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कटे सिर के पोस्टर से धोनी की भिड़ंत तक, भारत-बांग्लादेश क्रिकेट के सबसे बड़े बवाल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Thursday, January 8, 2026
Last Updated On: Thursday, January 8, 2026
भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट मुकाबले सिर्फ खेल नहीं, बल्कि भावनाओं और विवादों का संगम रहे हैं. कभी नो-बॉल फैसले ने आग लगाई, तो कभी धोनी का कटा सिर वाला पोस्टर सुर्खियों में रहा. विराट कोहली पर फेक फील्डिंग का आरोप हो या अंडर-19 वर्ल्ड कप की हाथापाई, ये बवाल बताते हैं कि यह प्रतिद्वंद्विता मैदान से कहीं आगे निकल चुकी है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Thursday, January 8, 2026
India Bangladesh Cricket: भारत और बांग्लादेश के बीच क्रिकेट मुकाबले हमेशा से सिर्फ चौकों-छक्कों और रोमांच तक सीमित नहीं रहे हैं. इन मैचों में कई बार ऐसा भी हुआ है, जब खेल पीछे छूट गया और विवाद सुर्खियों में आ गए. मैदान के अंदर खिलाड़ियों की भिड़ंत हो या मैदान के बाहर फैन्स की उग्र प्रतिक्रिया, भारत-बांग्लादेश क्रिकेट इतिहास ऐसे कई किस्सों से भरा पड़ा है. हाल के दिनों में जब दोनों देशों के रिश्तों में तनाव की बातें सामने आ रही हैं, तो पुराने क्रिकेट विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं. आइए जानते हैं उन पांच बड़े बवालों के बारे में, जिन्होंने इस प्रतिद्वंद्विता को और तीखा बना दिया.
2015 वर्ल्ड कप का ‘नो बॉल’ विवाद जिसने आग लगा दी
2015 वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में भारत और बांग्लादेश आमने-सामने थे. मैच के दौरान रोहित शर्मा 90 रन पर खेल रहे थे, तभी रुबेल हुसैन की एक फुल टॉस गेंद पर वह कैच आउट हो गए. मैदान पर मौजूद अंपायर ने इसे कमर से ऊपर की नो बॉल करार देते हुए रोहित को नॉट आउट दिया. बाद में जब रीप्ले देखा गया, तो यह साफ हुआ कि गेंद नो बॉल नहीं थी. रोहित को मिले इस जीवनदान ने मैच की तस्वीर ही बदल दी और उन्होंने 137 रनों की शानदार पारी खेली. भारत ने मैच जीत लिया, लेकिन बांग्लादेशी फैन्स और क्रिकेट बोर्ड इस फैसले से भड़क उठे. यहां तक कि आईसीसी के तत्कालीन अध्यक्ष ने भी अंपायरिंग पर सवाल खड़े किए, जिससे विवाद और गहरा गया.
धोनी का कटा हुआ सिर: सोशल मीडिया पर फैली नफरत
2016 एशिया कप से पहले एक ऐसा विवाद सामने आया, जिसने खेल की मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई, जिसमें बांग्लादेशी गेंदबाज तस्कीन अहमद को एमएस धोनी का कटा हुआ सिर हाथ में पकड़े दिखाया गया था. यह तस्वीर पूरी तरह फोटोशॉप्ड थी, लेकिन भारतीय फैन्स ने इसे बेहद अपमानजनक माना. इससे पहले एक बांग्लादेशी अखबार ने भी भारतीय खिलाड़ियों की आधी मुंडी वाली तस्वीर छापी थी. इन हरकतों ने दोनों देशों के फैन्स के बीच तनाव को और बढ़ा दिया और क्रिकेट से ज्यादा नफरत की चर्चा होने लगी.
विराट कोहली और ‘फेक फील्डिंग’ का आरोप
2022 टी20 वर्ल्ड कप में भारत-बांग्लादेश मैच के दौरान एक और विवाद ने तूल पकड़ा. मुकाबले के दौरान विराट कोहली पर ‘फेक फील्डिंग’ का आरोप लगा, जब उन्होंने रन ले रहे बल्लेबाजों को भ्रमित करने के लिए ऐसा इशारा किया, मानो वह गेंद फेंकने वाले हों, जबकि गेंद उनके पास थी ही नहीं. बांग्लादेशी खिलाड़ियों ने इसे नियमों के खिलाफ बताया, लेकिन अंपायरों ने कोई कार्रवाई नहीं की. भारत ने मैच जीत लिया, लेकिन बांग्लादेश के विकेटकीपर नुरुल हसन ने बाद में इस फैसले पर खुलकर नाराजगी जाहिर की, जिससे बहस और तेज हो गई.
अंडर-19 वर्ल्ड कप 2020: जीत के बाद भी हाथापाई
2020 अंडर-19 वर्ल्ड कप का फाइनल भारत और बांग्लादेश के बीच खेला गया. इस मैच में बांग्लादेश ने भारत को हराकर पहली बार खिताब जीता. जीत के बाद जश्न इस कदर उग्र हो गया कि दोनों टीमों के खिलाड़ी मैदान पर ही आपस में भिड़ गए. धक्का-मुक्की, बहस और गाली-गलौज के दृश्य कैमरों में कैद हो गए. आईसीसी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों टीमों के कई खिलाड़ियों पर बैन लगाया. यह घटना बताती है कि कैसे दबाव और प्रतिद्वंद्विता कभी-कभी खेल भावना पर हावी हो जाती है.
जब धोनी का सब्र टूटा और मामला आईसीसी तक पहुंचा
2015 के एक वनडे मैच में भारत के कप्तान एमएस धोनी और बांग्लादेशी गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान के बीच टक्कर हो गई. आरोप था कि मुस्तफिजुर बार-बार बल्लेबाजों के रन लेते समय उनके रास्ते में जानबूझकर आ रहे थे. एक रन के दौरान धोनी का सब्र टूट गया और उन्होंने गुस्से में मुस्तफिजुर को कंधा मारकर हटाया. यह घटना कैमरों में कैद हो गई और काफी चर्चा में रही. बाद में आईसीसी ने इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए दोनों खिलाड़ियों पर जुर्माना लगाया.
क्रिकेट से आगे बढ़ चुका है यह टकराव
भारत-बांग्लादेश के बीच ये विवाद सिर्फ मैच तक सीमित नहीं रहे, बल्कि दोनों देशों के फैन्स की भावनाओं से भी जुड़ गए. हर नया मुकाबला पुराने जख्मों को फिर से हरा कर देता है. उम्मीद यही है कि आने वाले समय में यह प्रतिद्वंद्विता खेल की गरिमा के साथ आगे बढ़े, ताकि क्रिकेट फिर से विवादों पर नहीं, खेल के रोमांच पर पहचाना जाए.
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