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वेनेजुएला संकट: विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ्तारी पर UN की चिंता, मादुरो केस में ट्रंप सख़्त
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Monday, January 5, 2026
Last Updated On: Monday, January 5, 2026
वेनेजुएला कभी लैटिन अमेरिका का सबसे अमीर देश हुआ करता था. अब वह आर्थिक तबाही और राजनीतिक संकट की मिसाल बन चुका है. देश की लगभग पांचवां आबादी पलायन कर चुकी है. ऐसे में मादुरो की गिरफ्तारी क्या बदलाव की शुरुआत बनेगी या एक नए अस्थिर अध्याय का रास्ता खोलेगी?
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Monday, January 5, 2026
Venezuela Crisis: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की अमेरिकी सेना द्वारा गिरफ्तारी के बाद वैश्विक राजनीति में जबरदस्त हलचल मची हुई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि वेनेजुएला की सत्ता में बैठी अंतरिम सरकार अमेरिका को सहयोग नहीं करती, तो आगे और सैन्य कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता. मादुरो को आज सोमवार (5 दिसंबर) को करीब दस बजे (भारतीय समयानुसार रात करीब 9 बजे) न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में पेश किया जागा. कोर्ट में उन पर नार्को-टेररिज्म समेत गंभीर आपराधिक आरोपों पर सुनवाई शुरू होगी.
लैटिन अमेरिका में बढ़ी बेचैनी
ट्रंप ने 4 दिसंबर को देर रात मीडिया से बातचीत में कहा कि वेनेजुएला को अपने तेल उद्योग को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोलना होगा. साथ ही ड्रग तस्करी पर कठोर कार्रवाई करनी होगी. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वेनेजुएला, अमेरिका के प्रयासों में बाधा डालता है, तो अगला कदम और भी कठोर हो सकता है.
ट्रंप की टिप्पणियों ने न सिर्फ वेनेजुएला, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका में बेचैनी बढ़ा दी है. उन्होंने कोलंबिया और मैक्सिको में भी सैन्य कार्रवाई की संभावना का जिक्र किया. वहीं क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को लेकर कहा कि वह अपने आप गिरने के करीब है.
गिरफ़्तारी पर वैश्विक चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस गिरफ्तारी को लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है. कई देशों ने एक मौजूदा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए खतरनाक मिसाल बताया है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे गंभीर चिंता का विषय कहा है. सुरक्षा परिषद इस मुद्दे पर आपात बैठक करने जा रही है. संभावना है कि चीन और रूस सुरक्षा परिषद में अमेरिका को घेरेंगे.
वॉशिंगटन में भी ट्रंप प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठ रहे हैं. विपक्षी डेमोक्रेट्स का कहना है कि वेनेजुएला नीति को लेकर उन्हें गुमराह किया गया. विदेश मंत्री मार्को रूबियो को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को इस ऑपरेशन पर सफाई देनी है.
वेनेजुएला में राजनीतिक अनिश्चितता
वेनेजुएला की राजधानी काराकास में 3 दिसंबर को एक विशेष सैन्य अभियान के दौरान राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया गया था. अमेरिका के इस कार्रवाई के बाद वेनेजुएला राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में प्रवेश कर गया है. हालांकि वहां की सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति बनाया है.
ट्रंप प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम को कानून की कार्रवाई बता रहा है. अमेरिकी प्रशासन कह रहा है कि यह 2020 में दाखिल अमेरिकी अभियोगों के तहत की गई गिरफ्तारी है. उन आरोपों में मादुरो पर अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क के साथ साजिश रचने, कोकीन शिपमेंट को सुरक्षित रास्ता देने और राज्य संसाधनों का इस्तेमाल करने जैसे आरोप शामिल हैं.
ट्रंप ने स्वीकारा, तेल भी कारण
ट्रंप ने खुद यह स्वीकार किया कि गिरफ्तारी के पीछे केवल कानूनी वजहें नहीं थीं. उन्होंने कहा कि अमेरिका में वेनेजुएलावासियों की बढ़ती आमद और दशकों पहले अमेरिकी तेल हितों के राष्ट्रीयकरण का फैसला भी इस कदम के पीछे कारक रहे हैं. एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा, ‘हम वह वापस ले रहे हैं जो उन्होंने हमसे चुराया था.’ उनका दावा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वेनेजुएला लौटेंगी और वहां के ढह चुके पेट्रोलियम सेक्टर को दोबारा खड़ा करेंगी.
काराकास में मादुरो समर्थित सरकार
काराकास में हालांकि सत्ता अभी भी मादुरो खेमे के हाथ में है. उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने खुद को अंतरिम नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने वाला बताते हुए कहा है कि मादुरो अब भी राष्ट्रपति हैं. उन्होंने ट्रंप के इस दावे को खारिज किया कि वे अमेरिका के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं. रोड्रिग्ज (वेनेजुएला की तेल मंत्री भी हैं) लंबे समय से मादुरो सरकार की सबसे प्रभावशाली और करीबी चेहरों में गिनी जाती रही हैं.
मादुरो पर आपराधिक संगठनों को संरक्षण का आरोप
अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, 63 वर्षीय मादुरो ने सिनालोआ कार्टेल और ट्रेन डे अरागुआ जैसे खतरनाक आपराधिक संगठनों को संरक्षण दिया है. हाल ही में अपडेट किए गए आरोपों में उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को भी शामिल किया गया है. इन पर अपहरण और हत्या के आदेश देने के आरोप हैं.
मादुरो और उनके समर्थक इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते रहे हैं. जबकि मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया लंबी खिंचने की संभावना ज्यादा है.
कभी वेनेजुएला सबसे अमीर देश
वेनेजुएला कभी लैटिन अमेरिका का सबसे समृद्ध देश हुआ करता था. वहीं वेनेजुएला बीते दो दशकों में आर्थिक तबाही और राजनीतिक संकट की मिसाल बन चुका है. देश की लगभग पांचवां आबादी पलायन कर चुकी है. ऐसे में मादुरो की गिरफ्तारी क्या बदलाव की शुरुआत बनेगी या एक नए अस्थिर अध्याय का रास्ता खोलेगी. यह सवाल अब पूरी दुनिया के सामने है.
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