बिहार में विपक्ष क्यों नहीं सुन रहा है सुप्रीम कोर्ट की बात, SIR पर जारी है सियासी घमासान

Authored By: सतीश झा

Published On: Monday, July 28, 2025

Last Updated On: Thursday, July 31, 2025

Bihar Political संकट गहराया, विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की बात क्यों की नजरअंदाज? SIR रिपोर्ट को लेकर सियासी घमासान चरम पर है.
Bihar Political संकट गहराया, विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की बात क्यों की नजरअंदाज? SIR रिपोर्ट को लेकर सियासी घमासान चरम पर है.

बिहार में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया इन दिनों सियासी बहस का केंद्र बन गई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) की स्पष्ट टिप्पणियों के बावजूद विपक्षी दलों ने अब भी इस प्रक्रिया पर गहरे संदेह जताए हैं. वहीं, न्यायपालिका का मानना है कि आधार कार्ड और EPIC (चुनावी फोटो पहचान पत्र) को दस्तावेजों की मान्य सूची से बाहर करना उचित नहीं है.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Thursday, July 31, 2025

सुप्रीम कोर्ट  ने सोमवार को बिहार (Bihar Political) में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की ओर से आधार और वोटर आईडी कार्ड (EPIC) को वैध दस्तावेजों के रूप में स्वीकार न करने पर कड़ी आपत्ति जताई. न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दुनिया का कोई भी दस्तावेज जाली हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उसे पूरी तरह खारिज कर दिया जाए. पीठ ने चुनाव आयोग के रवैये को “बहिष्कार की प्रवृत्ति” बताया और कहा कि इस प्रक्रिया में सामूहिक समावेशन का दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए, न कि सामूहिक बहिष्कार का।

विपक्ष का आरोप: मतदाता सूची में हेरफेर की साजिश

राजद (RJD) और कांग्रेस (Congress) समेत महागठबंधन के अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से सरकार अपने पक्ष के वोटरों का नाम जोड़ने और विपक्षी समर्थकों का नाम हटाने की कोशिश कर रही है. तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने हाल ही में विधानसभा में कहा था, “जब वोटर लिस्ट (Voter List) से नाम ही काट दिए जाएंगे, तो योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा? यह बहुत बड़ी साजिश है.”

आधार और EPIC की अनदेखी पर सवाल

ECI की पुनरीक्षण सूची में 11 वैकल्पिक दस्तावेजों का जिक्र किया गया है, लेकिन आधार कार्ड और EPIC को बाहर रखने पर अदालत ने नाराज़गी जताई। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की, “कल को आप कहेंगे कि 11 में से 11 दस्तावेज़ भी जाली हैं, तो फिर कोई भी नहीं बचेगा. हमें बहिष्कार की नहीं, समावेशन की सोच अपनानी चाहिए.”

आधार और EPIC पर क्यों आपत्ति?

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जब मतदाता पंजीकरण फॉर्म में आधार की मांग पहले से हो रही है, तब उसे सत्यापन के समय क्यों स्वीकार नहीं किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अगर इन दो प्रमुख पहचान पत्रों को खारिज किया जाता है, तो फिर कोई भी दस्तावेज सुरक्षित नहीं रहेगा.

चुनाव आयोग पर बढ़ा दबाव

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब चुनाव आयोग (ECI) पर भी दबाव है कि वह दस्तावेजों की सूची में सुधार करे और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाए. अदालत का रुख स्पष्ट है – किसी भी दस्तावेज को पूरी तरह अविश्वसनीय मान लेना उचित नहीं.

याचिकाकर्ताओं ने उठाए संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के सवाल

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को उन याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिनमें भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा 24 जून को जारी किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्देशों को चुनौती दी गई है. ये निर्देश आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर जारी किए गए थे.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कदम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता), 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), 325 और 326 (सार्वजनिक प्रतिनिधित्व में बराबरी) का उल्लंघन करता है. साथ ही, उन्होंने कहा कि यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में निर्धारित प्रक्रिया से भी भटकाव है.

हालांकि, चुनाव आयोग ने अपने निर्देश का पुरजोर बचाव किया है. आयोग ने कहा कि उसे यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत प्राप्त है, जिसके तहत वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है. सुनवाई के दौरान न्यायालय ने आयोग के निर्देशों और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों को गंभीरता से लिया और मामले की अगली सुनवाई की तिथि नियत की. यह मामला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों से जुड़ा होने के कारण अहम माना जा रहा है.

बिहार में SIR को लेकर उपजा विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद विपक्ष अपनी चिंता में अडिग है. अब देखना होगा कि चुनाव आयोग आगे क्या रुख अपनाता है और क्या आधार तथा EPIC को पुनः मान्य दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जाएगा या नहीं.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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