Relationship Communication: क्या आपका पार्टनर देर से करता है मैसेज का रिप्लाई, दूरी का संकेत है या सिर्फ गलतफहमी?
Authored By: Nishant Singh
Published On: Wednesday, February 18, 2026
Updated On: Wednesday, February 18, 2026
Relationship Communication: आज के डिजिटल दौर में मैसेज पार्टनर के बीच बातचीत का सबसे आसान जरिया बन गया है. ऐसे में देर से रिप्लाई मिलना कई बार शक, चिंता और गलतफहमी को जन्म देता है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
Authored By: Nishant Singh
Updated On: Wednesday, February 18, 2026
Relationship Communication: आज टेक्स्ट मैसेजिंग पार्टनर के बीच बातचीत का सबसे बड़ा जरिया बन चुकी है. सुबह का गुड मॉर्निंग हो या रात का गुड नाइट, सब कुछ फोन पर सिमट गया है. ऐसे में जब सामने वाला घंटों तक रिप्लाई न करे, तो मन में तरह-तरह के ख्याल आने लगते हैं. लगता है कहीं दिलचस्पी तो कम नहीं हो गई? या कोई दूरी तो नहीं बन रही? लेकिन हर बार देर से आया जवाब रिश्ते में ठंडेपन का सबूत नहीं होता. कई बार हम जल्दबाज़ी में चीज़ों को जरूरत से ज्यादा गंभीर मान लेते हैं.
देर से जवाब आने के पीछे क्या हो सकती है वजह
हर इंसान का कम्युनिकेशन स्टाइल अलग होता है. कुछ लोग काम के दौरान फोन साइलेंट रखते हैं, तो कुछ लगातार मीटिंग्स में फंसे रहते हैं. कई लोग तुरंत-तुरंत चैट करने के बजाय एक तय समय पर आराम से बात करना पसंद करते हैं. इसके अलावा मानसिक थकान, एंग्जायटी या बर्नआउट भी जवाब देने में देरी की वजह बन सकता है. आजकल बहुत से लोग जानबूझकर स्क्रीन टाइम कम कर रहे हैं- जैसे खाने के वक्त या सोने से पहले फोन से दूरी बनाना. अगर मैसेज किसी संवेदनशील मुद्दे पर हो, तो सामने वाला सोच-समझकर जवाब देने के लिए समय भी ले सकता है.
एक्सपर्ट की नजर में देर से रिप्लाई का मतलब
रिलेशनशिप एक्सपर्ट मानते हैं कि कम्युनिकेशन गैप हमेशा प्यार की कमी नहीं होता, बल्कि जरूरतों और समय के तालमेल का फर्क होता है. क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और रिलेशनशिप स्पेशलिस्ट डॉ. लीना टोरेस कहती हैं कि देर से जवाब मिलने पर हमारी प्रतिक्रिया हमारे अटैचमेंट स्टाइल से जुड़ी होती है. जिन लोगों में असुरक्षा ज्यादा होती है, वे चुप्पी को अस्वीकृति समझ लेते हैं. वहीं कुछ लोग दूरी बनाकर रिएक्ट करते हैं, जिससे गलतफहमियां और बढ़ जाती हैं.
कब सतर्क होना जरूरी
कभी-कभार देर से जवाब मिलना सामान्य है, लेकिन अगर हमेशा आप ही बातचीत की शुरुआत कर रहे हैं और खुद को लगातार उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो यह रिश्ते में असंतुलन का संकेत हो सकता है. ऐसे में आरोप लगाने के बजाय खुलकर बात करना बेहतर होता है. उदाहरण के लिए, यह कहना कि “जब जवाब देर से आता है तो मुझे थोड़ा अजीब लगता है, क्या हम बात करने का कोई तय समय रख सकते हैं?” रिश्ते को मजबूत बना सकता है. याद रखें, मैसेज का टाइम रिश्ते की गहराई तय नहीं करता, लेकिन साफ बातचीत और आपसी समझ जरूर करती है.
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