150 से ज्यादा देशों पर एक समान टैरिफ दर लागू करेगा अमेरिका, ट्रंप ने किया ऐलान

Authored By: Ranjan Gupta

Published On: Thursday, July 17, 2025

Last Updated On: Thursday, July 17, 2025

ट्रंप ने America Uniform Tariff Plan के तहत 150+ देशों पर समान शुल्क दर लागू करने की घोषणा की
ट्रंप ने America Uniform Tariff Plan के तहत 150+ देशों पर समान शुल्क दर लागू करने की घोषणा की

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 150 से अधिक देशों पर एक समान टैरिफ दर (यूनिफाइड टैरिफ रेट) लागू करने की योजना बनाई है, जिससे वैश्विक व्यापार संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है. भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता फिलहाल कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अटकी हुई है, जबकि ट्रंप प्रशासन इस नई टैरिफ व्यवस्था को जल्द लागू करने के मूड में दिख रहा है.

Authored By: Ranjan Gupta

Last Updated On: Thursday, July 17, 2025

America Uniform Tariff Plan: अमेरिका की व्यापार नीति में बड़ा बदलाव करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 150 से अधिक देशों पर एक समान टैरिफ संरचना लागू करने की घोषणा की है. ‘यूनिफाइड टैरिफ रेट’ नामक इस नई नीति का उद्देश्य गैर-समझौतावादी अर्थव्यवस्थाओं पर समान शुल्क लागू करना है. इस निर्णय के बाद अमेरिका और उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच नए सिरे से बातचीत तेज हो गई है.

बुधवार को ‘व्हाइट हाउस’ में बहरीन के क्राउन प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “उस ग्रुप में सबके लिए सब कुछ एक जैसा ही होगा.”

समाचार एजेंसी ‘सिन्हुआ’ ने पोलिटिको के हवाले से बताया कि अप्रैल में, ट्रंप प्रशासन ने द्विपक्षीय समझौतों के दायरे में न आने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर 10 प्रतिशत का बेसलाइन टैरिफ लागू किया था. हालांकि, ट्रंप ने पहले सुझाव दिया था कि नई बेसलाइन को 15 प्रतिशत या 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन उन्होंने बुधवार को कोई नई दर तय नहीं की.

20 से अधिक देशों को भेजे जा चुके हैं टैरिफ लेटर

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने पहले ही लगभग दो दर्जन देशों को पत्र भेज दिए हैं. इनमें यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया शामिल हैं. इन्हें 1 अगस्त से लागू होने वाली टैरिफ दरों की जानकारी दी गई है. इस घोषणा के बाद प्रभावित व्यापारिक साझेदारों के साथ अधिक अनुकूल शर्तों के लिए बातचीत तेज हो गई है.

हालांकि, विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों ने इस बात पर संदेह जताया है कि नई टैरिफ योजना 1 अगस्त से नियोजित रूप में लागू हो पाएगी या नहीं, क्योंकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू राजनीति पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं.

स्विट्जरलैंड और भारत जैसे देश, जो 2024 में अमेरिका के व्यापार घाटे का तीन प्रतिशत से अधिक हिस्सा थे, लेकिन जिन्हें अभी तक आधिकारिक नोटिस नहीं मिला है, अभी भी वाशिंगटन के साथ बातचीत की प्रक्रिया में हैं.

डेयरी और कृषि क्षेत्र पर अटकी हुई है बात

भारत और अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता फिलहाल कृषि और डेयरी सेक्टर के मुद्दों पर अटक गई है. भारत की ओर से वाणिज्य मंत्रालय की एक प्रतिनिधिमंडल वाशिंगटन में मौजूद है, जिसमें प्रमुख वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी शामिल हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि भारत किसी तय समयसीमा के दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा और देशहित को सर्वोपरि रखेगा. 

भारत ने अमेरिकी ऑटो पार्ट्स पर ‘जीरो-फॉर-जीरो टैरिफ’ की पेशकश की है, लेकिन कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी सख्त स्थिति बनाए रखी है. अमेरिका चाहता है कि भारत इन क्षेत्रों में भी रियायतें दे, जबकि भारत के लिए इन्हें खोलना न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है. इससे पहले भारत, अमेरिकी बर्बॉन व्हिस्की, मोटरसाइकिल और कुछ अन्य वस्तुओं पर शुल्क कम करने की दिशा में कदम उठा चुका है.

जापान और भारत को लेकर क्या बोले ट्रंप

  • बुधवार को ट्रंप ने अमेरिका-भारत व्यापार वार्ता को लेकर परस्पर विरोधी बयान दिए. पहले उन्होंने कहा, “हमारे पास एक और (समझौता) आने वाला है.” इसके बाद उन्होंने जोर देकर कहा कि “हम एक समझौते के बहुत करीब हैं.”
  • जापान के संदर्भ में ट्रंप ने कहा कि बातचीत जारी है, लेकिन उन्होंने उसके परिणाम को लेकर संदेह जताया है. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम संभवतः जापान के साथ पत्र के अनुसार ही काम करेंगे.”

(आईएएनएस इनपुट के साथ)

About the Author: Ranjan Gupta
रंजन कुमार गुप्ता डिजिटल कंटेंट राइटर हैं, जिन्हें डिजिटल न्यूज चैनल में तीन वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है. वे कंटेंट राइटिंग, गहन रिसर्च और SEO ऑप्टिमाइजेशन में माहिर हैं. शब्दों से असर डालना उनकी कला है और कंटेंट को गूगल पर रैंक कराना उनका जुनून! वो न केवल पाठकों के लिए उपयोगी और रोचक लेख तैयार करते हैं, बल्कि गूगल के एल्गोरिदम को भी ध्यान में रखते हुए SEO-बेस्ड कंटेंट तैयार करते हैं. रंजन का मानना है कि "हर जानकारी अगर सही रूप में दी जाए, तो वह लोगों की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है." यही सोच उन्हें हर लेख में निखरने का अवसर देती है.
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