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Makar Sankranti 2026: 23 साल बाद एकादशी का दुर्लभ संयोग, जानें पुण्यकाल और शुभ मुहूर्त
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, January 7, 2026
Last Updated On: Wednesday, January 7, 2026
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति 2026 इस बार साधारण नहीं, बल्कि आस्था और पुण्य का दुर्लभ संगम लेकर आई है. 23 साल बाद एकादशी और मकर संक्रांति का विशेष संयोग बन रहा है, जिसने इस पर्व का महत्व कई गुना बढ़ा दिया है. सूर्य के उत्तरायण होने, शुभ योगों के निर्माण और पुण्यकाल के कारण यह दिन स्नान, दान और पूजा के लिए अत्यंत फलदायी माना जा रहा है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Wednesday, January 7, 2026
Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का ऐसा पर्व है, जो केवल एक त्योहार नहीं बल्कि प्रकृति, खगोल और आस्था का सुंदर संगम माना जाता है. साल 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी, लेकिन इस बार इसकी विशेषता इसे और भी खास बना रही है. करीब 23 साल बाद मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इससे पहले ऐसा योग वर्ष 2003 में देखने को मिला था. ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार जब संक्रांति और एकादशी जैसे पुण्य पर्व एक साथ आते हैं, तो पूजा, स्नान और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसी कारण इस वर्ष की मकर संक्रांति को अत्यंत फलदायी माना जा रहा है.
सूर्य का मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण का आरंभ
मकर संक्रांति का मूल आधार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश है. 14 जनवरी 2026 को सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे और इसी के साथ उत्तरायण काल की शुरुआत होगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण का समय देवताओं का दिन माना जाता है. कहा जाता है कि इस काल में किए गए शुभ कर्म, पूजा-पाठ और दान का प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. यही कारण है कि मकर संक्रांति को आत्मशुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और नए आरंभ का पर्व माना जाता है.
23 साल बाद षटतिला एकादशी का संयोग
इस वर्ष मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी भी पड़ रही है. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और षटतिला एकादशी विशेष रूप से तिल के महत्व को दर्शाती है. मान्यता है कि इस दिन तिल से स्नान, तिल का दान और तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों का नाश होता है. जब यही एकादशी मकर संक्रांति जैसे बड़े पर्व के साथ आती है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है. यह संयोग साधकों और श्रद्धालुओं के लिए दुर्लभ अवसर माना जा रहा है.
मकर संक्रांति पर बन रहे हैं दो बड़े शुभ योग
मकर संक्रांति 2026 को केवल एकादशी का संयोग ही नहीं, बल्कि दो विशेष शुभ योग भी बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिष में इन योगों को अत्यंत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इन योगों में किया गया दान, जप, तप और पूजा सफल होती है और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त करती है. खासकर आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक शांति से जुड़े कार्यों के लिए यह दिन बेहद शुभ माना जा रहा है.
मकर संक्रांति 2026 के शुभ मुहूर्त
मकर संक्रांति के दिन शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. इस वर्ष पुण्यकाल 14 जनवरी को शाम 03:04 बजे से शाम 05:57 बजे तक रहेगा. वहीं महापुण्यकाल शाम 03:04 बजे से शाम 03:28 बजे तक माना गया है. स्नान और दान के लिए सुबह 09:03 बजे से सुबह 10:48 बजे तक का समय श्रेष्ठ बताया गया है. मान्यता है कि इन मुहूर्तों में किया गया स्नान और दान विशेष फल प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है.
मकर संक्रांति के शुभ मुहूर्त
- पुण्यकाल: 14 जनवरी को शाम 03:04 बजे से शाम 05:57 बजे तक.
- महापुण्यकाल: शामम 03:04 बजे से शाम 03:28 बजे तक.
- स्नान-दान का मुहूर्त: सुबह 09.03 बजे से सुबह 10.48 बजे तक.
मकर संक्रांति की सरल और प्रभावी पूजन विधि
मकर संक्रांति के दिन पूजा विधि को सरल लेकिन श्रद्धा से पूर्ण माना गया है. सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है. यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में तिल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. इसके बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल अर्पित करें, जिसमें लाल फूल, तिल और अक्षत मिलाएं. “ॐ सूर्याय नमः” या “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें. चूंकि इस दिन एकादशी भी है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें और उन्हें तिल से बने व्यंजन तथा फल अर्पित करें.
मकर संक्रांति पर दान का आध्यात्मिक महत्व
दान के बिना मकर संक्रांति अधूरी मानी जाती है. षटतिला एकादशी के संयोग में आई इस मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, अन्न, वस्त्र और धन का दान विशेष फलदायी माना गया है. मान्यता है कि तिल और गुड़ का दान करने से शनि दोष शांत होता है और जीवन में स्थिरता आती है. इसके अलावा फल, साग-सब्जी और घी का दान भी पुण्यकारी माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान न केवल इस जीवन में बल्कि आने वाले समय में भी शुभ फल देता है.
निष्कर्ष: आस्था, दान और साधना का अद्भुत संगम
मकर संक्रांति 2026 केवल एक पर्व नहीं, बल्कि 23 साल बाद बने दुर्लभ संयोगों का साक्षी बनने का अवसर है. सूर्य का उत्तरायण होना, षटतिला एकादशी और शुभ योगों का मेल इस दिन को अत्यंत पवित्र बना रहा है. यदि श्रद्धा, सही मुहूर्त और सच्चे मन से पूजा, स्नान और दान किया जाए, तो यह पर्व जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आ सकता है.
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