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Sawan 2026: 23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी का महासंयोग, भद्रा रहित रक्षाबंधन बनेगा खास, जानिए तिथि, शुभ योगों का महत्व
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, July 14, 2026
Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026
Sawan 2026: सावन 2026 कई दुर्लभ धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रहा है. 23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी और सिंह संक्रांति एक साथ पड़ रही है, जबकि रक्षाबंधन भी भद्रा रहित रहेगा. जानिए इन शुभ संयोगों का महत्व, पूजा का विशेष फल और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, July 14, 2026
Sawan 2026: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है, लेकिन साल 2026 का सावन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से और भी अधिक विशेष रहने वाला है. इस बार सावन के दौरान ऐसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं, जो कई वर्षों बाद देखने को मिल रहे हैं. खास बात यह है कि सावन के तीसरे सोमवार पर नाग पंचमी और सिंह संक्रांति एक साथ पड़ रही है. वहीं, रक्षाबंधन भी भद्रा रहित रहेगा, जिससे पूरे दिन राखी बांधने का शुभ अवसर मिलेगा. इन दुर्लभ संयोगों को श्रद्धालुओं और ज्योतिषाचार्यों द्वारा बेहद शुभ माना जा रहा है.
23 साल बाद सावन सोमवार और नाग पंचमी का महासंयोग
इस वर्ष सावन का तीसरा सोमवार 17 अगस्त 2026 को पड़ रहा है और इसी दिन नाग पंचमी का पर्व भी मनाया जाएगा. सामान्यतः नाग पंचमी और सावन सोमवार अलग-अलग तिथियों पर आते हैं, लेकिन इस बार दोनों का एक साथ पड़ना बेहद दुर्लभ संयोग माना जा रहा है. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा संयोग करीब 23 साल बाद बन रहा है. इससे पहले यह स्थिति वर्ष 2003 में बनी थी.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, धतूरा और कच्चा दूध अर्पित करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. साथ ही नाग देवता की पूजा करने से राहु-केतु से जुड़े दोष शांत होने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की मान्यता है.
सिंह संक्रांति से बनेगा विशेष ज्योतिषीय योग
17 अगस्त को ही सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे सिंह संक्रांति कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सावन सोमवार और सिंह संक्रांति का एक साथ होना अत्यंत प्रभावशाली योग माना जाता है. इस दौरान बनने वाला छत्र भंग योग शासन, प्रशासन और सामाजिक व्यवस्था में बड़े बदलावों का संकेत माना जाता है.
हालांकि, सोमवार चंद्रमा का दिन होता है, जो मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच का प्रतीक है. इसलिए ज्योतिषियों का मानना है कि यह योग व्यक्तिगत जीवन में धैर्य, आत्मविश्वास और स्थिरता भी प्रदान कर सकता है.
रक्षाबंधन 2026 रहेगा और भी शुभ
सावन के बाद आने वाला रक्षाबंधन का पर्व भी इस बार विशेष महत्व रखता है. 28 अगस्त 2026 को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जिससे बहनें पूरे दिन बिना किसी बाधा के अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकेंगी. ऐसा संयोग लगभग पांच साल बाद बन रहा है. इससे पहले वर्ष 2021 में भद्रा रहित रक्षाबंधन पड़ा था.
द्रिक पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह 9:08 बजे से शुरू होकर 28 अगस्त सुबह 9:48 बजे तक रहेगी. इसलिए उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को ही मनाया जाएगा.
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष राखी बांधने का सबसे उत्तम समय सुबह से ही उपलब्ध रहेगा. शुभ मुहूर्त इस प्रकार है-
- रक्षाबंधन की तिथि: 28 अगस्त 2026
- भद्रा: नहीं रहेगी
- शुभ मुहूर्त: सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक
- कुल शुभ अवधि: लगभग 3 घंटे 51 मिनट
भद्रा न होने के कारण श्रद्धालुओं को शुभ समय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और पूरे दिन धार्मिक कार्य करना भी शुभ माना जाएगा.
श्रद्धालुओं के लिए क्यों है यह सावन यादगार?
Sawan 2026 केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि दुर्लभ ज्योतिषीय संयोगों का भी साक्षी बनने जा रहा है. एक ओर 23 साल बाद सावन सोमवार पर नाग पंचमी और सिंह संक्रांति का महासंयोग बन रहा है, तो दूसरी ओर रक्षाबंधन भद्रा रहित होने से पर्व का महत्व और बढ़ गया है. ऐसे संयोग वर्षों बाद बनते हैं, इसलिए श्रद्धालुओं के लिए यह सावन विशेष पूजा, व्रत और शिव आराधना का अनूठा अवसर माना जा रहा है.
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