती भी भगवान राम और सीता से अपने वैवाहिक जीवन में सौहार्द और स्थिरता की प्रार्थना करते हैं.
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