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Wholesale Inflation: महंगाई डायन का कहर, थोक महंगाई जनवरी में 1.81% पर उछली, लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज
Authored By: Nishant Singh
Published On: Monday, February 16, 2026
Last Updated On: Monday, February 16, 2026
Wholesale Inflation: महंगाई ने फिर चिंता बढ़ा दी है. जनवरी 2026 में थोक महंगाई दर लगातार तीसरे महीने बढ़कर 1.81% पर पहुंच गई. खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी मुख्य कारण रही. सब्जियों की महंगाई 6.78% रही. विनिर्मित और गैर-खाद्य उत्पादों में भी उछाल देखा गया. यह बढ़ोतरी भविष्य में ब्याज दरों और मौद्रिक नीति पर असर डाल सकती है.
Authored By: Nishant Singh
Last Updated On: Monday, February 16, 2026
Wholesale Inflation: साल 2026 की शुरुआत ही महंगाई के मोर्चे पर झटका देने वाली रही है. सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर जनवरी में लगातार तीसरे महीने बढ़कर 1.81 प्रतिशत पर पहुंच गई. दिसंबर 2025 में यह सिर्फ 0.83 प्रतिशत थी, जबकि पिछले साल जनवरी में यह दर 2.51 प्रतिशत दर्ज की गई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि यह उछाल आम जनता के बजट और बाजार की स्थितियों पर असर डाल सकता है.
थोक महंगाई में बढ़ोतरी के पीछे क्या कारण?
उद्योग मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि मूल धातुओं के विनिर्माण, अन्य विनिर्मित उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य पदार्थों और वस्त्रों की कीमतों में तेजी थोक महंगाई बढ़ने के मुख्य कारण रहे हैं. जनवरी में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई 1.55 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर में इसमें 0.43 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. खासकर सब्जियों की महंगाई दर जनवरी में 6.78 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो दिसंबर में नकारात्मक 3.50 प्रतिशत थी. इसका सीधा असर रोजमर्रा के खाने-पीने की चीजों पर पड़ता है.
गैर-खाद्य वस्तुओं में तेजी का असर
खाद्य सामग्री के अलावा, गैर-खाद्य वस्तुओं में भी महंगाई तेजी से बढ़ी है. विनिर्मित उत्पादों में थोक महंगाई दिसंबर में 1.82 प्रतिशत थी, जो जनवरी में बढ़कर 2.86 प्रतिशत हो गई. वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में उछाल और भी ज्यादा देखा गया और यह 7.58 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि दिसंबर में यह सिर्फ 2.95 प्रतिशत थी. इसके कारण दैनिक उपयोग की इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, कपड़े और घरेलू सामग्री महंगी हो रही हैं.
ईंधन और बिजली में महंगाई पर काबू
हालांकि, ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही. जनवरी में यहां महंगाई दर 4.01 प्रतिशत दर्ज की गई. इसका मतलब यह है कि घरेलू ऊर्जा और पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में अधिक उछाल फिलहाल नहीं आया है. यह एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, क्योंकि ऊर्जा कीमतें सीधे तौर पर अन्य वस्तुओं की कीमतों को प्रभावित करती हैं.
खुदरा महंगाई और रिजर्व बैंक की चिंता
थोक महंगाई के साथ-साथ खुदरा महंगाई दर (CPI) भी जनवरी में बढ़कर 2.75 प्रतिशत पर पहुंच गई. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अपनी मौद्रिक नीति और ब्याज दरों का निर्धारण करते समय खुदरा महंगाई को आधार मानता है. केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक रेपो दर में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की है, जिससे रेपो दर 5.5 प्रतिशत रह गई है. थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी भविष्य में RBI की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के रुख को प्रभावित कर सकती है.
आम जनता और बाजार पर प्रभाव
थोक महंगाई में बढ़ोतरी का असर सीधे तौर पर आम जनता की जेब पर पड़ता है. महंगाई के बढ़ने से खाद्य और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ती हैं, जिससे घरेलू बजट पर दबाव पड़ता है. साथ ही, यह उधारी और निवेश पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि बढ़ती महंगाई के समय ब्याज दरों में बदलाव की संभावना रहती है. निवेशक और व्यापारी बाजार के रुख को देखते हुए अपनी योजनाओं में संशोधन कर सकते हैं.
भविष्य की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि थोक महंगाई में यह लगातार बढ़ोतरी सरकार और केंद्रीय बैंक के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है. यदि महंगाई पर काबू नहीं पाया गया तो यह न केवल बाजार की स्थिरता को प्रभावित करेगा, बल्कि आम लोगों की जीवनशैली पर भी असर डालेगा. इसलिए अब ध्यान इस बात पर है कि RBI आगे की मौद्रिक नीति में किस दिशा में कदम उठाता है.
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