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दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल और सिसोदिया की गिरफ्तारी, जेल, जांच और अदालत से बरी होने तक पूरी कहानी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, March 2, 2026
Last Updated On: Monday, March 2, 2026
Delhi liquor policy case: दिल्ली की नई आबकारी नीति से शुरू हुआ विवाद सीबीआई और ईडी जांच तक पहुंचा. अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी ने राजनीति गरमा दी. महीनों जेल में रहने के बाद राऊज एवेन्यू अदालत ने उन्हें बरी कर दिया, जबकि एजेंसियां फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दे चुकी हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, March 2, 2026
Delhi liquor policy case: दिल्ली की राजनीति में भूचाल तब आया जब आम आदमी पार्टी सरकार ने नवंबर 2021 में नई आबकारी नीति लागू की. सरकार का कहना था कि इससे शराब बिक्री व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, काला बाज़ार खत्म होगा और ग्राहकों को बेहतर सुविधा मिलेगी. लेकिन नीति लागू होने के कुछ ही महीनों बाद विपक्ष ने इसे “शराब नीति घोटाला” करार दे दिया. आरोप लगे कि इस नई व्यवस्था के जरिए कुछ खास कारोबारियों को फायदा पहुंचाया गया और सरकारी खजाने को नुकसान हुआ. बढ़ते विवाद और राजनीतिक दबाव के बीच 2022 में दिल्ली सरकार ने इस नीति को रद्द कर दिया, लेकिन तब तक मामला कानूनी जांच की दिशा पकड़ चुका था.
रिपोर्ट से दर्ज हुआ केस
जुलाई 2022 में तत्कालीन मुख्य सचिव नरेश कुमार ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट में नीति निर्माण और उसके क्रियान्वयन में ‘प्रक्रियात्मक खामियों’ का जिक्र किया गया. दावा किया गया कि तत्कालीन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कई फैसले मनमाने ढंग से लिए, जिससे सरकारी खजाने को 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ. रिपोर्ट के आधार पर उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की और यहीं से केस औपचारिक रूप से दर्ज हुआ.
सीबीआई और ईडी की एंट्री
सीबीआई ने अपनी जांच में आरोप लगाया कि शराब थोक विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए नीति में बदलाव किए गए. जांच एजेंसी का दावा था कि कई कंपनियों ने कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दी, जिसका इस्तेमाल चुनावी प्रचार में किया गया. इसके बाद मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार कर लिया गया. 21 मार्च 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरविंद केजरीवाल को भी गिरफ्तार किया और 26 जून 2024 को सीबीआई ने उन्हें औपचारिक रूप से हिरासत में ले लिया. दोनों नेताओं को महीनों जेल में रहना पड़ा, जिससे राजनीतिक माहौल और गरम हो गया.
राजनीतिक टकराव और आरोप-प्रत्यारोप
भारतीय जनता पार्टी ने आरोप लगाया कि यह मामला सरकारी खजाने की लूट और सत्ता के दुरुपयोग का है. वहीं अरविंद केजरीवाल ने इसे राजनीतिक साजिश बताया. उनका कहना था कि केंद्र सरकार और भाजपा दिल्ली में सरकार गिराने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही हैं. आम आदमी पार्टी और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने भी आरोप लगाया कि यह कार्रवाई बदले की भावना से की गई. इस मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा स्थान ले लिया और संसद से लेकर सड़क तक बहस छिड़ गई.
चार्जशीट और मुख्य आरोप
सीबीआई की चार्जशीट में अरविंद केजरीवाल को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया गया. उन पर विवादित नीति तैयार करने और कथित रूप से अपराध की आय के उपयोग का आरोप लगाया गया. मनीष सिसोदिया पर निजी शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए एकतरफा फैसले लेने का आरोप था. जांच एजेंसियों ने कहा कि लाइसेंस फीस में भारी छूट दी गई और नियमों में बदलाव से कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया. हालांकि, दोनों नेताओं ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि नीति पूरी तरह पारदर्शी और जनहित में थी.
राऊज एवेन्यू कोर्ट का फैसला
लंबी सुनवाई और बहस के बाद दिल्ली की राऊज एवेन्यू अदालत ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 23 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया. अदालत ने उपलब्ध सबूतों के आधार पर उन्हें दोषमुक्त माना. इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी ने इसे “सच की जीत” बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि वह फैसले को चुनौती देगी. खबरों के अनुसार, सीबीआई ने इस निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
जेल से बरी होने तक की सियासी यात्रा
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की राजनीति को हिला कर रख दिया. एक तरफ महीनों की जेल, दूसरी तरफ अदालत से बरी होने का फैसला यह कहानी सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव की भी रही. अब मामला उच्च अदालत में पहुंच चुका है, जिससे यह साफ है कि कानूनी और राजनीतिक लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. दिल्ली शराब नीति मामला आने वाले समय में भी सियासत के केंद्र में बना रह सकता है.
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