20s में बढ़ती इनफर्टिलिटी: युवा कपल्स क्यों हो रहे परेशान, जानें कारण और एक्सपर्ट्स की सलाह

Authored By: Nishant Singh

Published On: Saturday, February 28, 2026

Last Updated On: Saturday, February 28, 2026

20s में इनफर्टिलिटी से परेशान युवा कपल मेडिकल रिपोर्ट देखते हुए
20s में इनफर्टिलिटी से परेशान युवा कपल मेडिकल रिपोर्ट देखते हुए

20 से 30 साल की उम्र को फर्टिलिटी के लिए सबसे बेहतर माना जाता है, फिर भी अब युवा कपल्स में इनफर्टिलिटी की समस्या बढ़ रही है. बदलती लाइफस्टाइल, तनाव, मोटापा, हार्मोनल गड़बड़ी और पुरुषों में घटती स्पर्म क्वालिटी इसके प्रमुख कारण हैं. एक्सपर्ट्स समय पर जांच, संतुलित आहार और हेल्दी रूटीन अपनाने की सलाह देते हैं.

Authored By: Nishant Singh

Last Updated On: Saturday, February 28, 2026

Young Couples Fertility Issues: पहले यह माना जाता था कि प्रेग्नेंसी में दिक्कतें 30 या 35 साल के बाद शुरू होती हैं, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. डॉक्टरों के पास 23 से 29 साल के युवा कपल्स भी कंसीव न कर पाने की समस्या लेकर पहुंच रहे हैं. 20 से 30 साल की उम्र को जैविक रूप से सबसे बेहतर फर्टाइल समय माना जाता है, फिर भी इस उम्र में दिक्कतें सामने आना चिंता की बात है. आंकड़े बताते हैं कि समस्या आम होती जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर 6 में से एक व्यक्ति जीवन में कभी न कभी इनफर्टिलिटी का सामना करता है. इससे साफ है कि यह सिर्फ बढ़ती उम्र की समस्या नहीं रह गई है.

लाइफस्टाइल का सीधा असर

आज की अनियमित जीवनशैली फर्टिलिटी पर गहरा असर डाल रही है. देर रात तक जागना, नींद पूरी न होना, जंक फूड का ज्यादा सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी हार्मोनल संतुलन बिगाड़ देती है. बढ़ता मोटापा महिलाओं में ओवुलेशन को प्रभावित कर सकता है, वहीं पुरुषों में स्पर्म क्वालिटी घटा सकता है. कई युवा यह सोचकर जांच टाल देते हैं कि अभी उम्र कम है, लेकिन शरीर के अंदर होने वाले बदलाव धीरे-धीरे असर दिखाते हैं.

पुरुषों की भी बढ़ती समस्या

इनफर्टिलिटी को लंबे समय तक सिर्फ महिलाओं से जोड़कर देखा गया, जबकि अब पुरुषों में भी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. लो स्पर्म काउंट, स्पर्म की कम गतिशीलता और हार्मोनल असंतुलन आम होते जा रहे हैं. स्मोकिंग, शराब, तनाव और लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखकर काम करना भी स्पर्म हेल्थ को प्रभावित कर सकता है. इसलिए फर्टिलिटी को दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी के रूप में समझना जरूरी है.

महिलाओं में हार्मोनल गड़बड़ी

कम उम्र में पीसीओएस, थायराइड और एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं. ये स्थितियां पीरियड्स को अनियमित कर सकती हैं और कंसीव करने में बाधा बन सकती हैं. साथ ही, हर महिला सीमित ओवेरियन रिजर्व के साथ जन्म लेती है, जो समय के साथ कम होता जाता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल इस प्रक्रिया को तेज कर सकती है.

तनाव भी है बड़ा कारण

करियर का दबाव, आर्थिक चिंता और सामाजिक अपेक्षाएं युवाओं में तनाव बढ़ा रही हैं. लगातार तनाव से शरीर में ऐसे हार्मोन बढ़ते हैं जो प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकते हैं. महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर गिर सकता है. ऐसे में संतुलित दिनचर्या, सही खानपान, नियमित व्यायाम और समय पर मेडिकल जांच फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं.

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About the Author: Nishant Singh
निशांत कुमार सिंह एक पैसनेट कंटेंट राइटर और डिजिटल मार्केटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और जनसंचार का गहरा अनुभव है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आकर्षक आर्टिकल लिखने और कंटेंट को ऑप्टिमाइज़ करने में माहिर, निशांत हर लेख में क्रिएटिविटीऔर स्ट्रेटेजी लाते हैं। उनकी विशेषज्ञता SEO-फ्रेंडली और प्रभावशाली कंटेंट बनाने में है, जो दर्शकों से जुड़ता है।
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