राम चरण-चिरंजीवी ने अमित शाह से क्यों की मुलाकात? रश्मिका से जाह्नवी कपूर तक, AI डीपफेक से परेशान फिल्म इंडस्ट्री
Authored By: Mazhar Pathan
Published On: Wednesday, November 4, 2026
Updated On: Wednesday, November 4, 2026
AI और डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी और राम चरण ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. रश्मिका मंदाना, जाह्नवी कपूर, नागार्जुन, विजय देवरकोंडा और बॉलीवुड के कई सितारे भी AI के दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी कदम उठा चुके हैं. जानिए फिल्म इंडस्ट्री क्यों मांग रही है सख्त सुरक्षा और क्या हैं भारत में इससे जुड़े नियम.
Authored By: Mazhar Pathan
Updated On: Wednesday, November 4, 2026
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने फिल्मों की दुनिया में काम करने के कई नए रास्ते खोले हैं. इसकी मदद से शानदार विजुअल इफेक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं, फिल्मों की एडिटिंग आसान हो रही है और कई भाषाओं में कंटेंट तैयार करने की संभावनाएं बढ़ी हैं. लेकिन इसी तकनीक का एक दूसरा पहलू भी तेजी से सामने आ रहा है. AI के जरिए किसी अभिनेता का चेहरा किसी दूसरे व्यक्ति के वीडियो पर लगाया जा सकता है, उसकी आवाज की नकल की जा सकती है और ऐसा वीडियो बनाया जा सकता है, जो देखने में बिल्कुल असली लगे.
यही वजह है कि अब फिल्म इंडस्ट्री में AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ रही है. इस मुद्दे को लेकर तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार चिरंजीवी और उनके बेटे राम चरण ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारत में फिल्मी सितारों की डिजिटल पहचान और निजी छवि को सुरक्षित रखने के लिए मौजूदा कानून पर्याप्त हैं?
अमित शाह से मिले चिरंजीवी और राम चरण, AI के दुरुपयोग पर जताई चिंता
2 नवंबर 2026 को चिरंजीवी और राम चरण ने हैदराबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी भी मौजूद थे. दोनों अभिनेताओं ने AI और डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग का मुद्दा उठाया और बताया कि इससे कलाकारों के अधिकार, सम्मान और उनकी रचनात्मक पहचान को नुकसान पहुंच सकता है.
मुलाकात के बाद राम चरण ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि उन्हें AI और डीपफेक के गलत इस्तेमाल को लेकर अमित शाह की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है. उन्होंने बताया कि सरकार इस मामले की गंभीरता से जांच करने और कलाकारों के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों पर काम करने का आश्वासन दे रही है.
चिरंजीवी ने भी कहा कि उन्होंने गृह मंत्री के सामने कलाकारों की गरिमा, अधिकारों और रचनात्मक सामग्री से जुड़े खतरे रखे. उनके मुताबिक, अमित शाह ने इस मामले में लिखित ज्ञापन देने की सलाह दी और जी. किशन रेड्डी को इस विषय पर समन्वय करने की जिम्मेदारी सौंपी. हालांकि, इस मुलाकात के बाद किसी नए कानून या सजा की समय-सीमा का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है. फिलहाल यह सरकार के सामने फिल्म इंडस्ट्री की चिंता रखने और आगे की कार्रवाई पर विचार करने की पहल है.
रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो बना था बड़ा मामला
AI के गलत इस्तेमाल का सबसे चर्चित उदाहरण अभिनेत्री रश्मिका मंदाना से जुड़ा मामला रहा है. नवंबर 2023 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक लिफ्ट में जाती महिला के चेहरे पर रश्मिका का चेहरा लगा दिया गया था. पहली नजर में वीडियो असली दिखाई देता था, लेकिन जांच में सामने आया कि यह AI की मदद से तैयार किया गया डीपफेक था.
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू की और जनवरी 2024 में आंध्र प्रदेश के गुंटूर से मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया. पुलिस के मुताबिक, मूल वीडियो में दूसरी महिला दिखाई दे रही थी और आरोपी ने उस पर रश्मिका का चेहरा लगाया था.
इस घटना ने देशभर में डीपफेक तकनीक के खतरे पर बहस छेड़ दी थी. सवाल केवल एक अभिनेत्री की तस्वीर का नहीं था, बल्कि यह था कि किसी भी महिला या सार्वजनिक हस्ती की पहचान का इस्तेमाल उसकी अनुमति के बिना आपत्तिजनक वीडियो बनाने में किया जा सकता है.
जाह्नवी कपूर और जूनियर एनटीआर से जुड़ा AI वीडियो विवाद
साउथ और बॉलीवुड दोनों से जुड़ा एक और मामला अक्टूबर 2026 में चर्चा में आया. अभिनेत्री जाह्नवी कपूर ने एक AI से तैयार किए गए आपत्तिजनक वीडियो पर नाराजगी जताई, जिसमें उन्हें उनके फिल्मी सह-कलाकार जूनियर एनटीआर के साथ एक ऐसे दृश्य में दिखाया गया था, जिसका वास्तविक फिल्मांकन से कोई संबंध नहीं था.
यह वीडियो उनकी फिल्म ‘देवरा’ के गाने ‘चुट्टमल्ले’ से जुड़ी पहचान का इस्तेमाल करते हुए तैयार किया गया था. जाह्नवी ने बिना सहमति किसी महिला की छवि को इस तरह बदलकर पेश करने पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने इसे महिलाओं के प्रति डिजिटल दुर्व्यवहार का गंभीर उदाहरण बताया.
इस घटना ने यह सवाल भी उठाया कि AI के जरिए किसी अभिनेत्री की तस्वीर या वीडियो को आपत्तिजनक संदर्भ में दिखाना केवल मनोरंजन या मजाक नहीं माना जा सकता. इससे उसकी निजता, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत गरिमा प्रभावित हो सकती है.
साउथ सिनेमा के नागार्जुन और विजय देवरकोंडा भी पहुंचे अदालत
AI के दुरुपयोग के खिलाफ कानूनी लड़ाई सिर्फ चिरंजीवी और राम चरण तक सीमित नहीं है. तेलुगु अभिनेता नागार्जुन ने भी अपनी पहचान, आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. अदालत ने उनके व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं का बिना अनुमति व्यावसायिक या दूसरे अनुचित इस्तेमाल करने पर रोक लगाने वाली अंतरिम सुरक्षा दी.
इसी तरह अभिनेता विजय देवरकोंडा ने भी अपने नाम, आवाज, तस्वीर और पहचान के AI, डीपफेक और मॉर्फिंग के जरिए गलत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण मांगा. दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी पहचान से जुड़े अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने और चिन्हित आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए. इन मामलों से साफ होता है कि साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कलाकार अब अपनी डिजिटल पहचान को भी उतना ही महत्वपूर्ण मान रहे हैं, जितना अपनी वास्तविक पहचान और पेशेवर छवि को.
बॉलीवुड भी AI के गलत इस्तेमाल से परेशान, कई सितारों ने उठाए कानूनी कदम
AI और डीपफेक का खतरा केवल साउथ सिनेमा तक सीमित नहीं है. बॉलीवुड के कई बड़े सितारे भी अपनी तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अदालतों का दरवाजा खटखटा चुके हैं.
अभिनेता आमिर खान और रणवीर सिंह के फर्जी AI वीडियो 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान वायरल हुए थे. इन वीडियो में दोनों अभिनेताओं को राजनीतिक बयान देते और एक राजनीतिक दल का समर्थन करते हुए दिखाया गया था. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों वीडियो में छेड़छाड़ की गई थी. आमिर खान ने इस मामले में मुंबई पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी.
अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन ने भी अपनी आवाज, तस्वीर और व्यक्तित्व के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कानूनी संरक्षण की मांग की. अभिनेत्री काजोल को फरवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट से उनके व्यक्तित्व अधिकारों के संरक्षण को लेकर अंतरिम राहत मिली. अदालत ने उनकी पहचान का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल रोकने और आपत्तिजनक सामग्री हटाने से जुड़े निर्देश दिए.
जुलाई 2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने अभिनेत्री प्रीति जिंटा से जुड़े चिन्हित AI डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट को हटाने का निर्देश भी दिया. वहीं शिल्पा शेट्टी ने भी अपनी आवाज और हावभाव की कथित AI नकल तथा मॉर्फ्ड तस्वीरों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए.
सिर्फ चेहरा नहीं, आवाज और पहचान भी है निशाने पर
AI के दुरुपयोग का एक बड़ा खतरा वॉइस क्लोनिंग भी है. इसमें किसी व्यक्ति की असली आवाज के नमूनों की मदद से ऐसी नकली आवाज तैयार की जाती है, जो सुनने में उसी व्यक्ति जैसी लग सकती है. प्लेबैक सिंगर अरिजीत सिंह का मामला इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है. उनकी आवाज की AI नकल और बिना अनुमति इस्तेमाल से जुड़े विवाद में उन्होंने कानूनी कार्रवाई की थी. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन यानी WIPO ने भी इस मामले को AI, संगीत और कलाकारों के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़ा अहम उदाहरण बताया है.
ऐसे मामलों में किसी गायक की आवाज का इस्तेमाल नकली गाने बनाने, फर्जी विज्ञापन तैयार करने या ऐसे बयान देने के लिए किया जा सकता है, जो उसने कभी दिए ही नहीं. इसी तरह अभिनेताओं की डिजिटल पहचान का इस्तेमाल फर्जी ब्रांड एंडोर्समेंट, नकली प्रमोशन और भ्रामक वीडियो बनाने में हो सकता है.
इसलिए फिल्म इंडस्ट्री की मांग केवल आपत्तिजनक वीडियो हटाने तक सीमित नहीं है. कलाकार यह भी चाहते हैं कि उनकी आवाज, चेहरा, नाम, अभिनय और डिजिटल प्रतिरूप का इस्तेमाल उनकी अनुमति के बिना व्यावसायिक रूप से न किया जाए.
क्या भारत में AI डीपफेक के खिलाफ कानून मौजूद हैं?
भारत में AI से जुड़े हर मामले के लिए अलग से कोई एक कानून नहीं है, लेकिन कई मौजूदा कानूनी प्रावधान डीपफेक और डिजिटल पहचान के दुरुपयोग पर लागू हो सकते हैं. सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत पहचान की चोरी, किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर धोखाधड़ी और निजता के उल्लंघन से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं. इनमें धारा 66C, 66D और 66E शामिल हैं. अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन और प्रसारण से जुड़े मामलों में धारा 67 और 67A भी लागू हो सकती हैं.
इसके अलावा, केंद्र सरकार ने 10 फरवरी 2026 को IT Rules में संशोधन करके सिंथेटिक यानी AI से तैयार सामग्री से जुड़े नियमों को मजबूत किया. सरकार के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को वैध AI-जनित सामग्री की स्पष्ट पहचान और ट्रेस करने योग्य मेटाडेटा जैसी व्यवस्थाओं पर काम करना होगा. गैरकानूनी AI सामग्री के मामले में प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है.
25 मार्च 2026 को संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, अदालत या सक्षम सरकारी एजेंसी के आदेश अथवा निर्धारित सूचना मिलने पर प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए तीन घंटे की समय-सीमा का पालन करना होगा. इसका अर्थ यह नहीं है कि हर शिकायत पर हर सामग्री अपने आप तीन घंटे में हट जाएगी; यह निर्धारित कानूनी आदेश या सूचना की प्रक्रिया से जुड़ी समय-सीमा है.
फिल्म इंडस्ट्री की सबसे बड़ी मांग क्या है?
चिरंजीवी और राम चरण की अमित शाह से मुलाकात ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री की कई अहम मांगों को सामने ला दिया है. कलाकार चाहते हैं कि उनकी तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व का इस्तेमाल AI से तैयार सामग्री में करने से पहले उनकी सहमति ली जाए. फर्जी विज्ञापन, आपत्तिजनक डीपफेक, वॉइस क्लोनिंग और पहचान की नकल करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो.
इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शिकायत दर्ज कराने और आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया तेज होनी चाहिए. क्योंकि डीपफेक वीडियो कुछ ही घंटों में लाखों लोगों तक पहुंच सकता है. एक बार किसी कलाकार की छवि को नुकसान पहुंचने के बाद केवल वीडियो हटाना हमेशा पर्याप्त नहीं होता.
हालांकि, इस पूरे मुद्दे में एक संतुलन भी जरूरी है. AI का इस्तेमाल फिल्मों में विजुअल इफेक्ट्स, डबिंग, एडिटिंग और रचनात्मक प्रयोगों के लिए भी किया जाता है. इसलिए नियम ऐसे होने चाहिए, जो तकनीक के वैध इस्तेमाल को न रोकें, लेकिन किसी की पहचान, निजता और सहमति का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें.
चिरंजीवी और राम चरण ने अब यह मुद्दा सीधे केंद्र सरकार के सामने रखा है. बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक कई सितारे पहले ही इस लड़ाई को अदालतों तक ले जा चुके हैं. ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि फिल्म इंडस्ट्री की मांगों के बाद सरकार डिजिटल पहचान की सुरक्षा के लिए क्या ठोस कदम उठाती है.
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