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UPI के 0.4% चार्ज पर क्यों मचा बवाल? दुकानदारों का लेटर, सरकार का जवाब और विपक्ष का हमला
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Tuesday, September 22, 2026
Last Updated On: Tuesday, September 22, 2026
UPI को लेकर देशभर में नया विवाद खड़ा हो गया है. 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ merchant transactions पर 0.4% MDR लागू होने से पहले मोबाइल दुकानदारों ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर राहत की मांग की है. दूसरी तरफ सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई UPI शुल्क नहीं लिया जाएगा और करीब 96% merchant transactions प्रभावित नहीं होंगे. विपक्ष इस फैसले पर सरकार को घेर रहा है. आखिर विवाद की पूरी कहानी क्या है और आम आदमी पर इसका कितना असर पड़ेगा?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Tuesday, September 22, 2026
UPI 0.4% Charge: भारत में UPI लंबे समय से आम लोगों और दुकानदारों के लिए बिना MDR के इस्तेमाल होता रहा है. अब 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant यानी P2M transactions पर नया MDR ढांचा लागू होने जा रहा है. 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र merchant transactions पर 0.4% MDR निर्धारित किया गया है. 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के transaction पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये रहेगा.
आम आदमी को क्या देना होगा?
सरकार की तरफ से सबसे अहम स्पष्टीकरण यही है कि ग्राहक से UPI इस्तेमाल करने का कोई अलग शुल्क नहीं लिया जाएगा. Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे पर भी MDR नहीं लगेगा. 2,000 रुपये तक के merchant payments भी zero-MDR व्यवस्था में रहेंगे. वित्त मंत्रालय के मुताबिक करीब 96% P2M transactions इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे.
फिर दुकानदार क्यों परेशान?
विवाद की असली वजह merchant का खर्च है. MDR ग्राहक से नहीं, merchant payment ecosystem से जुड़ा शुल्क है. लेकिन छोटे कारोबारियों का कहना है कि उनकी कमाई का मार्जिन पहले से बहुत कम है. ऐसे में हर पात्र UPI transaction पर 0.4% लागत उनके मुनाफे को प्रभावित कर सकती है. Reuters ने भी retailer organisations की इसी चिंता को रिपोर्ट किया है.
मोबाइल दुकानदारों का बड़ा पत्र
21 सितंबर को All India Mobile Retailers Association यानी AIMRA ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर छोटे और मध्यम मोबाइल दुकानदारों को UPI MDR से छूट देने की मांग की. संगठन का दावा है कि वह देशभर के 1.50 लाख से ज्यादा छोटे मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स retailers का प्रतिनिधित्व करता है.
मार्जिन का दिया हवाला
AIMRA के मुताबिक mainline mobile retailers का net margin अक्सर 0.75% से 1.50% के बीच रहता है. संगठन का कहना है कि यदि UPI पर 0.4% MDR लागू होता है तो यह उनकी पहले से कम कमाई पर सीधा असर डालेगा. AIMRA ने यह भी कहा कि कमजोर बिक्री और बढ़ती operating costs के बीच अतिरिक्त payment cost छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किल बढ़ा सकती है.
10 लाख की बिक्री पर कितना असर?
AIMRA ने अपने पत्र में एक उदाहरण दिया है. संगठन के अनुसार यदि कोई retailer महीने में 10 लाख से 40 लाख रुपये का UPI कारोबार करता है और उस पर 0.4% MDR लागू होता है, तो अतिरिक्त लागत करीब 4,000 से 16,000 रुपये महीने हो सकती है. यह संगठन का अनुमान है, न कि सरकार द्वारा तय किसी retailer के वास्तविक नुकसान का आंकड़ा.
मोबाइल बाजार पहले से दबाव में?
AIMRA ने सरकार को यह भी बताया है कि मोबाइल retail sector पहले से दबाव में है. संगठन के अनुसार handset prices में बढ़ोतरी और कमजोर business volumes ने retailers की स्थिति प्रभावित की है. Economic Times ने AIMRA के हवाले से रिपोर्ट किया कि association ने करीब 40% सालाना business-volume गिरावट का दावा किया है. यह आंकड़ा retailers association का दावा है, सरकारी आंकड़ा नहीं.
सिर्फ मोबाइल दुकानदार नहीं
UPI MDR को लेकर विरोध सिर्फ मोबाइल कारोबार तक सीमित नहीं है. Retailers Association of India ने भी चिंता जताई है कि अतिरिक्त लागत छोटे कारोबारियों को cash की तरफ जाने के लिए प्रेरित कर सकती है. Reuters के मुताबिक RAI ने कहा कि festival season में 2,000 रुपये से ऊपर की खरीदारी आम होती है और ऐसे समय में merchants के लिए अतिरिक्त लागत चिंता का विषय है.
चांदनी चौक के दुकानदार भी नाराज
Indian Express ने दिल्ली के चांदनी चौक के कारोबारियों से बात की. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दुकानदारों ने कहा कि सरकार ने डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया, लेकिन अब बड़े UPI payments पर MDR उनकी लागत बढ़ा सकता है. कारोबारियों ने यह भी बताया कि ग्राहकों को दोबारा cash की तरफ ले जाना आसान नहीं होगा, क्योंकि डिजिटल भुगतान अब रोजमर्रा के कारोबार का हिस्सा बन चुका है.
सरकार का तर्क क्या है?
सरकार का कहना है कि MDR को ग्राहक पर लगाया गया UPI charge समझना गलत है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक MDR payment ecosystem के participants जैसे banks, payment service providers और UPI apps के बीच वितरित होगा. सरकार का तर्क है कि इससे UPI ecosystem को लंबे समय तक financially sustainable बनाने और payment infrastructure को मजबूत करने में मदद मिलेगी.
छोटे दुकानदारों के लिए राहत
सरकार ने छोटे merchants के लिए भी अलग व्यवस्था रखी है. जिन छोटे merchants को UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक की राशि मिलती है, उन्हें zero-MDR framework में रखा गया है. इसके अलावा 2,000 रुपये तक के merchant transactions भी MDR से बाहर हैं. सरकार के अनुसार इसी वजह से करीब 96% merchant transactions unaffected रहेंगे.
पेट्रोल पंपों ने भी उठाई आवाज
UPI MDR विवाद अब fuel retailers तक पहुंच चुका है. कई petrol dealer associations ने 2,000 रुपये से ऊपर के UPI payments पर लगने वाले शुल्क से छूट की मांग की है. उनका तर्क है कि fuel prices और dealer margins regulated होते हैं, इसलिए अतिरिक्त payment cost को आसानी से कीमत में शामिल नहीं किया जा सकता. महाराष्ट्र के petrol dealers ने भी 21 सितंबर को केंद्र और संबंधित संस्थाओं से exemption की मांग की.
विपक्ष ने क्या कहा?
विपक्ष ने इस फैसले को लेकर सरकार पर हमला बोला है. Indian Express के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि UPI पर शुल्क लगाने के फैसले के पीछे अमेरिकी दबाव है और इसे वापस लेने की मांग की. NCP (Sharad Pawar faction) ने भी 21 सितंबर को 0.4% MDR को छोटे व्यापारियों पर बोझ बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की. ये विपक्षी दलों के राजनीतिक आरोप और मांगें हैं.
सरकार ने आरोपों पर क्या कहा?
केंद्र सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों को खारिज किया है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि UPI fee framework का उद्देश्य payment ecosystem की sustainability और infrastructure को मजबूत करना है. 21 सितंबर को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा और विपक्ष पर मुद्दे को लेकर misinformation फैलाने का आरोप लगाया.
असली चिंता ग्राहक की है या दुकानदार की?
कागज पर MDR merchant-side charge है और ग्राहक के लिए UPI payment free रखने की व्यवस्था है. लेकिन कारोबारियों की चिंता यह है कि अतिरिक्त लागत उनके profit margin को कम कर सकती है. इसी वजह से कुछ trade bodies ने cash की तरफ लौटने की संभावना जताई है. Reuters ने भी retailers की इस चिंता को प्रमुखता से रिपोर्ट किया है.
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तारीख 15 अक्टूबर 2026 है, जब नया MDR framework लागू होना है. उससे पहले mobile retailers समेत कई व्यापारिक संगठन सरकार से exemption या बदलाव की मांग कर रहे हैं. 21 सितंबर तक AIMRA की मांग वित्त मंत्रालय के सामने पहुंच चुकी है, जबकि सरकार अपने मौजूदा framework को UPI की long-term sustainability से जोड़ रही है.
विवाद का अगला अध्याय
इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI खत्म होने जा रहा है या हर दुकानदार ग्राहक से अतिरिक्त पैसा लेगा. मौजूदा आधिकारिक व्यवस्था में ग्राहक के लिए UPI payment free है, जबकि पात्र बड़े merchant transactions पर MDR merchant-side ecosystem में लागू होगा. असली तस्वीर 15 अक्टूबर के बाद सामने आएगी कि छोटे-बड़े कारोबार इस लागत को कैसे संभालते हैं और क्या सरकार व्यापारिक संगठनों की मांगों पर कोई बदलाव करती है.
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