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Bakrid 2026 Date: बकरीद 2026 कब होगी, 27 या 28 मई? जानें चांद, मौलाना की राय और सही तारीख का सच
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, May 6, 2026
Last Updated On: Wednesday, May 6, 2026
Bakrid 2026 Date: बकरीद 2026 की तारीख को लेकर असमंजस बना हुआ है, क्योंकि यह चांद दिखने पर निर्भर करती है. विशेषज्ञों के अनुसार भारत में यह त्योहार 28 मई को मनाया जा सकता है, जबकि कुछ देशों में 27 मई को बकरीद होगी. यह पर्व कुर्बानी, त्याग और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, May 6, 2026
Bakrid 2026 Date: माह-ए-रमजान और ईद-उल-फितर के खत्म होते ही मुसलमानों की नजरें अगले बड़े त्योहार पर टिक जाती हैं, जिसे बकरीद या ईद-उल-अजहा कहा जाता है. यह इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे बड़ा पर्व माना जाता है. हर साल की तरह इस बार भी लोगों के मन में एक ही सवाल है कि आखिर बकरीद 2026 किस दिन मनाई जाएगी? क्योंकि इस्लामी कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है, इसलिए इसकी तारीख पहले से तय नहीं होती, बल्कि चांद दिखने पर ही अंतिम फैसला लिया जाता है.
27 या 28 मई? तारीख को लेकर असमंजस
इस्लामी पंचांग के अनुसार बकरीद जिलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाई जाती है, जो इस्लामी साल का आखिरी महीना होता है. विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, साल 2026 में बकरीद 27 या 28 मई को पड़ सकती है. हालांकि, असली तारीख का ऐलान चांद दिखने के बाद ही किया जाएगा. यही वजह है कि हर साल की तरह इस बार भी लोगों को चांद का इंतजार रहेगा.
मौलाना की राय: चांद की स्थिति क्या कहती है?
ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय इस्लामी विद्वान मौलाना समीरुद्दीन कासमी ने बकरीद की संभावित तारीख को लेकर अहम जानकारी साझा की है. उनके अनुसार 17 मई 2026 को भारत में चांद की ऊंचाई लगभग 9 डिग्री और उम्र करीब 17 घंटे 39 मिनट होगी. आमतौर पर चांद 10 डिग्री की ऊंचाई पर साफ नजर आता है, ऐसे में 17 मई को चांद दिखना मुश्किल हो सकता है.
वहीं 18 मई को चांद की स्थिति काफी बेहतर होगी इस दिन इसकी ऊंचाई 23 डिग्री और उम्र 41 घंटे से ज्यादा होगी. इसका मतलब है कि 18 मई को चांद आसानी से देखा जा सकेगा, जिससे 19 मई से जिलहिज्जा का महीना शुरू हो सकता है. इस हिसाब से भारत में बकरीद 28 मई 2026 को मनाई जाने की संभावना ज्यादा है.
अलग-अलग देशों में अलग तारीख क्यों?
मौलाना के अनुसार, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान जैसे देशों में 17 मई को ही चांद दिखने की संभावना बन सकती है. इसलिए वहां 18 मई से जिलहिज्जा शुरू होकर 27 मई को बकरीद मनाई जा सकती है. वहीं भारत, नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार में चांद एक दिन बाद दिख सकता है, जिसके कारण यहां बकरीद 28 मई को मनाई जा सकती है. यही वजह है कि कई बार अलग-अलग देशों में ईद या बकरीद अलग दिनों में मनाई जाती है.
कुर्बानी का महत्व और परंपरा
बकरीद का असली मतलब सिर्फ त्योहार मनाना नहीं, बल्कि त्याग और बलिदान की भावना को समझना है. इस दिन हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में बकरे, भेड़ या अन्य जानवर की कुर्बानी दी जाती है. इस परंपरा के पीछे यह संदेश छिपा है कि इंसान को अपने अहंकार और स्वार्थ का त्याग करना चाहिए.
कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है-
- एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए
- दूसरा हिस्सा गरीब और जरूरतमंदों के लिए
- तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए
इससे समाज में भाईचारा और समानता का संदेश फैलता है.
निष्कर्ष: चांद पर टिकी है अंतिम तारीख
बकरीद 2026 की तारीख फिलहाल अनुमान के आधार पर 27 या 28 मई मानी जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला चांद के दीदार के बाद ही होगा. यही इस्लामी परंपरा की खूबसूरती भी है, जहां प्रकृति के संकेतों के आधार पर त्योहार मनाए जाते हैं. इसलिए अब सबकी निगाहें आसमान पर टिकी हैं कि कब दिखेगा चांद और कब मनाई जाएगी कुर्बानी की ईद.
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