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डॉक्टरों का बड़ा खुलासा… युवाओं में तेजी से फैल रही ये बीमारी, जानें वजह और बचाव
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, July 25, 2026
Last Updated On: Saturday, July 25, 2026
भारत में पिछले एक साल के दौरान नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है. डॉक्टरों के अनुसार 25 से 40 वर्ष के युवाओं में यह समस्या सबसे ज्यादा दिख रही है. खराब खानपान, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और प्रोसेस्ड फूड इसकी बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, July 25, 2026
Disease Spreading Among Youth: भारत में पिछले एक साल के दौरान डॉक्टरों ने जिस बीमारी के सबसे अधिक मामले देखे हैं, वह है नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD). यह ऐसी स्थिति है, जिसमें शराब का सेवन न करने वाले लोगों के लिवर में भी जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है. पहले इसे बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता था, लेकिन अब 25 से 40 वर्ष के युवाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इलाज और जीवनशैली में बदलाव नहीं किया गया, तो यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है.
हर तीसरा भारतीय हो सकता है प्रभावित
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के अनुसार, देश की करीब 38 प्रतिशत आबादी फैटी लिवर की समस्या से प्रभावित है. सबसे अधिक मामले युवा वर्ग में सामने आ रहे हैं. चिंता की बात यह है कि यह बीमारी टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और भविष्य में लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकती है.
डॉक्टरों ने बताई बढ़ते मामलों की वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ओपीडी में फैटी लिवर के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा रही है. डॉक्टरों का कहना है कि 8 से 10 घंटे तक लगातार बैठकर काम करना, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, नियमित व्यायाम न करना और बढ़ता मोटापा इसके प्रमुख कारण हैं. कई मरीज शराब का सेवन नहीं करते, फिर भी उनकी जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हो रही है.
शुरुआती लक्षण नहीं आते नजर
फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण बेहद सामान्य या लगभग न के बराबर होते हैं. इसी वजह से इसे कई विशेषज्ञ ‘साइलेंट किलर’ भी मानते हैं. जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक कई मामलों में लिवर पर असर बढ़ चुका होता है. यदि इसे अनदेखा किया जाए, तो यह आगे चलकर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थिति का रूप ले सकती है.
किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?
फैटी लिवर का जोखिम उन लोगों में अधिक देखा जा रहा है जो लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि नहीं करते, मोटापे से जूझ रहे हैं, अनियमित खानपान अपनाते हैं या पहले से डायबिटीज और मेटाबॉलिक समस्याओं से ग्रस्त हैं. हालांकि अब सामान्य वजन वाले लोगों में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है.
ऐसे करें बचाव
डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी बात यह है कि शुरुआती अवस्था में फैटी लिवर को जीवनशैली में सुधार करके काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. इसके लिए रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम, संतुलित भोजन, रिफाइंड शुगर और अधिक सैचुरेटेड फैट से दूरी, वजन नियंत्रित रखना और फास्ट फूड का सीमित सेवन जरूरी है. नियमित स्वास्थ्य जांच भी इस बीमारी की समय पर पहचान और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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