Japan General Election: सर्वे में प्रधानमंत्री ताकाइची की ऐतिहासिक जीत की भविष्यवाणी, जानें कौन हैं ताकाइची

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Published On: Monday, February 2, 2026

Last Updated On: Monday, February 2, 2026

Japan General Election में सर्वे ने प्रधानमंत्री ताकाइची की संभावित जीत दिखाई, जानें उनकी राजनीतिक यात्रा और योगदान.
Japan General Election में सर्वे ने प्रधानमंत्री ताकाइची की संभावित जीत दिखाई, जानें उनकी राजनीतिक यात्रा और योगदान.

अखबार आसाही सर्वे के संकेत साफ हैं कि प्रधानमंत्री ताकाइची की पार्टी बड़ी जीत के करीब है. लेकिन इस जीत से वह जितनी राजनीतिक रूप से मजबूत होगी, उतनी ही आर्थिक चुनौतियां भी साथ लाएगी. विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि यही चुनाव का असली दांव है- लोकप्रियता बनाम वित्तीय अनुशासन.

Authored By: गुंजन शांडिल्य

Last Updated On: Monday, February 2, 2026

Japan General Election: जापान में अगले रविवार यानी 8 फरवरी को संसद के निचले सदन के लिए चुनाव हो रहे है. जापान के छह दशक के संसदीय इतिहास में यह पहली बार कि निचले सदन को भंग कर मध्यावधि चुनाव हो रहे हैं. संसद को भंग कर चुनाव कराना जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. जापान के राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह चुनाव सिर्फ एक नियमित संसदीय अभ्यास नहीं होगा. बल्कि यह चुनाव प्रधानमंत्री ताकाइची के राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ उस आर्थिक रास्ते पर भी मुहर लगाएगा, जिस पर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चलने जा रही है.

हालांकि चुनाव पूर्व सर्वे प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के लिए राहत भरा है. आसाही शिंबुन के ताज़ा सर्वे ने संकेत दिया है कि ताकाइची की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) इस चुनाव में बड़ी जीत के करीब है. सर्वे का यह अनुमान वहां के बाजारों से लेकर नौकरशाही तक हलचल पैदा कर रहा है.

चुनाव पूर्व सर्वे में बहुमत से कहीं आगे LDP

आसाही अख़बार के सर्वे के मुताबिक 465 सदस्यीय निचले सदन में LDP अकेले ही 233 सीटों के जादुई आंकड़े को पार कर सकती है. मौजूदा 198 सीटों की तुलना में प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी की यह एक बड़ी छलांग होगी. अगर इसमें गठबंधन सहयोगी जापान इनोवेशन पार्टी (इशिन) को जोड़ दिया जाए, तो सत्ताधारी खेमे के पास कुल सीटें 300 के आसपास पहुंच सकती हैं.

सर्वे की यह संख्या जापान में एक स्थिर सरकार का संकेत दे रहा है. वर्तमान में सत्ताधारी गठबंधन अल्पमत में था. साथ ही सर्वे यह भी पता चलता है कि ताकाइची अपनी पार्टी और गठबंधन दोनों पर पहले से कहीं मजबूत पकड़ बनाने जा रही हैं.

‘एक्टिव फिस्कल पॉलिसी’ को मिल सकता है जनादेश

ताकाइची का चुनावी मुद्दा साफ है. प्रधानमंत्री ताकाइची बड़े सरकारी खर्च, टैक्स में कटौती और उपभोक्ताओं को राहत जैसे चुनावी मुद्दे बनाए हैं. उन्होंने खाने-पीने की वस्तुओं पर लगने वाले 8 प्रतिशत कंजम्पशन टैक्स को दो साल के लिए सस्पेंड करने का वादा किया है. यह वादा जनता में लोकप्रिय है, लेकिन वित्तीय बाजारों के लिए चिंता का विषय है.

मित्सुबिशी UFJ मॉर्गन स्टेनली सिक्योरिटीज के सीनियर बॉन्ड स्ट्रैटेजिस्ट केसुके त्सुरुता ने बताया है कि LDP की बड़ी जीत का मतलब होगा कि ताकाइची अपनी विस्तारवादी नीतियों को बिना ज्यादा राजनीतिक रुकावट के आगे बढ़ा सकेंगी.

यही वजह है कि आज (2 फरवरी) को जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी देखी गई. निवेशक पहले ही यह मानकर चल रहे हैं कि चुनावी जीत के बाद खर्च और टैक्स कटौती का सिलसिला और तेज होगा.

  • जापान के लोकप्रिय अखबार आसाही पोल के अनुसार, LDP बहुमत से काफी आगे निकल सकती है.
  • सर्वे के अनुसार, सत्ताधारी गठबंधन 300 सीटों तक पहुंच सकता है.
  • विस्तारवादी राजकोषीय नीति की उम्मीदों पर बॉन्ड यील्ड बढ़ी.

कमज़ोर विपक्ष, मजबूत होती सत्ता

जापान के आम चुनाव में कहा जा रहा है कि इस बार ताकाइची की सबसे बड़ी ताकत शायद उनका विपक्ष है. या यूं कहें कि विपक्ष की कमजोरी. आसाही सर्वे के अनुसार सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी सेंट्रिस्ट रिफॉर्म अलायंस अपनी मौजूदा 167 सीटों में से आधी तक गंवा सकती है.

अब तक निचले सदन में सत्ता पक्ष के पास सिर्फ मामूली बहुमत था और ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसिलर्स) में वह अल्पमत में है. यही वजह थी कि सरकार को हर अहम विधेयक के लिए विपक्ष पर निर्भर रहना पड़ता था. अगर यह चुनावी अनुमान सच साबित होता है, तो ताकाइची उस राजनीतिक जकड़न से काफी हद तक मुक्त हो जाएंगी.

छह दशकों बाद शुरुआती सेशन में ही संसद भंग

इस चुनाव को ऐतिहासिक बनाने वाला एक और पहलू है, लोअर हाउस का भंग होना. जापान में प्रधानमंत्री को यह अधिकार है. लेकिन छह दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है कि रेगुलर संसदीय सेशन शुरू होते ही निचले सदन को भंग कर दिया गया.

कुछ दिन पहले ही ताकाइची की कैबिनेट ने संसद भंग करने के फैसले को मंजूरी दी और 8 फरवरी को अचानक चुनाव का ऐलान हुआ. यह कदम इस बात का संकेत है कि प्रधानमंत्री आधे-अधूरे समर्थन के साथ शासन करने के बजाय सीधे जनता के पास जाने का जोखिम उठाने को तैयार हैं.

‘मुझे पूरा जनादेश चाहिए’

काइची खुद कह चुकी हैं कि अक्टूबर 2025 में प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन्हें अब तक ‘पूरा जन समर्थन’ नहीं मिला है. भले ही अपनी कैबिनेट में वह लोकप्रिय हैं, लेकिन संसद में कमजोर स्थिति उनके एजेंडे में बाधा बन रही थी.

यह चुनाव उसी कमी को दूर करने की कोशिश है. एक ऐसा जनादेश जो नीतिगत फैसलों पर सवाल उठाने की गुंजाइश कम कर दे.

सर्वे में जीत तय, लेकिन सवाल बाकी

आसाही पोल के संकेत साफ हैं कि ताकाइची की पार्टी बड़ी जीत के करीब है. लेकिन यह जीत जितनी राजनीतिक रूप से मजबूत होगी, उतनी ही आर्थिक चुनौतियां भी साथ लाएगी. सर्वे के मुताबिक ताकाइची चुनाव जीत रहीं हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या जापान उनकी कठोर राजकोषीय नीति का बोझ लंबे समय तक उठा पाएगा. विशेषज्ञ भी कह रहे हैं कि यही चुनाव का असली दांव है- लोकप्रियता बनाम वित्तीय अनुशासन.

ताकाइची का राजनीतिक सफर

सनाए ताकाइची का राजनीतिक सफर अपने आप में असाधारण है. 1993 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में निचले सदन में प्रवेश करने वाली ताकाइची 1996 में LDP में शामिल हुईं थीं. शिंजो आबे की कैबिनेट में उन्होंने पहली बार मंत्री पद संभाला.

वे कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं. इंटरनल अफेयर्स मिनिस्टर के रूप में उनका कार्यकाल सबसे लंबा रहा है. इसके अलावा आर्थिक सुरक्षा मंत्री, और LDP की पॉलिसी रिसर्च काउंसिल की पहली महिला चेयरपर्सन रहीं हैं. 2024 में उन्होंने शिंजिरो कोइज़ुमी को हराकर पार्टी नेतृत्व हासिल किया और अब प्रधानमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक पकड़ को निर्णायक रूप देने की कोशिश में हैं.

कर्ज़ का पहाड़ और बाज़ार की बेचैनी

जापान पहले ही एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां उसका सार्वजनिक कर्ज़ देश की अर्थव्यवस्था के आकार से दोगुना से भी अधिक है. ऐसे में फिस्कल डिसिप्लिन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. पिछले महीने जब ताकाइची ने टैक्स सस्पेंशन का ऐलान किया था, तो जापानी शेयर और बॉन्ड मार्केट में तेज़ गिरावट देखी गई थी.

निवेशकों की चिंता साफ है कि क्या लोकप्रिय नीतियों के दबाव में सरकार कर्ज़ और घाटे को काबू में रख पाएगी?

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गुंजन शांडिल्य समसामयिक मुद्दों पर गहरी समझ और पटकथा लेखन में दक्षता के साथ 10 वर्षों से अधिक का अनुभव रखते हैं। पत्रकारिता की पारंपरिक और आधुनिक शैलियों के साथ कदम मिलाकर चलने में निपुण, गुंजन ने पाठकों और दर्शकों को जोड़ने और विषयों को सहजता से समझाने में उत्कृष्टता हासिल की है। वह समसामयिक मुद्दों पर न केवल स्पष्ट और गहराई से लिखते हैं, बल्कि पटकथा लेखन में भी उनकी दक्षता ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। उनकी लेखनी में विषय की गंभीरता और प्रस्तुति की रोचकता का अनूठा संगम दिखाई देता है।
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