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बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण में 122 सीटों पर जंग, नीतीश-तेजस्वी की किस्मत दांव पर. जानिए कहां-कहां बजेगा वोटों का बिगुल
Authored By: Nishant Singh
Published On: Saturday, November 8, 2025
Last Updated On: Saturday, November 8, 2025
बिहार चुनाव 2025 का दूसरा चरण अब तय करेगा कि नीतीश कुमार की सत्ता बचेगी या तेजस्वी यादव की लहर चलेगी. 11 नवंबर को 18 जिलों की 122 सीटों पर होगी वोटिंग, जहां सीमांचल से लेकर मिथिलांचल तक सियासी तापमान चरम पर है. बीजेपी, आरजेडी, कांग्रेस और ओवैसी all in. अब असली जंग शुरू - जानिए किन जिलों में बजेगा वोटों का बिगुल.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Saturday, November 8, 2025
Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है. पहले चरण की हलचल के बाद अब दूसरा चरण तय करेगा कि किसकी होगी सत्ता की चाबी? नीतीश कुमार की सियासी पकड़ बनी रहेगी या तेजस्वी यादव सत्ता की नई कहानी लिखेंगे? 11 नवंबर को 18 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां 1302 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी. चुनावी मैदान अब पूरी तरह गर्म है- कहीं मोदी का नाम चल रहा है, तो कहीं तेजस्वी का “परिवर्तन” नारा.
दूसरे चरण का दायरा: 18 जिलों की 122 सीटें
दूसरे चरण में बिहार के 18 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा. इस बार का चुनावी नक्शा सीमांचल से लेकर मिथिलांचल और चंपारण बेल्ट तक फैला है.
- गया की 10 सीटें: बेलागंज, बोधगया, शेरघाटी से लेकर वजीरगंज तक.
- कैमूर की 4 सीटें: चैनपुर, मोहनिया, भभुआ, रामगढ़.
- रोहतास की 7 सीटें, औरंगाबाद की 6, अरवल की 2, जहानाबाद की 3, नवादा की 5 सीटें शामिल हैं.
- भागलपुर की 7, बांका की 5, जमुई की 4 सीटों पर भी वोटिंग होगी.
- इसके साथ सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, सुपौल, पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज जैसे सीमांचल और मिथिलांचल जिलों की 55 सीटें भी इस फेज का हिस्सा हैं.
- वहीं पूर्वी और पश्चिमी चंपारण की 21 सीटें भी इस चरण में अपनी भूमिका निभाएंगी.
NDA बनाम महागठबंधन: प्रतिष्ठा की लड़ाई
इस चरण में मुकाबला बेहद रोचक है. NDA के लिए यह असली परीक्षा का वक्त है. 2020 के चुनाव में BJP और JDU ने मिलकर इस फेज की 62 सीटें जीती थीं, लेकिन अब गठबंधन में सियासी समीकरण बदल चुके हैं.
- नीतीश कुमार को अपनी छवि और पुराने वोट बैंक को बचाए रखने की चुनौती है.
- BJP के लिए चंपारण और गया जैसे इलाके “लाइफलाइन” हैं, जहां हार पार्टी के मनोबल पर भारी असर डाल सकती है.
- वहीं महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) के लिए यह फेज उम्मीद की किरण है. 2020 में इन इलाकों में RJD ने शानदार प्रदर्शन किया था. तेजस्वी यादव का फोकस रोजगार, भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था पर है, यानी सीधे नीतीश सरकार की नीतियों पर प्रहार.
ओवैसी का सीमांचल दांव
2020 में सीमांचल में AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी ने जिस तरह पांच सीटें जीतकर सबको चौंकाया था, इस बार भी उनकी नजर 19 मुस्लिम बहुल सीटों पर है. पूर्णिया, अररिया, कटिहार और किशनगंज में मुस्लिम मतदाता 30% से अधिक हैं.
यह क्षेत्र इस बार “किंगमेकर” साबित हो सकता है. हालांकि, RJD और कांग्रेस ने भी यहां अपनी रणनीति बदल दी है और स्थानीय मुद्दों- बाढ़, शिक्षा, और बेरोजगारी पर ज्यादा फोकस किया है.
कौन से उम्मीदवार बने चर्चा का विषय?
इस फेज में कई हाई-प्रोफाइल उम्मीदवारों का भाग्य दांव पर है.
- गया से पूर्व मंत्री प्रेम कुमार,
- कटिहार से तारीक अनवर,
- जमुई से श्रेयसी सिंह,
- पूर्णिया से बिवेकानंद पाठक,
और अररिया से महागठबंधन के मोहम्मद अब्दुल सत्तार जैसे चेहरे चर्चा में हैं.
इन सीटों पर स्थानीय जातीय समीकरण और युवाओं का मूड दोनों ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे.
चुनावी माहौल और प्रचार का रंग
बिहार के मैदानों में इस वक्त रैलियों का शोर और नारेबाज़ी की गूंज है.
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और अमित शाह ने कई बड़ी सभाएं की हैं, जिनमें केंद्र की योजनाओं और विकास कार्यों को मुद्दा बनाया गया है.
- वहीं तेजस्वी यादव, प्रियंका गांधी और कन्हैया कुमार बेरोजगारी और किसान संकट पर जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं.
- सीमांचल में AIMIM के कार्यकर्ता “अपनी सरकार, अपना हक़” के नारे के साथ प्रचार कर रहे हैं.
प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा
11 नवंबर को होने वाली वोटिंग के लिए चुनाव आयोग ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है.
- 1.2 लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे.
- संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर पैरामिलिट्री फोर्स की निगरानी होगी.
- सीमांचल और चंपारण बेल्ट में सीमाओं को सील कर दिया गया है ताकि किसी बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके.
इसके अलावा दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष मतदान सुविधाएं भी दी गई हैं.
नतीजों की दिशा क्या बताएगी?
पहले चरण के रुझानों ने यह संकेत दे दिया है कि मुकाबला बेहद करीबी है. दूसरे चरण के नतीजे यह तय करेंगे कि हवा किस दिशा में बह रही है. अगर RJD ने सीमांचल और मिथिलांचल में बढ़त बनाई, तो नीतीश की राह मुश्किल होगी. वहीं NDA ने अगर चंपारण और गया बेल्ट में पकड़ मजबूत रखी, तो सत्ता में वापसी संभव है.
बिहार की जनता करेगी फैसला
अब गेंद जनता के पाले में है. 11 नवंबर को जब वोट पड़ेंगे, तो सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि बिहार की दिशा का फैसला होगा. नीतीश के “विकास मॉडल” और तेजस्वी के “परिवर्तन वादे” में से कौन भारी पड़ेगा- यह नतीजे ही बताएंगे. लेकिन इतना तय है कि इस बार बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर है, जहां हर वोट की कीमत है और हर आवाज़ सत्ता की तस्वीर बदल सकती है.
कुल मिलाकर, बिहार चुनाव का दूसरा चरण सिर्फ सीटों की जंग नहीं, बल्कि सियासी भविष्य का इम्तिहान है – नीतीश बनाम तेजस्वी, सीमांचल बनाम चंपारण, और जनता बनाम वादों की राजनीति.
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