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Sonam Wangchuk Encounter: सोनम वांगचुक का ‘एनकाउंटर’ वाला बयान, लद्दाख हिंसा पर अमित शाह के इस्तीफे की मांग
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Friday, September 25, 2026
Last Updated On: Friday, September 25, 2026
Sonam Wangchuk ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर अपने ‘एनकाउंटर’ की आशंका जताई है. लद्दाख हिंसा की पहली बरसी पर उन्होंने अमित शाह के इस्तीफे की मांग भी की.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Friday, September 25, 2026
Sonam Wangchuk Encounter: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के ठीक एक वर्ष बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचकु ने एक सनसनीखेज बयान देकर हर किसी को हैरत मे डाल दिया है. क्या है वो बयान और किस बात की वो जता रहे हैं आशंका. जानते हैं पूरा सच..
लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk news) ने हाल ही में (सितंबर 2026 में) सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण अपना ‘एनकाउंटर‘ (हत्या) किए जाने की आशंका जताई है.
वांगचुक द्वारा यह बयान दिए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं –
1. सरकार के खिलाफ बोलने पर खतरा
लेह में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने कहा कि सरकार के खिलाफ लगातार बोलने के कारण उन्हें जान से मारने की धमकियां और चेतावनियां मिल रही हैं. उन्होंने कहा, ‘प्रशासन ने मुझे पहले जेल में डाला. अब इस बात की भी पूरी संभावना है कि मेरा कहीं एनकाउंटर कर दिया जाए. लोग मुझसे कहते हैं कि तुम्हारा एनकाउंटर हो जाएगा.
2. ‘लेह हिंसा पर गृहमंत्री का इस्तीफा मांगना
वांगचुक ने पिछले साल (24 सितंबर 2025 को) लद्दाख (Sonam Wangchuk Ladakh) को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग के दौरान हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है. उस हिंसा में पुलिस फायरिंग के दौरान चार लोगों की मौत हो गई थी, जिसे वांगचुक ने सीधे तौर पर हत्या करार दिया है.
3. देश को जगाने की इच्छा
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हैं ताकि उनके साथ कुछ होने पर देश के लोग लद्दाख के मु़द्दों और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें. वहीं दूसरी ओर, लद्दाख पुलिस और प्रशासन ने उनके इन आरोपों और पाबंदियों के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था केवल भीड़ और यातायात प्रबंधन के लिए की गई थी. सरकार पूर्व में उन पर भड़काऊ भाषण देने और प्रदशर्नों को हिंसक बनाने का आरोप भी लगा चुकी है.
क्या है प्रमुख वजह
आखिर वांगचुक ऐसी आशंका क्यों जता रहे हैं? क्या उनका ये बयान सुर्खियों में आना तो नहीं है या सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा तो नहीं. क्योंकि उन्हें आंदोलन किए एक वर्ष बीत चुका है. और अभी तक लद्दाख (Ladakh) को पूर्ण राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की उनकी मांग को सरकार ने तवज्जो नहीं दी है. हालांकि, सरकार को खुद इस मामले में संज्ञान लेकर उनके बयान की सत्यता की जांच करनी चाहिए.
Written By: Rajiv mandal
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