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अनंत सिंह और नीरज कुमार की लड़ाई में क्यों घिरे ललन सिंह? JDU में किसका बढ़ रहा दबदबा?
Authored By: Galgotias Times Bureau
Published On: Saturday, October 31, 2026
Last Updated On: Saturday, October 31, 2026
बिहार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच शुरू हुआ विवाद अब पार्टी की अंदरूनी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. इस पूरे घटनाक्रम में ललन सिंह की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. वहीं संजय झा के बयान और नीतीश कुमार की सीमित राजनीतिक सक्रियता ने पार्टी के भविष्य और नेतृत्व को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं.
Authored By: Galgotias Times Bureau
Last Updated On: Saturday, October 31, 2026
बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (JDU) एक बार फिर अंदरूनी खींचतान को लेकर चर्चा में है. इस बार विवाद के केंद्र में मोकामा विधायक अनंत सिंह, वरिष्ठ नेता नीरज कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह हैं. एमएलसी चुनाव के दौरान सामने आया यह टकराव अब केवल दो नेताओं की नाराजगी तक सीमित नहीं रह गया है. पार्टी के भीतर किसका प्रभाव बढ़ रहा है और कौन राजनीतिक रूप से कमजोर पड़ रहा है, इस पर भी सवाल उठने लगे हैं. अनंत सिंह को लेकर ललन सिंह का रुख और नीरज कुमार की नाराजगी ने इस विवाद को और दिलचस्प बना दिया है. ऐसे में सवाल है कि क्या ललन सिंह JDU में अलग-थलग पड़ रहे हैं और नीतीश कुमार के बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में जा सकती है?
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच क्यों शुरू हुआ विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक सीट के चुनाव से हुई. JDU ने इस सीट से अपने वरिष्ठ नेता नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के फैसले के खिलाफ जाकर जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज कुमार सिंह का समर्थन कर दिया. अनंत सिंह का कहना था कि नीरज कुमार ने पहले उनके खिलाफ राजनीतिक गतिविधियां की थीं. इसलिए वह उनका समर्थन नहीं करेंगे. दूसरी तरफ, JDU के नेताओं ने इसे पार्टी अनुशासन के खिलाफ माना.
आखिरकार 24 अक्टूबर 2026 को JDU ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया.
नीरज कुमार की जीत के बाद ललन सिंह से बढ़ी दूरी
पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार ने जीत हासिल कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई. लेकिन जीत के बाद उनका एक बयान काफी चर्चा में आ गया. जब उनसे पूछा गया कि क्या वह ललन सिंह से मिलने या उनका आशीर्वाद लेने जाएंगे, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने यह भी कहा कि उनके साथ जो राजनीतिक व्यवहार हुआ है, उसका जवाब वह समय आने पर देंगे.
नीरज कुमार की नाराजगी के पीछे पुराना विवाद भी बताया जा रहा है. उनका आरोप है कि 2019 में अनंत सिंह के आवास से AK-47 समेत हथियार बरामद होने के मामले में उन पर भी आरोप लगाए गए थे. नीरज का कहना है कि बाद में अदालत ने उन्हें आरोपों से राहत दी, लेकिन ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनका बचाव नहीं किया.
क्या ललन सिंह और संजय झा के बीच भी है खींचतान?
JDU की अंदरूनी राजनीति में ललन सिंह के साथ पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की भूमिका भी चर्चा में है. संजय झा पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में सक्रिय हैं और नीरज कुमार की जीत के बाद भी उनके साथ दिखाई दिए.
वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता नारायण के हवाले से इस राजनीतिक विवाद में पार्टी पर नियंत्रण और नेताओं की महत्वाकांक्षाओं को लेकर चर्चा का जिक्र किया गया है. हालांकि, ललन सिंह और संजय झा के बीच किसी आधिकारिक टकराव या पार्टी में गुटबाजी की पुष्टि नहीं हुई है.
संजय झा ने भी विवाद को सामान्य राजनीतिक मतभेद बताते हुए कहा था कि ललन सिंह पार्टी के सम्मानित नेता हैं. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि ललन सिंह पार्टी में अलग-थलग पड़ गए हैं.
नीतीश कुमार के बाद कौन संभालेगा JDU की कमान?
इस विवाद के पीछे एक बड़ा सवाल JDU के भविष्य का भी है. नीतीश कुमार लंबे समय से पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं. लेकिन उनके बाद पार्टी की कमान किसके हाथ में होगी, इस पर चर्चाएं जारी हैं. नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को भी भविष्य के संभावित चेहरे के तौर पर देखा जाता है. हालांकि, उनके पास अभी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं जैसा राजनीतिक अनुभव नहीं है.
दूसरी तरफ ललन सिंह, संजय झा और दूसरे वरिष्ठ नेता संगठन में अपनी अहम भूमिका रखते हैं. ऐसे में नेतृत्व का सवाल पार्टी के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. JDU के इतिहास में प्रशांत किशोर, आरसीपी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेता भी प्रभावशाली पदों पर रहे, लेकिन बाद में उनका नीतीश कुमार से राजनीतिक टकराव हुआ और वे पार्टी से अलग हो गए.
अनंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट से भी लगा झटका
राजनीतिक विवाद के बीच अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें भी बढ़ गई हैं. सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द करते हुए उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है. अदालत ने बिहार पुलिस को चार महीने के भीतर जांच पूरी करने को भी कहा है. इस मामले में अनंत सिंह पर हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोप हैं. इन आरोपों का अंतिम फैसला अभी अदालत में होना बाकी है.
क्या JDU में कमजोर पड़ रहे हैं ललन सिंह?
फिलहाल इतना जरूर है कि अनंत सिंह विवाद ने ललन सिंह के सामने राजनीतिक असहजता पैदा की है. जिस नेता के समर्थन में वह खड़े दिखाई दिए, उसे पार्टी ने छह साल के लिए बाहर कर दिया. दूसरी तरफ नीरज कुमार की जीत और संजय झा के साथ उनकी नजदीकी ने पार्टी के भीतर नए समीकरणों की चर्चा बढ़ा दी है.
लेकिन ललन सिंह को JDU में कमजोर या अलग-थलग घोषित करना अभी सही नहीं होगा. असली तस्वीर आने वाले समय में साफ होगी, जब पार्टी के नेतृत्व और संगठन से जुड़े फैसले सामने आएंगे. फिलहाल बिहार की राजनीति में यह विवाद JDU के अंदर बदलते शक्ति संतुलन की ओर इशारा जरूर कर रहा है.













