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नेपाल का यू-टर्न, विदेशी मदद को मंजूरी, भारत ने बढ़ाया हाथ, बाढ़ में 626 मौतें, 2500 लोग लापता
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, August 29, 2026
Last Updated On: Saturday, August 29, 2026
Nepal Flood: नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद सरकार ने विदेशी मदद को लेकर अपना रुख बदल दिया है. अब तकनीकी जांच और फॉरेंसिक सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग लिया जाएगा. भारत ने राहत सामग्री और तकनीकी टीम भेजी है. आपदा में 626 मौतों और करीब 2,500 लोगों के लापता होने की खबर है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, August 29, 2026
Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं. इस आपदा के बीच नेपाल सरकार ने विदेशी खोज और बचाव टीमों को लेकर अपने पहले के फैसले में बदलाव किया है. शुरुआत में सरकार का कहना था कि स्थानीय बचावकर्मी स्थिति संभालने में सक्षम हैं, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती चिंता के बाद अब सीमित विदेशी सहायता लेने का फैसला किया गया है.
पहले किया इनकार, अब तकनीकी मदद को मंजूरी
नेपाल सरकार ने पहले विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया था. अब सरकार ने कुछ विशेष क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की सहायता लेने का रास्ता खोल दिया है. डीएनए परीक्षण, फॉरेंसिक जांच और अन्य तकनीकी कार्यों के लिए विदेशी विशेषज्ञों की जरूरत महसूस की जा रही है. कई देशों के नागरिकों के लापता होने के कारण नेपाल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मदद स्वीकार करने का दबाव बढ़ा.
भारत की टीम पहुंची, राहत अभियान में जुटी वायुसेना
भारत ने नेपाल की मदद के लिए तेजी से कदम बढ़ाए हैं. भारतीय तकनीकी टीम काठमांडू पहुंच चुकी है, जबकि भारतीय वायुसेना भी राहत और बचाव प्रयासों में सहयोग कर रही है. भारत की ओर से दवाइयों और जरूरी खाद्य सामग्री सहित करीब 10 टन राहत सामग्री भेजी गई है. भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान यह आवश्यक सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा, जिससे प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाने की कोशिश की जा रही है.
विदेशी नागरिकों के लापता होने से बढ़ी चिंता
चीन-नेपाल सीमा के पास आई इस विनाशकारी बाढ़ में कई विदेशी नागरिकों के लापता होने की खबर है. रिपोर्टों के अनुसार, 77 ईशा तीर्थयात्रियों का अब तक पता नहीं चल पाया है. नेपाल के विदेश मंत्री ने भी माना कि कुछ तकनीकी क्षेत्रों में देश को बाहरी विशेषज्ञता की आवश्यकता है, हालांकि सामान्य खोज और बचाव अभियान को स्थानीय एजेंसियों के जरिए चलाने की बात कही गई है.
मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा डराने वाला
इस आपदा ने नेपाल में भारी तबाही मचाई है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मरने वालों की संख्या 626 तक पहुंच चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पा रहा है. करीब 320 भारतीयों और भारतीय मूल के लगभग 100 अन्य लोगों की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है. वहीं, तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क होने और उनके सुरक्षित होने की जानकारी राहत देने वाली है.
नारायणी नदी किनारे मिले शव
बाढ़ के बाद नदियों के किनारे शव मिलने का सिलसिला भी जारी है. नवलपरासी क्षेत्र में नारायणी नदी के अलग-अलग स्थानों से शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए थे. इसके बाद 48 और शव मिलने की जानकारी सामने आई. पुलिस और प्रशासन शवों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने तथा उनकी पहचान करने की प्रक्रिया में जुटे हुए हैं.
राहत और पहचान का काम बना सबसे बड़ी चुनौती
नेपाल के सामने अब सिर्फ राहत पहुंचाने की नहीं, बल्कि लापता लोगों की तलाश और मृतकों की पहचान की भी बड़ी चुनौती है. ऐसे में डीएनए टेस्टिंग और फॉरेंसिक जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. नेपाल के बदले रुख के बाद भारत समेत अन्य देशों के सहयोग से राहत और जांच कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है.
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