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टीम इंडिया की फिटनेस पर BCCI का नया शिकंजा, अब 2 किमी दौड़ के साथ ब्रॉन्को टेस्ट भी होगा जरूरी
Authored By: Nishant Singh
Published On: Friday, August 7, 2026
Last Updated On: Friday, August 7, 2026
BCCI New Fitness Test Rule: बीसीसीआई ने टीम इंडिया के खिलाड़ियों के लिए फिटनेस टेस्ट के नियम सख्त कर दिए हैं. अब खिलाड़ियों को ब्रॉन्को टेस्ट के साथ 2 किलोमीटर की दौड़ भी पूरी करनी होगी. 2 किमी दौड़ के लिए 10 मिनट की सीमा तय है, जबकि ब्रॉन्को टेस्ट का समय भी घटाकर करीब 5 मिनट 15 सेकेंड किया गया है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Friday, August 7, 2026
BCCI New Fitness Test Rule: भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बीसीसीआई ने अपने मानक और कड़े कर दिए हैं. अब टीम में जगह बनाए रखने के लिए खिलाड़ियों को मैदान पर प्रदर्शन के साथ अपनी शारीरिक क्षमता भी साबित करनी होगी. नए नियमों के तहत फिटनेस टेस्ट दो हिस्सों में होगा, जिसमें ब्रॉन्को टेस्ट के साथ 2 किलोमीटर की दौड़ भी शामिल की गई है.
2 किलोमीटर की दौड़ होगी बड़ा इम्तिहान
नए फिटनेस टेस्ट में खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर की दौड़ निर्धारित समय के भीतर पूरी करनी होगी. सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से इसके लिए करीब 9 से 10 मिनट की समय सीमा तय की गई है. यानी खिलाड़ियों को अधिकतम 10 मिनट में 2 किलोमीटर की दूरी पूरी करनी होगी. यह टेस्ट खिलाड़ियों की रफ्तार के साथ उनकी सहनशक्ति को भी परखेगा.
ब्रॉन्को टेस्ट भी हुआ पहले से मुश्किल
सिर्फ दौड़ ही नहीं, खिलाड़ियों को ब्रॉन्को टेस्ट में भी बेहतर प्रदर्शन करना होगा. इस टेस्ट में 60 मीटर तक की दूरी पर बनाए गए अलग-अलग मार्क के बीच शटल रन कराया जाता है. पांच सेट में कुल 1200 मीटर की दूरी बिना आराम के पूरी करनी होती है.
पहले इस टेस्ट के लिए लगभग 6 मिनट का समय दिया जाता था, लेकिन अब समय सीमा घटाकर करीब 5 मिनट 15 सेकेंड से 5 मिनट 20 सेकेंड कर दी गई है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ब्रॉन्को टेस्ट पूरा करने के तुरंत बाद खिलाड़ी को 2 किलोमीटर की दौड़ भी लगानी होगी.
फिटनेस को लेकर क्यों बदला नियम?
बीसीसीआई का यह सख्त रवैया भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन और खिलाड़ियों की फिटनेस से जुड़ी चिंताओं के बीच सामने आया है. इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय खिलाड़ियों की फील्डिंग में फिटनेस से जुड़ी कमियां नजर आई थीं. कैच छूटने और मैदान पर चुस्ती की कमी ने भी सवाल खड़े किए थे.
इसके अलावा कुछ खिलाड़ियों के फिटनेस क्लियरेंस को लेकर भी सवाल उठे थे. रिपोर्टों में दावा किया गया कि कुछ खिलाड़ियों को पूरी तरह फिट नहीं होने के बावजूद फिटनेस पास कर दिया गया. ऐसे में बोर्ड अब टेस्ट प्रक्रिया को अधिक सख्त और एक समान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
खिलाड़ियों के लिए साफ संदेश
नए नियमों का सीधा मतलब है कि अब भारतीय क्रिकेटरों को अपनी फिटनेस को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतनी होगी. तेज गेंदबाजों से लेकर बल्लेबाजों और ऑलराउंडरों तक, सभी को अपनी शारीरिक क्षमता के तय मानकों पर खरा उतरना होगा. खासकर उन खिलाड़ियों पर नजर रहेगी जिनका वजन या फिटनेस लंबे समय से चर्चा में रहा है.
चोट से बचाव पर भी रहेगा जोर
फिटनेस टेस्ट को कठिन बनाने का एक उद्देश्य खिलाड़ियों को लंबे समय तक मैदान पर फिट रखना भी माना जा रहा है. लगातार क्रिकेट खेलने के कारण खिलाड़ियों पर काफी शारीरिक दबाव रहता है. ऐसे में बेहतर फिटनेस से चोट की आशंका कम करने और मैच के दौरान प्रदर्शन बेहतर रखने में मदद मिल सकती है.
बीसीसीआई के नए नियमों से साफ है कि टीम इंडिया में चयन केवल प्रतिभा और प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा. अब मैदान पर जगह बनाने के लिए खिलाड़ी को फिटनेस की कसौटी पर भी पूरी तरह खरा उतरना होगा.















