किसानों को लुभाने में लगी राजनीतिक पार्टियां, भाजपा के बाद अब राहुल ने चला ये दांव

Authored By: सतीश झा

Published On: Saturday, August 23, 2025

Last Updated On: Saturday, August 23, 2025

Vote Adhikar Yatra, किसानों को लुभाने की राजनीतिक पार्टियां.
Vote Adhikar Yatra, किसानों को लुभाने की राजनीतिक पार्टियां.

बिहार में खेती-किसानी से जुड़े लोगों को साधने की होड़ अब और तेज होती जा रही है. राजनीतिक दलों के लिए किसान वोटबैंक अहम माना जा रहा है, ऐसे में नेता लगातार किसानों के बीच पहुंचकर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. सबसे पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने बिहार का दौरा कर कई दौर की बैठकें कीं. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी किसान कल्याण योजनाओं पर जोर देते हुए बिहारवासियों को संबोधित किया और उन्हें योजनाओं के लाभ गिनाए.

Authored By: सतीश झा

Last Updated On: Saturday, August 23, 2025

अब कांग्रेस (Congress) नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) भी इस दौड़ में शामिल हो गए हैं. अपनी वोट अधिकार यात्रा (Vote Adhikar Yatra) के दौरान राहुल गांधी ने किसानों, खासकर मखाना उत्पादन से जुड़े लोगों से मेलजोल बढ़ाया. मखाना, जो बिहार की पहचान और प्रमुख कृषि उत्पाद है, को लेकर राहुल गांधी ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उन्हें समाधान का आश्वासन दिया.

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने सुबह कटिहार जिले के कुरसेला से अपनी वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत की. सुबह करीब आठ बजे उन्होंने कुरसेला स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को नमन किया. इसके बाद यात्रा को आगे बढ़ाया गया.

यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने मखाना किसानों से उनके खेतों में जाकर मुलाकात की. इस दौरान का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें राहुल गांधी खेत में उतरकर किसानों से बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं. वीडियो में उनके आसपास बड़ी संख्या में किसान मौजूद दिखाई दे रहे हैं.

इस मौके पर राहुल गांधी ने किसानों की समस्याएं सुनीं और उनसे उनकी फसलों और खेती-बाड़ी से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की. कांग्रेस की यह यात्रा राज्यभर में मतदाता अधिकारों और किसानों के मुद्दों को लेकर लोगों से संवाद स्थापित करने पर केंद्रित है.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में किसानों का समर्थन हासिल करना आगामी चुनावों (Bihar Assembly Election 2025) में जीत की कुंजी साबित हो सकता है. यही वजह है कि सभी बड़ी पार्टियां इस वर्ग को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहतीं.

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरणों के साथ-साथ कृषि की नीतियाँ भी उतनी ही अहम मानी जाती हैं. किसान संगठनों और पंचायत स्तर पर सक्रिय समूह चुनाव के समय किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में माहौल तैयार कर सकते हैं. यही कारण है कि बिहार में कोई भी पार्टी किसानों के हितों की अनदेखी नहीं कर सकती.

बिहार के किसान न केवल खाद्य उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, बल्कि वे चुनावी नतीजों को भी दिशा देने की क्षमता रखते हैं. राज्य की अधिकांश विधानसभा और लोकसभा सीटों पर ग्रामीण वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यही वजह है कि हर राजनीतिक दल किसानों को लुभाने के लिए कृषि ऋण माफी, मुफ्त बिजली, फसल बीमा और सिंचाई जैसी योजनाओं का वादा करता है. इतिहास गवाह है कि जब-जब किसानों की नाराज़गी बढ़ी, तब-तब सत्ता का पलड़ा बदल गया। किसानों के मुद्दे – चाहे धान-गेहूँ की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की मांग हो या बाढ़ और सूखे से होने वाले नुकसान का मुआवजा – हमेशा चुनावी बहस के केंद्र में रहे हैं.

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About the Author: सतीश झा
सतीश झा की लेखनी में समाज की जमीनी सच्चाई और प्रगतिशील दृष्टिकोण का मेल दिखाई देता है। बीते 20 वर्षों में राजनीति, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचारों के साथ-साथ राज्यों की खबरों पर व्यापक और गहन लेखन किया है। उनकी विशेषता समसामयिक विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना और पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाना है। राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्दों तक, उनकी गहन पकड़ और निष्पक्षता ने उन्हें पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है
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