Rise of Woman in Village Tourism : ग्रामीण पर्यटन क्षेत्र में स्त्रियां लिख रहीं सफलता की इबारत

Authored By: अंशु सिंह

Published On: Friday, October 24, 2025

Last Updated On: Friday, October 24, 2025

Rise of Woman in Village Tourism नई इबारत लिखती हुई, अपनी मेहनत और प्रतिभा से क्षेत्र को बदल रही हैं.
Rise of Woman in Village Tourism नई इबारत लिखती हुई, अपनी मेहनत और प्रतिभा से क्षेत्र को बदल रही हैं.

देश में ग्रामीण पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता में महिलाओं की बड़ी भूमिका देखी जा रही है. उनकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है. मध्यप्रदेश, उत्तरकाशी, असम, गोवा जैसे राज्यों की ग्रामीण महिलाएं होमस्टेज का सफलतापूर्वक संचालन कर रही हैं. इससे महिला सशक्तीकरण को नई दिशा भी मिली है.

Authored By: अंशु सिंह

Last Updated On: Friday, October 24, 2025

Rise of Woman in Village Tourism: मध्यप्रदेश के निवाड़ी जिले के ओरछा के लाडपुरा खास गांव की उमा पाठक ने साल 2021 में कोविड के दौरान ‘महुआ लेक व्यू’ होमस्टे शुरू किया था. इसमें उन्होंने करीब 11 लाख रुपये का निवेश किया था. धीमी शुरुआत के बाद भी वे निराश नहीं हुईं और आज महीने में एक से डेढ़ लाख रुपये कमा लेती हैं. अब तक 1700 से अधिक पर्यटकों की मेहमानवाजी का उन्हें अवसर मिला है. उमा का कहना है कि इन दिनों लोग भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने की बजाय शांत स्थान की तलाश कर रहे हैं, जहां सुकून से कुछ समय बिता सकें. होमस्टे में उन्हें घर जैसा वातावरण एवं भोजन मिलता है. निवाड़ी जिले की कमला कुशवाहा भी ‘कमला ग्रामस्टे’ नाम से एक होमस्टे का संचालन करती हैं. साल 2020 में इन्होंने अपना पहला होमस्टे खोला था. उसका इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिला कि धीरे-धीरे उन्होंने तीन और होमस्टे खोल दिए. आज इनके होमस्टे में दिल्ली एवं बेंगलुरु से आने वाले सैलानी बड़े आराम से रहते हैं. बताती हैं कमला, ‘ पर्यटन सीजन में महीने में एक लाख रुपये तक की कमाई हो जाती है. हमारा होमस्टे खेतों के बीच है. आसपास पेड़-पौधे हैं. फल-सब्जियां लगी हुई हैं. मेहमानों को भी हम ताजा फल-सब्जियों से बने भोजन परोसते हैं. उन्हें वे काफी पसंद करते हैं. ‘

सरकारी सब्सिडी का उठातीं लाभ

मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड सेफ टूरिज्म डेस्टिनेशन फॉर वूमन परियोजना के अंतर्गत महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाने में जुटा है. विशेषकर ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में उन्हें आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. इसके तहत ही लाडपुरा खास, राधापुर, देवगढ़ आदि गांवों की अनेक महिलाओं को पर्यटन सेवा, होम स्टे संचालन में प्रशिक्षित किया गया है. वे होम स्टे के अलावा पर्यटन सुविधा केंद्र का सफल संचालन कर रही हैं. राज्य के एक प्रमुख पर्यटक स्थल ओरछा के आसपास के गांवों की कई महिलाएं होम स्टे चलाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं. छिंदवाड़ा जिले के देवगढ़ की कविता दुर्वे बताती हैं, ‘हमारे आसपास कई महिलाएं सफल होमस्टे का संचालन कर रही हैं. जब मेरे पास भी बोर्ड की ओर से होमस्टे शुरू करने का प्रस्ताव आया और ये जानकारी मिली कि सब्सिडी के रूप में तीन लाख रूपये मिलेंगे, तो मैंने हामी भर दी. सरकार की ओर से मिली राशि से हमने सैलानियों के ठहरने के लिए एक पूरा कमरा तैयार किया है. साथ ही उनकी बुनियादी जरूरतों का इंतजाम भी किया गया है. अब पर्यटन सीजन का इंतजार करना है, जो सर्दियों में शुरू होता है. हमारे यहां जो भी सैलानी आएंगे, उन्हें हम मक्के एवं जवार की रोटी के साथ टमाटर की चटनी, उड़द की दाल और खेतों की ताजी सब्जी खिलाएंगे. इसके साथ ही वे आसपास की बावलियों, किलों, जलप्रपातों की सैर कर सकते हैं.‘

उत्तरकाशी के मथोली गांव में अनोखी पहल

मध्यप्रदेश की भांति उत्तरकाशी के पर्यटन विभाग के पास भी इस समय कुल 5331 होम स्टे पंजीकृत हैं, जिनमें से अधिकांश का संचालन ग्रामीण महिलाओं द्वारा किया जा रहा है. जिस क्षेत्र में पर्यटक अक्सर लोकप्रिय हर्षिल घाटी या मोरी-सांकरी की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं उत्तरकाशी जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक में बसे मथोली गांव में एक शांत क्रांति हो रही है. यहां की महिलाएं अपने अनोखे पहाड़ी गांव को एक उभरते पर्यटन स्थल में बदलकर सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमशीलता की एक नई कहानी लिख रही हैं. मथोली गांव इन दिनों ‘ब्वारी गांव’ के रूप में प्रसिद्ध हो चुका है. इस गांव की महिलाएं होमस्टे के माध्यम से पर्यटकों की मेहमानवाजी करने के साथ ही उन्हें ट्रेकिंग एवं विलेज टूर करा रही हैं. उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है. स्थानीय निवासी अनीता पंवार बताती हैं कि कैसे इस पहल ने गांव की अन्य महिलाओं को अपना होमस्टे खोलने के लिए प्रेरित किया है. वे कहती हैं, ‘महिलाएं अब पर्यटन का हिस्सा बनने और आय अर्जित करने के लिए आत्मविश्वास से आगे आ रही हैं. ‘ब्वारी गांव’ की सफलता के साथ मथोली न केवल पर्यटकों का, बल्कि महिलाओं के नेतृत्व में एक बेहतर, आत्मनिर्भर भविष्य का भी स्वागत कर रहा है.‘

सारी गांव की महिलाएं भी नहीं हैं पीछे

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में राज्य सरकार के होमस्टे कार्यक्रम के अंतर्गत 227 पंजीकृत होमस्टे हैं. यहां के कुल 679 गांवों में से एक है सारी गांव, जहां होमस्टे कार्यक्रम के अंतर्गत 29 पंजीकृत होमस्टे हैं. होमस्टे से होने वाला आय यहां के ग्रामीणों के आय के प्रमुख स्रोतों में से एक है. दिलचस्प ये है कि अधिकांश होमस्टे का प्रबंधन और संचालन उस विशेष घर की प्रभारी महिला द्वारा किया जाता है. पुरुष आमतौर पर कृषि कार्यों में व्यस्त रहते हैं या अपनी आजीविका के लिए शहरों में काम करते हैं. महिलाएं ही सभी जिम्मेदारियां संभालती हैं, जिनमें रहने की व्यवस्था, भोजन उपलब्ध कराना, आतिथ्य सत्कार करना और पारंपरिक कार्यक्रम प्रस्तुत करना शामिल है. समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से देखें, तो यह सारी गांव के सामाजिक-सांस्कृतिक स्वरूप में एक क्रांतिकारी परिवर्तन की शुरुआत है. होमस्टे उद्योग में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी न सिर्फ उनकी सफलता और मूल्यवर्धन में योगदान देती है, बल्कि उनका विनम्र और प्रेमपूर्ण व्यवहार पर्यटकों को होमस्टे में ठहरने के लिए आकर्षित करता है.

गोवा का तलदे गांव बना मिसाल

गोवा के सैनकॉर्डम स्थित तलदे गांव की महिलाओं ने एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से पूरे भारत के लिए एक अनुकरणीय मॉडल तैयार किया है. ‘जंगल ट्रेल्स’ नामक होमस्टे ने इस सुदूर गांव को उन पर्यटकों के बीच एक पसंदीदा जगह बना दिया है, जो इस जगह के शानदार पक्षी-दर्शन अनुभव से परिचित हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्राह्मणी स्वयं सहायता समूह की 14 महिलाएं इस होमस्टे का संचालन करती हैं. उनमें से ज़्यादातर ने कभी नहीं सोचा था कि वे आतिथ्य क्षेत्र का हिस्सा बनेंगी. होमस्टे चलाने वाली महिलाओं में से एक, मनीषा गांवकर बताती हैं कि वे सभी 14 सदस्य घर के काम के बाद खाली समय का सदुपयोग करने के लिए अपनी ड्यूटी बारी-बारी से करती हैं. रिकॉर्ड रखती हैं कि कौन कब ड्यूटी पर था और फिर मुनाफा आपस में बांट लेती हैं. समूह की एक अन्य सदस्य सुरेखा गांवकर ने बताया कि उनके पति मुख्यतः दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं. लेकिन उन्होंने अपने जीवन में एक दिन भी घर से बाहर काम नहीं किया था. यहां उन्हें गोवा के मिनरल फाउंडेशन द्वारा एक कमरा तैयार करने और मेहमानों को परोसने का प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया गया. अब उन्हें मेहमानों से बहुत प्रशंसा मिलती है. फाउंडेशन की इस परियोजना को गोवा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की स्त्री शक्ति पहल का समर्थन प्राप्त है. यह परियोजना ग्रामीण परिवेश में आरामदायक प्रवास प्रदान करती है और प्रकृति आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देती है, जिसमें नेचर वॉक, ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग, तितली दर्शन, जीव-जंतुओं की खोज शामिल है. विशेषज्ञ प्रकृतिवादी एवं स्थानीय गाइड इसमें मदद करते हैं.

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About the Author: अंशु सिंह
अंशु सिंह पिछले बीस वर्षों से हिंदी पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं। उनका कार्यकाल देश के प्रमुख समाचार पत्र दैनिक जागरण और अन्य राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में प्रेरणादायक लेखन और संपादकीय योगदान के लिए उल्लेखनीय है। उन्होंने शिक्षा एवं करियर, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक मुद्दों, संस्कृति, प्रौद्योगिकी, यात्रा एवं पर्यटन, जीवनशैली और मनोरंजन जैसे विषयों पर कई प्रभावशाली लेख लिखे हैं। उनकी लेखनी में गहरी सामाजिक समझ और प्रगतिशील दृष्टिकोण की झलक मिलती है, जो पाठकों को न केवल जानकारी बल्कि प्रेरणा भी प्रदान करती है। उनके द्वारा लिखे गए सैकड़ों आलेख पाठकों के बीच गहरी छाप छोड़ चुके हैं।
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