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UPI पर 15 अक्टूबर से MDR? सुप्रीम कोर्ट के 4 हफ्ते में क्या होगा बड़ा फैसला
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, September 29, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
UPI पर 15 अक्टूबर से MDR को लेकर चर्चा तेज है. सुप्रीम कोर्ट के 4 हफ्ते का समय क्यों अहम है और इसका UPI payment पर क्या असर पड़ सकता है? जानिए पूरा मामला.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Tuesday, September 29, 2026
UPI पर MDR लागू करने का फैसला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. 28 सितंबर को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले की सुनवाई की. कोर्ट ने फिलहाल MDR लागू करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन केंद्र, RBI और दूसरे पक्षों को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा.
इसका सीधा मतलब यह है कि अभी सरकार का 15 अक्टूबर(15 October) से MDR लागू करने का फैसला रुका नहीं है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार किया है और आगे इस पर कानूनी दलीलें सुनी जाएंगी.
15 अक्टूबर से आखिर क्या बदलेगा?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि 15 अक्टूबर (15 October) से हर UPI भुगतान (UPI payment) पर चार्ज नहीं लगेगा. नए नियम मुख्य रूप से कुछ P2M यानी Person-to-Merchant लेनदेन पर लागू होंगे.
सामान्य तौर पर ₹2,000 से ज्यादा के पात्र व्यापारी भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR तय किया गया है. ₹75,000 या उससे ज्यादा के लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. वहीं ₹2,000 तक के P2M भुगतान पर MDR नहीं लगेगा.
आम UPI यूजर के लिए क्या बदलेगा?
- आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि UPI से पैसा भेजने पर उन्हें कोई अलग चार्ज नहीं देना होगा.
- व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान किसी भी राशि का हो, वह मुफ्त रहेगा. इसी तरह छोटे कारोबारियों के लिए भी कुछ शर्तों के तहत zero-MDR की व्यवस्था रखी गई है.
- सरकार के मुताबिक करीब 96 फीसदी P2M लेनदेन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे. यानी इसे सभी UPI भुगतान पर लगाया गया चार्ज समझना सही नहीं होगा.
फिर सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंचा मामला?
इस नए MDR ढांचे को एक जनहित याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिका में नए शुल्क की कानूनी प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर सवाल उठाए गए हैं.
28 सितंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की. कोर्ट ने केंद्र, RBI और दूसरे संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है.
सुनवाई के दौरान पीठ ने यह भी संकेत दिया कि मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि तकनीकी पहलुओं से भी जुड़ा है.
चार हफ्ते बाद क्या हो सकता है?
यहां एक बात समझना जरूरी है. चार हफ्ते में सरकार और दूसरे पक्षों को अपना जवाब देना है. इसका मतलब यह नहीं है कि चार हफ्ते बाद अपने आप MDR खत्म हो जाएगा.
15 अक्टूबर तक अगर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से कोई नई रोक नहीं आती है, तो तय नियम के अनुसार MDR लागू हो सकता है. इसके बाद आगे की सुनवाई में कोर्ट सरकार और अन्य पक्षों की दलीलें देखेगा और मामले पर आगे आदेश दे सकता है. फिलहाल कोर्ट ने MDR को अंतिम रूप से सही या गलत घोषित नहीं किया है.
MDR क्या है और पैसा किससे लिया जाएगा?
MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से जुड़ा शुल्क है. यह कोई GST या सरकार की ओर से आम ग्राहक पर लगाया गया UPI टैक्स नहीं है.
वित्त मंत्रालय के मुताबिक MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स और दूसरे भागीदारों के बीच बांटा जाता है. सरकार ने यह भी कहा है कि बैंक व्यापारियों को यह शुल्क ग्राहकों से वसूलने की अनुमति न दें.
अभी सबसे अहम बात क्या है?
फिलहाल दो बातें अलग-अलग समझना जरूरी है. पहली, 15 अक्टूबर से कुछ बड़े व्यापारी UPI भुगतान पर MDR लागू होना तय है. दूसरी, इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (Supreme Court UPI case) दी गई है और कोर्ट ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं दिया है.
इसलिए आम UPI यूजर के लिए फिलहाल रोजमर्रा के भुगतान में कोई सीधा चार्ज नहीं है. आगे क्या होगा, यह सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई और सरकार तथा RBI के जवाब पर निर्भर करेगा.
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