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‘बोर्ड ऑफ पीस’ की आड़ में युद्ध की आहट: ईरान की ओर बढ़ता अमेरिकी बेड़ा और मिडिल ईस्ट में उड़ानों पर ब्रेक
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Saturday, January 24, 2026
Last Updated On: Saturday, January 24, 2026
ट्रंप ने 22 दिसंबर को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लॉन्च किया. उन्होंने इसे एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में पेश किया है, जो संघर्ष-ग्रस्त इलाकों में स्थिरता और स्थायी शांति को बढ़ावा देगा. लेकिन महज़ 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप का सुर बदल गया और ईरान को युध्द की चेतावनी दे डाली.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Saturday, January 24, 2026
Board of Peace: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अनिश्चित कूटनीति फिर से वैश्विक बहस के केंद्र में है. एक तरफ वे गाज़ा में शांति के लिए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों संग बैठक करते हैं. वहीं दूसरी ही तरफ ईरान के खिलाफ सैन्य ताकत के इस्तेमाल की खुली चेतावनियां देते हैं.
उनकी यह विरोधाभास आज अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सबसे बड़ा सवाल बन गया है. क्या यह युद्धग्रस्त क्षेत्रों के लिए शांति की रणनीति है या दबाव की नई भाषा है?
22 दिसंबर को ट्रंप ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लॉन्च किया. ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय संगठन के रूप में पेश किया गया है, जो संघर्ष-ग्रस्त इलाकों में स्थिरता और स्थायी शांति को बढ़ावा देगा. लेकिन महज़ 24 घंटे के भीतर ही ट्रंप का लहजा बदल गया.
ईरान को ट्रंप की नई धमकी
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों पर सरकारी कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने 24 दिसंबर को सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दे डाली. तभी से संकेत मिलने लगे कि पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ सकता है. उनकी धमकी को तब और बल मिला, जब अमेरिका का लड़ाकू शिप ईरान की ओर बढ़ने की खबर सार्वजनिक हुई.
अरब सागर की ओर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिकी प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर से लैस एक पूरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अरब सागर या फारस की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है. इस स्ट्राइक ग्रुप में एक अटैक सबमरीन भी शामिल है.
कुछ दिन पहले तक यह समूह दक्षिण चीन सागर में था. ट्रंप के निर्देश के बाद इसका रुख पश्चिम की ओर मोड़ दिया गया है. अब यह ओपन-सोर्स ट्रैकिंग सिस्टम से भी दिखाई नहीं दे रहा. इससे अटकलें और तेज़ हो गई हैं.
समुद्र से लेकर वायु तक सैन्य तैयारी
अमेरिकी सैन्य तैयारी सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं है. एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट, जो पहले भी ईरान द्वारा इज़राइल पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकने के लिए तैनात किए गए थे, एक बार फिर पश्चिम एशिया में सक्रिय हो गया हैं.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने हाल ही में एक पोस्ट साझा की, जिसमें इन जेट्स को एक अज्ञात सैन्य बेस पर उतरते देखा गया. यह साफ़ संकेत है कि अमेरिका किसी भी स्थिति से निपटने के लिए खुद को पूरी तरह तैयार रखे हुए है.
ट्रंप का दावा
ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए दावा किया कि अमेरिकी दबाव के चलते तेहरान को कथित तौर पर हजारों प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की योजना रोकनी पड़ी. हालांकि ईरान ने इन आरोपों को खारिज किया है. लेकिन वाशिंगटन की सैन्य तैयारियों में कोई कमी नहीं दिखी. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि एक अमेरिकी आर्मडा ईरान की ओर बढ़ रहा है. हालांकि बाद में इसे ‘एहतियाती कदम’ जरूर बताया गया है.
ट्रंप की चेतावनी और ईरानी जवाब
ट्रंप के इस चेतावनी पर ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है. ट्रंप से स्पष्ट कहा है कि ईरान पर किसी तरह के हमले का माकूल जवाब दिया जाएगा. हमें अपनी रक्षा से कोई नहीं रोक सकता. तेहरान ने यहां तक कहा है कि ईरान पर कोई भी हमला पूरी तरह से युद्ध माना जाएगा. उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा.
तनाव का असर नागरिक उड्डयन पर
इस बढ़ते तनाव का असर सीधे वैश्विक नागरिक उड्डयन पर पड़ा है. मिडिल ईस्ट में संभावित सैन्य टकराव के डर से कई बड़ी अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने अपनी उड़ानें निलंबित कर दी हैं. डच एयरलाइन KLM, जर्मनी की लुफ्थांसा और फ्रांस की एयर फ्रांस जैसी प्रमुख कंपनियां इसमें शामिल हैं.
इन एयरलाइंस कंपनियों ने क्षेत्र के लिए सेवाएं रोक दी हैं. इज़राइल, दुबई, रियाद और खाड़ी के अन्य बड़े हवाई केंद्र इन कैंसलेशन से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं.
एयरलाइंस ने क्या कहा?
एयर फ्रांस ने साफ़ कहा है कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए दुबई के लिए उड़ानें अस्थायी रूप से बंद की जा रही हैं. KLM ने तेल अवीव, दुबई, दम्मम और रियाद के लिए उड़ानें निलंबित करते हुए यह भी स्पष्ट किया कि वह ईरान, इराक, इज़राइल और खाड़ी के कई देशों के एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं करेगा.
लुफ्थांसा ग्रुप ने भी इज़राइल के लिए उड़ानों को केवल दिन के समय तक सीमित कर दिया है. एयरलाइंस ईरानी एयरस्पेस से दूरी बनाए रखी है. यूनाइटेड एयरलाइंस और एयर कनाडा जैसी कंपनियों ने भी तेल अवीव के लिए सेवाएं रोक दी हैं.
खतरे का संकेत
एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सिर्फ एहतियात नहीं है. बल्कि यह वास्तविक खतरे का संकेत भी है. मिसाइल और ड्रोन तकनीक के इस दौर में नागरिक विमानों के लिए जोखिम कई गुना बढ़ गया है. हाल ही में ईरान ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के डर से चार घंटे से ज़्यादा समय तक अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था. उस दौरान भी दुनिया भर की उड़ानें बाधित हुई थीं.
गाजा संकट पर पड़ेगा प्रभाव
इज़राइल इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नज़र बनाए हुए है. माना जा रहा है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता है, तो उसका सीधा असर इज़राइल-ईरान समीकरण और गाज़ा संकट पर भी पड़ेगा. सऊदी अरब और खाड़ी देशों के लिए भी यह स्थिति असहज है. क्योंकि किसी भी सैन्य संघर्ष का पहला झटका उनकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लग सकता है.
ट्रंप कूटनीति से दुविधा में दुनिया
कुल मिलाकर ट्रंप की ‘शांति’ और ‘दबाव’ की दोहरी नीति ने एक बार फिर दुनिया को दुविधा में डाल दिया है. विशेषज्ञों की भी पता नहीं चल प रहा है कि यह सैन्य जमावड़ा सिर्फ डराने की रणनीति है, या वाकई किसी बड़े टकराव की भूमिका तैयार हो रही है.
फिलहाल इतना तय है कि अमेरिकी बेड़े की हरकतों और हवाई उड़ानों पर लगे ब्रेक ने यह साफ़ कर दिया है कि मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है. इस ढेर में एक छोटी-सी चिंगारी भी हालात को विस्फोटक बना सकती है.
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