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ईरान संकट की आग में ट्रंप का टैरिफ बम: चीन ने क्यों दी कड़ी प्रतिक्रिया
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Published On: Tuesday, January 13, 2026
Last Updated On: Tuesday, January 13, 2026
ईरान आज भीतर से उबल रहा है और बाहर से दबाव झेल रहा है. विरोध प्रदर्शनों का कोई स्पष्ट नेतृत्व नहीं होने के बावजूद असंतोष व्यापक है. दूसरी ओर, ट्रंप की टैरिफ और सैन्य धमकियां इस संकट को सिर्फ द्विपक्षीय नहीं, बल्कि वैश्विक बना रही हैं.
Authored By: गुंजन शांडिल्य
Last Updated On: Tuesday, January 13, 2026
Trump’s Tariff Bomb: तेहरान एक बार फिर इतिहास के सबसे नाज़ुक मोड़ पर खड़ा है. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली बार ऐसा लग रहा है कि ईरान की सत्ता को भीतर से इतनी व्यापक और हिंसक चुनौती मिल रही हो. देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों पर जिस तरह की जानलेवा कार्रवाई सामने आई है, उसने न सिर्फ ईरानी शासन को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि वैश्विक राजनीति को भी उथल-पुथल में डाल दिया है.
इसी उथल-पुथल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा ऐलान कर दिया जिसने हालात को और विस्फोटक बना दिया. ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका को अपने निर्यात पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ देना होगा. यह चेतावनी न केवल तेहरान के लिए बल्कि उन तमाम देशों के लिए भी है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान से व्यापार कर रहे हैं.
क्या कहा ट्रंप ने?
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में कहा, ‘यह आदेश अंतिम और निर्णायक है.’ हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह टैरिफ किस कानूनी प्रावधान के तहत लगाया जाएगा. या क्या यह ईरान के सभी व्यापारिक साझेदारों पर समान रूप से लागू होगा. व्हाइट हाउस की चुप्पी ने अनिश्चितता को और गहरा कर दिया.
ट्रंप की धमकी और कूटनीति साथ-साथ
दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप सैन्य कार्रवाई और टैरिफ जैसी धमकियां साथ-साथ दे रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कहा है कि कूटनीति उनका पहला विकल्प है. व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के मुताबिक, ‘प्रशासन को ईरानी नेतृत्व से निजी तौर पर ऐसे संदेश मिल रहे हैं, जो सार्वजनिक बयानों से बिल्कुल अलग हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने भी स्वीकार किया कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत चल रही है. हालांकि उन्होंने अमेरिकी धमकियों को ‘असंगत’ बताया और कहा कि तेहरान प्रस्तावों का अध्ययन कर रहा है.
टैरिफ धमकी पर ईरान के साझेदारों में बेचैनी
ट्रंप की टैरिफ चेतावनी का असर ईरान से कहीं आगे तक जाता है. ईरान पर पहले से ही कई कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते सीमित बाज़ारों तक सिमटा हुआ है. ईरान का अधिकांश तेल चीन खरीदता है. चीन के अलावा तुर्की, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और भारत उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं.
चीन ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
सबसे तीखी प्रतिक्रिया चीन की ओर से आई. वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने ट्रंप के कदम को ‘अवैध और एकतरफा प्रतिबंध’ बताया है. अपनी कड़ी प्रतिक्रिया में चीन ने कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा. ऐसा करने से उसे कोई कानून रोकता भी नहीं है. बीजिंग ने साफ संकेत दिया कि वह अमेरिका के इस तरह के क्षेत्राधिकार को स्वीकार नहीं करेगा.
तुर्की की दुविधा
ट्रंप की टैरिफ घोषणा से तुर्की के लिए रणनीतिक दुविधा पैदा करती है. एक ओर वह ईरान से ऊर्जा आयात पर निर्भर है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ उसके नाटो संबंध भी हैं. अंकारा के कूटनीतिक हलकों में इसे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि तुर्की ने अभी इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
भारत और यूएई असहज
भारत और यूएई जैसे देशों के लिए भी ट्रंप की टैरिफ चेतावनी असहज स्थिति पैदा करने वाली है. भारत पहले ही ईरान से तेल आयात में कटौती कर चुका है. लेकिन वर्तमान स्थिति में भारत के लिए ईरान से पूरी तरह दूरी बनाना आसान नहीं है. विश्लेषकों का मानना है कि 25 प्रतिशत टैरिफ जैसी चेतावनी वैश्विक व्यापार नियमों एवं समझौतों को भी चुनौती देती है.
युद्ध की आशंका बरकरार
राजनीतिक संकट और संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंका खत्म नहीं हुआ है. इसका असर वैश्विक बाज़ारों पर भी पड़ा है. अमेरिकी चेतावनी के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें सात सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. निवेशकों को डर है कि अगर ईरान के निर्यात पर और असर पड़ा या होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, तो आपूर्ति बाधित हो सकती है.
अमेरिका में विकल्पों पर हो रही चर्चा
अमेरिका के भीतर विकल्पों पर चर्चा तेज़ हो गई है. रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप प्रशासन सैन्य हमले, हवाई हमले, साइबर ऑपरेशन, प्रतिबंधों के विस्तार और ईरानी विपक्ष को डिजिटल समर्थन देने जैसे कदमों पर विचार कर रहा है. हालांकि सैन्य विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि घनी आबादी वाले इलाकों में स्थित ईरानी ठिकानों पर हमला बेहद जोखिम भरा होगा.
ईरान के भीतर सुलगती आग
ईरान में मौजूदा विरोध प्रदर्शन बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन धीरे-धीरे यह आंदोलन धार्मिक नेतृत्व और मौलवी प्रतिष्ठान के अस्तित्व को चुनौती देने वाली आवाज़ों में बदल गया. अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA के अनुसार अब तक 646 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें सैकड़ों प्रदर्शनकारी शामिल हैं. इसके अलावा 10 हज़ार से अधिक गिरफ्तारियां भी की जा चुकी हैं.
सरकारी आंकड़े सामने नहीं आए हैं, लेकिन वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों की रिपोर्टें बड़े पैमाने पर हिंसा की ओर इशारा करती हैं. तेहरान के बेहेश्ट-ए-ज़हरा कब्रिस्तान में मृतकों के परिजनों का दफन स्थलों पर नारेबाज़ी करना इस बात का संकेत है कि डर के बावजूद गुस्सा कम नहीं हुआ है.
ईरानी सरकार इन घटनाओं के लिए अमेरिका और इज़राइल समर्थित आतंकवादी तत्वों को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर क़ालिबाफ ने कहा कि ईरान चार मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है- आर्थिक, मनोवैज्ञानिक, सैन्य और आतंकवाद के खिलाफ.
- ट्रंप ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन सहित कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं.
- ट्रंप सैन्य कार्रवाई और टैरिफ बम जैसी धमकियां साथ-साथ दे रहे हैं.
- ट्रंप के टैरिफ बम पर चीन ने दी कड़ी प्रतिक्रिया.
- ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत करने का विकल्प दिया है.
- अधिकार समूह का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 646 हो गई है.
सवाल अब भी बरकरार
ईरान संकट के बीच सवाल यही है कि क्या यह दबाव ईरान को बातचीत की मेज़ पर लाएगा. या फिर मध्य-पूर्व एक और बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है? फिलहाल, तेहरान की सड़कों से लेकर बीजिंग और वाशिंगटन तक, हर कोई अगले कदम की आहट सुनने की कोशिश कर रहा है.
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