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IndiGo के मालिक कौन हैं? दो दोस्तों की वो उड़ान जो उधारी के विमानों से शुरू होकर आसमान की बादशाह बन गई
Authored By: Nishant Singh
Published On: Tuesday, December 9, 2025
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
भारत की नंबर-1 एयरलाइन इंडिगो आज भले संकट में फंसी हो, लेकिन इसकी शुरुआत एक रोमांचक कहानी से होती है दो दोस्तों ने मिलकर बिना एक भी विमान के सपना देखा, एयरबस से उधारी पर जहाज़ लिए और 2006 में आसमान में उड़ान भरी. आज हज़ारों फ्लाइट रद्द होने और भारी नुकसान के बीच इंडिगो फिर एक बड़े मोड़ पर खड़ी है, जहां इसका भविष्य कसौटी पर है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Tuesday, December 9, 2025
आज जब इंडिगो (IndiGo) एयरलाइंस भारी संकट से गुजर रही है और हजारों यात्री रोज़ाना देरी, कैंसिलेशन और अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं, तब एक सवाल बार – बार उठता है आखिर भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन की नींव किसने रखी थी? 2006 में एक छोटे से सपने से शुरू हुई ये एयरलाइन कैसे देश की नंबर-1 फ्लाइट कंपनी बनी, और आज किस मुश्किल दौर से जूझ रही है, इसी कहानी को समझते हैं विस्तार से.
दो दोस्तों का सपना: जहां सोच बड़ी थी और हौसला उससे भी बड़ा
इंडिगो की शुरुआत किसी कॉर्पोरेट हाउस ने नहीं, बल्कि दो दोस्तों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने मिलकर की थी. दोनों की दोस्ती और उनकी सोच ने भारतीय एविएशन सेक्टर का चेहरा बदल दिया. राहुल भाटिया कनाडा की University of Waterloo से पढ़े हुए थे और कई इंटरनेशनल कंपनियों के साथ काम कर चुके थे. वहीं राकेश गंगवाल, IIT कानपुर के छात्र, वैश्विक एविएशन इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम रहे हैं. साल 2004 में दोनों ने मिलकर एक ऐसा कदम उठाया, जिसने आगे चलकर भारतीय इतिहास में जगह बनाई, उन्होंने InterGlobe Aviation की स्थापना की, जो आगे चलकर IndiGo Airlines की पेरेंट कंपनी बनी.
जब विमान भी नहीं थे – उधारी ने दी आसमान की पहली चाबी
इंडिगो की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कंपनी के पास लाइसेंस था, प्लान था, टीम थी, लेकिन विमान एक भी नहीं था. देश का एविएशन सेक्टर पहले से ही उथल-पुथल में था, ऐसी स्थिति में नया बिज़नेस शुरू करना जोखिम से भरा था. दो साल तक कंपनी के पास ऑपरेशन शुरू करने का साधन ही नहीं था. तभी काम आए राकेश गंगवाल के अंतरराष्ट्रीय संपर्क. उनके एविएशन नेटवर्क की वजह से एयरबस ने उधारी पर 100 विमान उपलब्ध कराए, जो उस समय किसी भी नई एयरलाइन के लिए अद्भुत बात थी. और फिर आया ऐतिहासिक दिन 4 अगस्त 2006, जब इंडिगो ने अपनी पहली उड़ान भरकर भारतीय आसमान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई. धीरे–धीरे यह कम किराये, समय की पाबंदी और आरामदायक सफर का पर्याय बन गई.
शेयर बाजार तक की उड़ान: नाम और काम दोनों ने पकड़ी रफ्तार
इंडिगो की बढ़त लगातार जारी रही और 2015 में इसकी पेरेंट कंपनी इंटरग्लोब एविएशन भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो गई. बड़ी बात यह है कि कंपनी का मॉडल इतना मजबूत रहा कि यह जल्दी ही देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन बनकर उभरी. आज कंपनी में को-फाउंडर राहुल भाटिया नेतृत्व कर रहे हैं. हालांकि शेयरहोल्डिंग की बात करें तो भाटिया के पास कंपनी का लगभग 0.01% हिस्सा है, जबकि दिवंगत राकेश गंगवाल के परिवार के पास 4.53% हिस्सेदारी बताई जाती है.
आज का बड़ा सवाल – IndiGo संकट में क्यों है?
पिछले कुछ समय से इंडिगो बड़ी परेशानी में है. लगातार सात दिनों से उड़ानें सामान्य रूप से नहीं चल पा रही हैं, हजारों यात्री हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं, और सिर्फ एक सोमवार को ही करीब 450 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ीं.
फ्लाइट्स में देरी और कैंसिलेशन के पीछे दो मुख्य कारण सामने आए-
- नई FDTL (Flight Duty Time Limit) नीति, जिसमें पायलटों को ज्यादा आराम देने का नियम लागू हुआ
- पायलट और क्रू की भारी कमी, जिससे ऑपरेशन बाधित हो रहे हैं
कंपनी को पिछले सात दिनों में ही टिकटों के रिफंड के रूप में करीब 610 करोड़ रुपये लौटाने पड़े हैं, जो इस संकट की गंभीरता को दिखाता है.
शेयर भी गोता लगा रहे हैं – मार्केट कैप में भारी गिरावट
संकट का असर केवल यात्रियों पर ही नहीं, बल्कि कंपनी के शेयरों पर भी दिखाई दे रहा है. इंटरग्लोब एविएशन के शेयर हाल ही में 9% तक टूट गए, और कंपनी का मार्केट कैप घटकर 1.89 लाख करोड़ रुपये पर आ गया. इस माहौल में निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जैसे इंडिगो ने पहले भी कई उतार–चढ़ाव देखे हैं, यह संकट भी समय के साथ संतुलित हो सकता है.
संस्थापकों की दौलत: सपनों की उड़ान का इनाम
फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर इंडेक्स की मानें तो
- राहुल भाटिया की कुल संपत्ति लगभग 8.1 अरब डॉलर है
- जबकि राकेश गंगवाल की नेटवर्थ करीब 5.8 अरब डॉलर आंकी जाती है
ये आंकड़े बताते हैं कि इंडिगो का सफर केवल व्यवसायिक सफलता नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और साहस की मिसाल है.
निष्कर्ष: उधारी से शुरू हुई कहानी आज कसौटी पर खड़ी
इंडिगो की शुरुआत भले उधार के विमानों से हुई हो, लेकिन उसकी उड़ान मेहताब की तरह चमकी. आज जब कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही है, तब भी उसकी बुनियाद दो दोस्तों का विज़न, भरोसा और आत्मविश्वास इस ब्रांड को फिर से पटरी पर ला सकता है. भारतीय एविएशन की कहानी अगर किसी ने बदली है, तो वह है इंडिगो, जिसने साबित किया कि सपने बड़े हों तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है.
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